सिवनी में स्कूलों के पास तंबाकू बिक्री पर सवाल, 25 जुलाई की कार्रवाई के बाद भी क्या बदली जमीनी तस्वीर?

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में तंबाकू नियंत्रण को लेकर प्रशासनिक बैठकों में दिए जाने वाले निर्देश और उनके जमीनी क्रियान्वयन के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला केवल तंबाकू उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों के आसपास के वातावरण से भी है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री जारी रहने के आरोप हैं। दावा यह भी है कि कुछ स्थानों पर स्कूल गणवेश में विद्यार्थी इन उत्पादों को खरीदते हुए दिखाई देते हैं। यदि किसी शिक्षण संस्थान के 100 गज के प्रतिबंधित क्षेत्र में ऐसा विक्रय वास्तव में हो रहा है, तो यह COTPA के प्रावधानों के सीधे उल्लंघन का विषय बनता है।

केंद्र सरकार के National Tobacco Control Programme के अनुसार COTPA, 2003 की धारा 6 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। इसी धारा में किसी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी रोक है।

25 जुलाई को प्रशासन ने चलाया था विशेष अभियान

प्रशासन की ओर से 25 जुलाई 2026 को जारी की गई जानकारी के अनुसार, सिवनी जिले में स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अभियान के दौरान जिले में:

  • 41 चालान बनाए गए।
  • 8,200 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
  • 23 शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पाई गई।
  • 8 गुमटी और ठेले हटाए गए।
  • नगर पालिका और विभिन्न नगर परिषद क्षेत्रों में संयुक्त निरीक्षण किया गया।

बताया गया था कि नगर पालिका परिषद सिवनी में 16 चालान बनाकर 3,200 रुपये, बरघाट में 6 चालान बनाकर 1,200 रुपये, लखनादौन में 7 चालान बनाकर 1,400 रुपये, छपारा में 8 चालान बनाकर 1,600 रुपये तथा केवलारी में 4 चालान बनाकर 800 रुपये जुर्माना वसूला गया।

इन आंकड़ों का कुल योग 41 चालान और 8,200 रुपये होता है। यानी उस अभियान के दौरान जिले में उल्लंघन के मामले सामने आने की प्रशासनिक जानकारी स्वयं मौजूद थी।

COTPA में 100 गज का नियम क्या कहता है?

तंबाकू बिक्री को लेकर सबसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान COTPA, 2003 की धारा 6 है।

कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। इसके अलावा किसी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री भी प्रतिबंधित है।

National Tobacco Control Programme भी स्पष्ट करता है कि शिक्षण संस्थानों के 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित और दंडनीय है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि 100 गज की दूरी केवल अनुमान से तय नहीं होती। संबंधित नियमों के अनुसार दूरी शैक्षणिक संस्थान की बाहरी सीमा या बाउंड्री वॉल से रेडियल रूप से मापी जाती है।

इसलिए किसी दुकान के स्कूल से कुछ दूरी पर दिखाई देने मात्र से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह कानूनी सीमा के बाहर है। वास्तविक दूरी और संस्थान की सीमा के आधार पर ही स्थिति निर्धारित होगी।

स्कूल के सामने बिक्री का आरोप क्यों गंभीर है?

स्कूल के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता का मुद्दा इसलिए गंभीर है क्योंकि बच्चों और किशोरों की तंबाकू उत्पादों तक पहुंच आसान हो सकती है।

कानून में नाबालिगों को बिक्री पर रोक और स्कूलों के आसपास बिक्री पर अलग प्रतिबंध रखने का उद्देश्य भी यही है कि बच्चों को तंबाकू उत्पादों के संपर्क से बचाया जा सके।

National Tobacco Control Programme की संशोधित Tobacco Free Educational Institution Guidelines में स्कूलों के आसपास तंबाकू नियंत्रण के लिए कानूनी प्रावधानों के साथ संस्थागत स्तर पर जागरूकता और निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

ऐसे में किसी स्कूल के आसपास बार-बार तंबाकू बिक्री की शिकायत सामने आती है तो केवल एक बार चालान काटना पर्याप्त नियंत्रण का संकेत नहीं माना जा सकता। निरंतर निरीक्षण, उल्लंघन की पुनरावृत्ति रोकना और बच्चों तक पहुंच कम करना भी व्यवस्था का हिस्सा है।

