प्रकृति और विज्ञान का अनोखा संगम देखने को तैयार मध्यप्रदेश
(विद्याधर जाधव)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश के लोगों के लिए 21 जून का दिन विज्ञान और खगोल विज्ञान की दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन प्रदेश के 14 जिलों में कुछ क्षणों के लिए एक ऐसी प्राकृतिक घटना दिखाई देगी, जिसे देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह जाएगा। दोपहर के समय सूर्य ठीक सिर के ऊपर पहुंच जाएगा और इंसानों, पेड़ों, खंभों तथा अन्य सीधी वस्तुओं की परछाई जमीन पर लगभग समाप्त हो जाएगी।
इस अनोखी खगोलीय घटना को जीरो शैडो डे (Zero Shadow Day) कहा जाता है। यह घटना पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति और सूर्य की चाल से जुड़ी हुई है। हर वर्ष यह अवसर कुछ चुनिंदा स्थानों पर ही आता है, इसलिए इसे देखने का उत्साह विज्ञान प्रेमियों और विद्यार्थियों के बीच अधिक रहता है।
क्या होता है जीरो शैडो डे, क्यों गायब हो जाती है परछाई?
सामान्य दिनों में जब सूर्य की किरणें किसी कोण पर धरती पर पड़ती हैं तो व्यक्ति या किसी वस्तु की छाया बनती है। लेकिन जीरो शैडो डे के दिन सूर्य आकाश में ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है, जब उसकी किरणें लगभग सीधी धरती पर गिरती हैं।
इस स्थिति में किसी वस्तु की छाया उसके ठीक नीचे सिमट जाती है और कुछ क्षणों के लिए दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि इस दिन ऐसा लगता है जैसे परछाई पूरी तरह गायब हो गई हो।
यह घटना केवल पृथ्वी के उन क्षेत्रों में संभव होती है जो कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच स्थित होते हैं। मध्यप्रदेश के कई जिले कर्क रेखा के आसपास स्थित होने के कारण यहां इस प्राकृतिक प्रयोग को आसानी से देखा जा सकता है।
मध्यप्रदेश के इन 14 जिलों में दिखाई देगा जीरो शैडो डे
खगोल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार मध्यप्रदेश के 14 जिलों में अलग-अलग समय पर यह घटना देखने को मिलेगी। सूर्य के स्थानीय समय और भौगोलिक स्थिति के अनुसार प्रत्येक जिले में परछाई गायब होने का समय कुछ मिनटों के अंतर से बदलता है।
जिलेवार समय सूची
| जिला | परछाई गायब होने का समय |
| शहडोल | दोपहर 12:06 बजे |
| उमरिया | दोपहर 12:09 बजे |
| कटनी | दोपहर 12:10 बजे |
| जबलपुर | दोपहर 12:12 बजे |
| दमोह | दोपहर 12:12 बजे |
| सागर | दोपहर 12:16 बजे |
| रायसेन | दोपहर 12:20 बजे |
| विदिशा | दोपहर 12:20 बजे |
| भोपाल | दोपहर 12:22 बजे |
| सीहोर | दोपहर 12:23 बजे |
| राजगढ़ | दोपहर 12:25 बजे |
| आगर मालवा | दोपहर 12:27 बजे |
| उज्जैन | दोपहर 12:28 बजे |
| रतलाम | दोपहर 12:31 बजे |
इन जिलों के लोगों के लिए यह अवसर बिना किसी विशेष उपकरण के एक दुर्लभ खगोलीय घटना को अपनी आंखों से देखने का मौका होगा।
समर सॉल्सटिस से क्या है इस घटना का संबंध?
