(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। सिवनी में 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित समारोह में 80 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक शील्ड को राजपूत क्षत्रिय समाज द्वारा सम्मानित किया गया। यह शील्ड 1946 में सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति, गांधी चौक शुक्रवारी, सिवनी द्वारा नवयुवक क्षत्रिय नाटक मंडली, छपारा को उपहार में दी गई थी और पिछले आठ दशकों से सिसोदिया परिवार द्वारा सुरक्षित रखी गई है। समारोह में सिवनी विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुजीत जैन, पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी और नगरपालिका अध्यक्ष ज्ञानचंद सनोडिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समारोह का विवरण
बालरूप हनुमान मंदिर समिति ने शुक्रवारी स्थित बालरूप हनुमान मंदिर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत में शील्ड का इतिहास और संरक्षण की कहानी प्रस्तुत की गई, जिसके बाद राजपूत क्षत्रिय समाज, सिवनी एवं छपारा के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथियों ने शील्ड के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए संरक्षण के प्रति समाज की जिम्मेदारी पर बल दिया। उपस्थित सभी ने इस धरोहर को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए सहयोग का आश्वासन दिया।
धरोहर का इतिहास और सामाजिक महत्व
1946 में सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा नवयुवक क्षत्रिय नाटक मंडली को दी गई यह शील्ड, छपारा क्षेत्र के नाट्य परम्परा और सामाजिक एकता का प्रतीक रही है। सिसोदिया परिवार ने इसे सुरक्षित रखने के लिए विशेष देखभाल और नियमित रखरखाव किया, जिससे यह आज भी अपनी मूल चमक बनाए हुए है। इस प्रकार का संरक्षण न केवल ऐतिहासिक वस्तु को बचाता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति की निरंतरता और पहचान को भी सुदृढ़ करता है।
प्रमुख बिंदु
• कंपनी: राजपूत क्षत्रिय समाज, सिवनी एवं छपारा
• आयोजन: बालरूप हनुमान मंदिर समिति द्वारा शील्ड सम्मान समारोह
• स्थान: सिवनी (शुक्रवारी)
• मुख्य उद्देश्य: 80 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक शील्ड का संरक्षण और सामाजिक सराहना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: धरोहर संरक्षण में परिवार एवं समाज की भूमिका को सुदृढ़ करना
• लक्ष्य: भविष्य की पीढ़ियों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना
भविष्य की दिशा
समारोह ने यह स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण केवल एक परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा प्रतिबद्धता है। नियमित रूप से आयोजित ऐसे सम्मान कार्यक्रमों से युवा वर्ग में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी और संरक्षण के लिए नई तकनीकों एवं संसाधनों का उपयोग संभव होगा। राजपूत क्षत्रिय समाज ने भविष्य में अधिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और स्थानीय इतिहास को दस्तावेज़ीकरण करने के लिए कार्य योजना तैयार करने का वचन दिया, जिससे सतत विकास और सामाजिक एकता को बल मिलेगा।