(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। मध्यप्रदेश के सिवनी में 6 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 2 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की। इस राशि को अस्थि बाधित दिव्यांग श्री दीपक चौहान ने किराना दुकान खोलने में निवेश किया, जिससे उन्हें नियमित आय और आत्मनिर्भरता का अवसर मिला। योजना का उद्देश्य आर्थिक संबल के साथ दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करना है।
योजना का विवरण और लाभ
दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख सामाजिक कल्याण पहल है, जो दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह और स्वरोजगार दोनों को आर्थिक समर्थन देती है। प्रत्येक पात्र लाभार्थी को 2 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाती है, जिसे वे अपनी जरूरत के अनुसार निवेश कर सकते हैं। इस वर्ष सिवनी में कुल 15 लाभार्थियों को समान राशि मिली, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि की उम्मीद है।
स्वरोजगार पहल और तकनीकी समर्थन
दीपक ने प्राप्त निधि को किराना स्टोर के किराया, प्रारंभिक माल भंडारण और डिजिटल भुगतान प्रणाली स्थापित करने में उपयोग किया। दुकान में मोबाइल POS, QR कोड भुगतान और सॉफ्टवेयर‑आधारित इन्वेंटरी प्रबंधन लागू किया गया, जिससे स्टॉक नियंत्रण और ग्राहक सेवा में सुधार हुआ। स्थानीय बैंक ने न्यूनतम ब्याज पर कार्यशील पूँजी प्रदान की, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता ने व्यापार योजना तैयार करने में मार्गदर्शन दिया। इस तकनीकी सहयोग ने छोटे उद्यम को पेशेवर स्तर पर चलाने में मदद की।
प्रदर्शन समीक्षा एवं भविष्य की प्रतिबद्धताएँ
पहले तीन महीनों में दीपक की किराना दुकान ने औसत दैनिक बिक्री 12,000 रुपये दर्ज की, जिससे मासिक आय लगभग 3.6 लाख रुपये हुई। यह आय न केवल परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करती है, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चों के लिए भी उपयोगी है। मुख्यमंत्री ने इस सफलता को योजना की प्रभावशीलता के प्रमाण के रूप में सराहा और अन्य जिलों में समान मॉडल को दोहराने का संकेत दिया। सरकार ने आगे की निगरानी, प्रशिक्षण कार्यशालाओं और अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से अधिक दिव्यांगजनों को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने का वचन दिया।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना
• आयोजन: आर्थिक सहायता एवं स्वरोजगार समर्थन
• स्थान: सिवनी, मध्यप्रदेश
• मुख्य उद्देश्य: दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: 2 लाख रुपये की सहायता, डिजिटल व्यापार उपकरण
• लक्ष्य: रोजगार सृजन, सामाजिक समावेशन, सतत आय
भविष्य में यदि दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत नियमित फॉलो‑अप, तकनीकी सहायता और बाजार‑उन्मुख प्रशिक्षण जारी रहेगा, तो अधिक लाभार्थी आत्मनिर्भर उद्यम स्थापित कर सकेंगे। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन स्तर को उन्नत करेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में स्थायी वृद्धि और सामाजिक समावेशन को भी सुदृढ़ करेगा।