(वाय.के. पाण्डे)
नई दिल्ली (साई)। FASTag एनुअल पास, जो अगस्त 2025 में लॉन्च हुआ, ने केवल एक वर्ष में 1 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को जोड़ा है। यह योजना निजी कार मालिकों को 3,075 रुपये में एक साल या 200 टोल प्लाज़ा पार करने की सुविधा देती है, जो भारत के लगभग 1,150 राष्ट्रीय हाईवे और एक्सप्रेसवे पर मान्य है। मौजूदा फास्टैग पर सक्रिय होने के कारण रिचार्ज की झंझट समाप्त होती है, जिससे हाईवे यात्रा किफायती और सुगम बनती है।
FASTag एनुअल पास की विशेषताएँ
पास की कीमत 3,075 रुपये निर्धारित की गई है और यह एक साल या 200 टोल प्लाज़ा में से जो भी पहले पूरा हो, उसकी वैधता रखता है। उपयोगकर्ता को नया टैग खरीदने की आवश्यकता नहीं, केवल राजमार्गयात्रा ऐप के माध्यम से भुगतान करके मौजूदा फास्टैग पर ही सक्रिय कर सकते हैं। वर्तमान में यह पास लगभग 1,150 टोल प्लाज़ा, जिसमें राष्ट्रीय हाईवे और एक्सप्रेसवे शामिल हैं, पर मान्य है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में बार‑बार रिचार्ज की समस्या समाप्त हो जाती है।
उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया और लाभ
निजी वाहन चालकों ने इस फिक्स‑कॉस्ट विकल्प को अपनाते हुए तेज़ी से प्रतिक्रिया दी है। नियमित रूप से टोल भुगतान करने वाले ड्राइवरों को प्रति यात्रा औसत 15‑20 प्रतिशत लागत बचत का अनुमान है, साथ ही रिचार्ज के लिए समय और प्रयास की बचत भी मिलती है। राजमार्गयात्रा ऐप के एकीकृत इंटरफ़ेस से भुगतान प्रक्रिया सरल हो गई, जिससे डिजिटल भुगतान अपनाने की दर बढ़ी है। इस पहल ने टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाने और राजस्व लीक को कम करने में भी योगदान दिया है।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: FASTag (NHAI)
• आयोजन: FASTag एनुअल पास लॉन्च एवं उपयोगकर्ता रिपोर्ट
• स्थान: भारत (सभी राष्ट्रीय हाईवे)
• मुख्य उद्देश्य: टोल रिचार्ज की झंझट समाप्त कर किफायती यात्रा
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: 1 करोड़ यूजर्स का माइलस्टोन, 200 टोल प्लाज़ा वैधता
• लक्ष्य: अगले वर्ष 2 करोड़ यूजर्स तक पहुंचना, कवरेज को 1,300 टोल प्लाज़ा तक बढ़ाना
भविष्य की दिशा
आगे चलकर FASTag एनुअल पास को और अधिक टोल प्लाज़ा और नई तकनीकों जैसे RFID‑आधारित रीयल‑टाइम ट्रैकिंग के साथ विस्तारित करने की योजना है। नियमित उपयोगकर्ता समीक्षाओं को शामिल कर सेवा में सुधार किया जाएगा, जिससे ग्राहक संतुष्टि और राजस्व स्थिरता दोनों में वृद्धि होगी। इस प्रकार, सतत तकनीकी उन्नयन और कर्मचारी‑उपभोक्ता‑केन्द्रित नीतियों के माध्यम से भारत की हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर में दक्षता और स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सकेगा।