21 जून का दिन उत्तरी गोलार्द्ध में समर सॉल्सटिस (Summer Solstice) के रूप में जाना जाता है। यह वह समय होता है जब सूर्य कर्क रेखा के सबसे निकट पहुंचता है और उत्तरी गोलार्द्ध में दिन की अवधि सबसे अधिक होती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी की धुरी के लगभग 23.5 डिग्री झुकाव और सूर्य की परिक्रमा का परिणाम है। इसी कारण 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है।
भारतीय खगोलीय मान्यताओं के अनुसार यह सूर्य की उत्तरायण यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक माना जाता है। इस समय सूर्य की स्थिति पृथ्वी के उत्तरी भाग में अपनी अधिकतम सीमा के निकट होती है।
सूर्य की चाल और पृथ्वी की स्थिति से जुड़ा है पूरा विज्ञान
जीरो शैडो डे किसी चमत्कार का परिणाम नहीं बल्कि खगोल विज्ञान का एक सुंदर उदाहरण है। पृथ्वी अपनी धुरी पर झुकी हुई है और सूर्य की परिक्रमा करती रहती है। इसी कारण वर्षभर सूर्य की किरणों का कोण बदलता रहता है।
जब सूर्य किसी स्थान के ठीक ऊपर यानी शीर्ष बिंदु पर पहुंचता है, तो वहां मौजूद सीधी वस्तुओं की छाया सबसे छोटी हो जाती है। यदि सूर्य लगभग बिल्कुल ऊपर हो तो छाया वस्तु के आधार में सिमट जाती है।
इसी वैज्ञानिक सिद्धांत के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तारीखों पर जीरो शैडो डे देखने को मिलता है।
घर पर आसानी से कैसे देखें जीरो शैडो डे?
इस अनोखे वैज्ञानिक प्रयोग को देखने के लिए किसी दूरबीन या महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य घरेलू वस्तुओं की मदद से भी इस घटना को देखा जा सकता है।
इसके लिए आप निम्न तरीका अपनाएं—
- किसी खुली जगह का चयन करें जहां सीधी धूप आती हो।
- एक लकड़ी का डंडा, पीवीसी पाइप या पानी की बोतल को सीधा खड़ा करें।
- अपने जिले के निर्धारित समय से कुछ मिनट पहले वहां पहुंच जाएं।
- वस्तु की छाया पर ध्यान दें।
- निर्धारित समय के आसपास छाया धीरे-धीरे छोटी होती जाएगी और कुछ क्षणों के लिए लगभग गायब हो जाएगी।
यह प्रयोग विद्यार्थियों के लिए विज्ञान को समझने का बेहद रोचक माध्यम बन सकता है।
बच्चों और विद्यार्थियों के लिए क्यों है खास अवसर?
आज के डिजिटल दौर में बच्चे विज्ञान को किताबों और स्क्रीन के माध्यम से अधिक समझते हैं, लेकिन जीरो शैडो डे उन्हें प्रकृति की प्रयोगशाला में सीखने का मौका देता है।
इस घटना के माध्यम से बच्चे पृथ्वी की गति, सूर्य की स्थिति, ऋतुओं के परिवर्तन और प्रकाश के वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकते हैं।
विज्ञान शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी यह अवसर बच्चों में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने का माध्यम बन सकता है।
क्या पूरे मध्यप्रदेश में दिखाई देगा यह नजारा?
यह जानना महत्वपूर्ण है कि जीरो शैडो डे पूरे मध्यप्रदेश में दिखाई नहीं देगा। यह केवल उन क्षेत्रों में देखा जा सकेगा जो कर्क रेखा के मार्ग के आसपास स्थित हैं।
प्रदेश के शेष जिलों में सूर्य की स्थिति इतनी सीधी नहीं होगी कि छाया पूरी तरह समाप्त हो जाए। इसलिए शहडोल से लेकर रतलाम तक के इन 14 जिलों के निवासियों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।
विज्ञान जागरूकता और खगोलीय अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण घटना
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्राकृतिक घटनाएं समाज में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जीरो शैडो डे यह समझाने का एक सरल उदाहरण है कि पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी तथा स्थिति में होने वाले बदलाव हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
विद्यालयों, विज्ञान संस्थानों और परिवारों को ऐसे अवसरों का उपयोग बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए करना चाहिए।
21 जून का जीरो शैडो डे मध्यप्रदेश के 14 जिलों के लोगों के लिए एक अनोखा खगोलीय अनुभव लेकर आएगा। कुछ सेकंड या मिनटों के लिए परछाई का गायब होना प्रकृति के अद्भुत विज्ञान का जीवंत प्रदर्शन है।
यह घटना हमें पृथ्वी, सूर्य और ब्रह्मांड के बीच मौजूद अद्भुत संबंधों को समझने का अवसर प्रदान करती है। विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने और नई पीढ़ी को खगोल विज्ञान से जोड़ने के लिए यह दिन एक यादगार अवसर साबित हो सकता है।

लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं प्रीति भोसले, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि में पत्रकारिता करने के साथ ही समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से जुड़ी हुई हैं, प्रीति भोसले ….
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