प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से विनीत विश्वकर्मा को नई दिशा

(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। कारपेंटर विनीत विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय और प्रशिक्षण समर्थन से अपने पारम्परिक व्यवसाय को नई दिशा दी है। पिता के साथ कारपेंटरी सीखकर 22 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत विनीत ने योजना के पहचान पत्र, प्रशिक्षण एवं एक लाख रुपये के ऋण से अपने कार्यशाला को विस्तारित किया। यह कदम न केवल उनके परिवार की आजीविका को सुदृढ़ करता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनता है।

परम्परागत कौशल और योजना का संगम

विनीत विश्वकर्मा का परिवार पीढ़ियों से कारपेंटरी में संलग्न रहा है। बचपन में पिता श्री रमेश विश्वकर्मा को लकड़ी के औजारों से काम करते देख कर उन्होंने इस कला को अपनाया। जब प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत ऑनलाइन आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें पहचान पत्र मिला और राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण केंद्र में आधुनिक उपकरणों एवं सुरक्षा मानकों के साथ 30‑दिन का कौशल प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रमाणपत्र ने उनके काम को मान्यता दी और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई।

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वित्तीय सहायता और भविष्य की योजना

भारतीय स्टेट बैंक, बारापत्थर शाखा ने विनीत को कारपेंटरी कार्य हेतु एक लाख रुपये का ऋण प्रदान किया। यह ऋण 18 मासिक किस्तों में चुकाया जा रहा है, जिससे उनके नकदी प्रवाह पर दबाव नहीं पड़ता। ऋण के उपयोग से उन्होंने सिवनी के सी.वी. रमन वार्ड, बाबूजी नगर में 120 वर्ग मीटर का निजी कार्यशाला स्थापित किया, जहाँ आधुनिक कटिंग मशीन और सुरक्षा उपकरण स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में वे स्थानीय निर्माण कंपनियों और गृहस्वामियों को कस्टम फर्नीचर एवं मरम्मत सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं, और अगले दो वर्षों में अतिरिक्त 5 कारीगरों को रोजगार देने की योजना बना रहे हैं।

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खबर के प्रमुख बिंदु

• कंपनी: व्यक्तिगत कारपेंटरी उद्यम
• आयोजन: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण एवं ऋण वितरण
• स्थान: सिवनी, उत्तर प्रदेश
• मुख्य उद्देश्य: पारम्परिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: 30‑दिन का कौशल प्रशिक्षण, एक लाख रुपये का MSME ऋण, कार्यशाला का आधुनिकीकरण
• लक्ष्य: अगले दो वर्षों में 5 अतिरिक्त कारीगरों को रोजगार, वार्षिक टर्नओवर में 30% वृद्धि

विनीत विश्वकर्मा की कहानी यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाएँ जब सही ढंग से लागू हों तो पारम्परिक उद्योगों को नई ऊर्जा मिलती है। निरंतर कौशल उन्नयन, समय पर वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरणों का समावेश न केवल व्यक्तिगत उद्यमी की स्थिरता सुनिश्चित करता है, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास में भी योगदान देता है। भविष्य में भी ऐसी पहलें कारीगरों के कल्याण, तकनीकी प्रगति और सतत वृद्धि के प्रमुख स्तंभ बनेंगी।