महात्मा गांधी स्कूल के सामने की स्थिति का दावा

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी में सिवनी के महात्मा गांधी स्कूल के सामने तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े रोगी कल्याण समिति परिसर के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री का दावा किया गया है।

इस दावे की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में इस समय नहीं मिली है। इसलिए इसे अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य के बजाय स्थानीय शिकायत/आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।

हालांकि, महात्मा गांधी स्कूल सिवनी का अस्तित्व और उसका स्थानीय संदर्भ उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में मिलता है।

यदि किसी स्कूल की निर्धारित 100 गज सीमा के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री हो रही है, तो संबंधित स्थान का भौतिक निरीक्षण कर दूरी की आधिकारिक पुष्टि करना और नियमानुसार कार्रवाई करना प्रशासन के लिए सीधा परीक्षण होगा।

25 जुलाई से 21 सितंबर के बीच क्या हुआ?

25 जुलाई 2026 को विशेष अभियान की जानकारी सामने आई थी। आज 21 सितंबर 2026 है। यानी इस अवधि में लगभग 58 दिन का अंतर है।

इस अवधि को देखते हुए मुख्य सवाल यह नहीं है कि जुलाई में कार्रवाई हुई या नहीं। उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी के अनुसार जुलाई में कार्रवाई हुई थी। बड़ा सवाल यह है कि उसके बाद प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनुपालन की निगरानी कितनी नियमित रही।

अगर किसी स्थान पर कार्रवाई के बाद दोबारा उसी प्रकार की बिक्री शुरू होती है, तो यह केवल एक दुकानदार का मामला नहीं रह जाता। इससे निगरानी की निरंतरता, दोबारा निरीक्षण और स्थानीय स्तर पर कानून के अनुपालन की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठ सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, किसी एक स्थान पर कथित बिक्री की तस्वीर या स्थानीय शिकायत के आधार पर पूरे जिले में प्रशासन की कार्रवाई विफल घोषित करना भी उचित नहीं होगा। इसके लिए वर्तमान निरीक्षण रिकॉर्ड, चालान, दोबारा हुए उल्लंघनों और प्रशासन की ताजा कार्रवाई के आंकड़े जरूरी होंगे।

केवल चालान से खत्म नहीं होगा मामला

तंबाकू नियंत्रण में चालान और जुर्माना महत्वपूर्ण प्रवर्तन उपाय हैं, लेकिन स्कूलों को तंबाकू मुक्त रखने के लिए व्यापक व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

प्रशासन के सामने कई स्तरों पर काम करने की जरूरत होती है:

  • स्कूलों की 100 गज सीमा का नियमित निरीक्षण।
  • बार-बार उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं की पहचान।
  • नाबालिगों को बिक्री की शिकायतों की जांच।
  • स्कूल प्रबंधन और स्थानीय निकाय के बीच समन्वय।
  • विद्यार्थियों और अभिभावकों को जागरूक करना।
  • स्कूल परिसर के बाहर तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता पर निगरानी।
  • हटाई गई गुमटी या ठेले के दोबारा स्थापित होने की जांच।
  • कार्रवाई के बाद फॉलोअप निरीक्षण।

कानून की जानकारी और जागरूकता भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है। COTPA के तहत शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू बिक्री पर प्रतिबंध के बारे में स्पष्ट बोर्ड लगाने का प्रावधान भी नियमों में मौजूद है।

बच्चों के सामने उपलब्धता बनी तो बढ़ती है चिंता

स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों की उम्र कम होती है। ऐसे में स्कूल के आसपास तंबाकू उत्पादों की खुली उपलब्धता सार्वजनिक स्वास्थ्य और बाल संरक्षण दोनों के दृष्टिकोण से चिंता का विषय बन सकती है।

विशेष रूप से तब, जब किसी दुकान या ठेले पर तंबाकू उत्पाद आसानी से दिखाई और उपलब्ध हों। कानून का उद्देश्य ही ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिक्री रोककर बच्चों को तंबाकू के संपर्क से दूर रखना है।

यहां अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी विद्यार्थी द्वारा तंबाकू उत्पाद खरीदे जाने की जानकारी सामने आती है तो केवल बच्चे को जिम्मेदार ठहराने के बजाय यह देखना भी जरूरी है कि उसे उत्पाद उपलब्ध कैसे हुआ।

प्रशासन के सामने अब क्या चुनौती है?

