बाल अपराध में तेजी: किताबों की जगह हथियार थाम रहे मासूम

भारत में जिस उम्र में बच्चों को पढ़ाई और खेल पर ध्यान देना चाहिए, उसी उम्र में कई किशोर अपराध की राह पकड़ रहे हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यह ट्रेंड हर साल गंभीर होता जा रहा है। चोरी और अपहरण के अलावा अब साइबर अपराध भी इस सूची में तेजी से जुड़ रहा है। यह जानकारी National Crime Records Bureau के अनुसार है।

(ब्यूरो कार्यालय)
नई दिल्ली (साई)।
भारत में बाल अपराध तेजी से बढ़ रहा है। किशोर अपराध के मामले में चोरी, अपहरण और साइबर अपराध शामिल हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यह ट्रेंड हर साल गंभीर होता जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कोई एक वजह नहीं है। समाज, परिवार और डिजिटल दुनिया के बदलाव मिलकर इसे बढ़ावा दे रहे हैं। गरीबी में रहने वाले कई बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। ऐसे में वे गलत संगत में पड़कर चोरी जैसे अपराध करने लगते हैं।

बाल अपराध के कारण

गरीबी में रहने वाले कई बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। ऐसे में वे गलत संगत में पड़कर चोरी जैसे अपराध करने लगते हैं।

शिक्षा की कमी से उन्हें सही-गलत का फर्क भी समझ नहीं आता। आज लगभग हर बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन है, लेकिन उसकी निगरानी बहुत कम है।

साइबर अपराध का बढ़ता खतरा

हिंसक गेम, आपत्तिजनक कंटेंट और गलत सोशल मीडिया इस्तेमाल बच्चों का व्यवहार बिगाड़ रहे हैं। साइबर ठग गिरोह भी बच्चों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

संयुक्त परिवार अब कम होते जा रहे हैं। कई घरों में माता-पिता व्यस्त रहते हैं या आपसी विवाद चलता रहता है। ऐसे माहौल में बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं और गलत दोस्तों की संगत में आ जाते हैं।

बाल अपराध में तेजी के आंकड़े

महिला सशक्तीकरण पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में साइबर क्राइम और साइबर सुरक्षा पर रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2022 के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध 239% बढ़ गए हैं।

  • 2017 से 2022 के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध 239% बढ़ गए हैं।
  • बच्चों से जुड़े ऑनलाइन शोषण के मामले भी कई गुना बढ़े।
  • साइबर स्टॉकिंग, सेक्सटॉर्शन, डीपफेक, ऑनलाइन ब्लैकमेल और फर्जी प्रोफाइल बनाकर परेशान करना शामिल है।

समाधान और सुझाव

पुलिस को हाईटेक बनाने के लिए हर राज्य में डिजिटल फॉरेंसिक लैब बनाने और मोबाइल साइबर फॉरेंसिक वैन शुरू करने की सिफारिश की गई है। पुलिसकर्मियों को आधुनिक साइबर ट्रेनिंग देने और साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

साइबर शक्ति कार्यक्रम का विस्तार कर महिला पुलिसकर्मियों और साइबर सेल को विशेष प्रशिक्षण देने का सुझाव है। साथ ही साइबर मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने की बात कही गई है, ताकि फैसले जल्दी हो सकें। आप साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा बाल अपराध और साइबर सुरक्षा पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।