जुलाई में कार्रवाई के आंकड़े सामने आने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता निरंतरता की है।

यदि किसी इलाके में 23 शिक्षण संस्थानों के 100 गज के भीतर उल्लंघन पाया गया था, तो आगे की निगरानी में यह पता लगाना जरूरी है कि उन स्थानों पर स्थिति अब क्या है।

एक प्रभावी फॉलोअप व्यवस्था में पहले की कार्रवाई वाले स्थानों की दोबारा जांच की जा सकती है। यदि वहां फिर उल्लंघन मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ यह भी दर्ज किया जा सकता है कि पहले चेतावनी या चालान के बावजूद नियम का पालन क्यों नहीं हुआ।

इस तरह के रिकॉर्ड से प्रशासन के पास केवल चालान की संख्या नहीं, बल्कि अनुपालन में सुधार का भी स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध होगा।

सिवनी के लिए तंबाकू मुक्त स्कूल का लक्ष्य क्यों महत्वपूर्ण?

तंबाकू नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय, शिक्षा विभाग, पुलिस, स्कूल प्रबंधन, अभिभावक और नागरिक सभी की भूमिका हो सकती है।

National Tobacco Control Programme के आंकड़ों में देशभर में Tobacco Free Educational Institutions घोषित किए जाने की व्यवस्था भी दर्ज है।

इसका अर्थ यह है कि स्कूलों को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर भी प्रयास किए जाते हैं।

सिवनी में भी यदि किसी विद्यालय के आसपास बिक्री की शिकायत सामने आती है तो उसे शिकायत के स्तर पर छोड़ने के बजाय सत्यापन, कार्रवाई और फॉलोअप के स्पष्ट चक्र से जोड़ना उपयोगी होगा।

नागरिकों की भूमिका भी अहम

तंबाकू बिक्री पर रोक के लिए नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि किसी स्कूल के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने की जानकारी सामने आती है, तो संबंधित प्रशासनिक या स्थानीय निकाय को सूचना दी जा सकती है।

सिवनी जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर नागरिक कॉल सेंटर का नंबर 155300 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 उपलब्ध हैं।

शिकायत करते समय स्थान, स्कूल का नाम, दुकान या ठेले की पहचान और उपलब्ध तथ्य जैसी जानकारी देना जांच को अधिक स्पष्ट बना सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले संबंधित तथ्य और आधिकारिक जांच का इंतजार करना भी जरूरी है।

आगे की राह: निर्देशों से आगे बढ़कर निगरानी

स्कूलों के आसपास तंबाकू बिक्री रोकने के लिए सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कितनी बैठकें हुईं, बल्कि यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में नियमों का पालन कितना सुनिश्चित हुआ।

जुलाई की कार्रवाई में 41 चालान और 8,200 रुपये जुर्माने की जानकारी सामने आई थी। अब आने वाले निरीक्षणों में यह बताना अधिक महत्वपूर्ण होगा कि कितने स्थानों पर दोबारा जांच हुई, कितने उल्लंघन मिले और कितने क्षेत्रों में अनुपालन सुनिश्चित हुआ।

यदि प्रशासन नियमित निरीक्षण और पारदर्शी आंकड़ों के साथ कार्रवाई जारी रखता है तो इससे स्कूलों के आसपास तंबाकू की उपलब्धता पर नियंत्रण मजबूत किया जा सकता है।

सिवनी में स्कूलों के आसपास तंबाकू बिक्री का मुद्दा कानून, प्रशासनिक कार्रवाई और बच्चों के सुरक्षित वातावरण—तीनों से जुड़ा हुआ है। COTPA के तहत शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है।

25 जुलाई को प्रशासन द्वारा जारी कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि जिले में नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए थे और कार्रवाई भी की गई थी। लेकिन इसके बाद भी यदि किसी स्थान पर प्रतिबंधित क्षेत्र में बिक्री की शिकायत सही पाई जाती है, तो नियमित निगरानी और फॉलोअप की आवश्यकता सामने आती है।

बैठकों में दिए गए निर्देश तभी प्रभावी माने जाएंगे जब उनका असर स्कूलों के आसपास के वास्तविक माहौल में दिखाई दे। बच्चों के लिए सुरक्षित और तंबाकू मुक्त शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कानून का लगातार पालन, स्थानीय स्तर पर निगरानी और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी—तीनों का साथ जरूरी है।