(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सरस्वती स्व-सहायता समूह की सचिव श्रीमती भंवररेखा वर्मा ने समूह के सहयोग से आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने समूह से 1.50 लाख रुपये का ऋण लेकर पशुपालन व्यवसाय शुरू किया और अब प्रतिमाह 14‑15 हजार रुपये की नियमित आय प्राप्त कर रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आय सृजन के लिए एक मॉडल बन रही है।
स्व-सहायता समूह की भूमिका
सरस्वती स्व-सहायता समूह ने महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और नेतृत्व के अवसर प्रदान किए हैं। समूह के माध्यम से वर्मा को न केवल ऋण मिला, बल्कि पशुपालन के बुनियादी ज्ञान और बाजार संपर्क भी उपलब्ध कराया गया। इस समर्थन ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित की, जिससे समूह के अन्य सदस्य भी समान दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
पशुपालन व्यवसाय की प्रगति
वर्मा ने प्राप्त ऋण को उपयोगी ढंग से व्यवस्थित करके 15 गायें और 10 बकरियों को खरीदा। उन्होंने नियमित चारा, स्वास्थ्य देखभाल और दूध उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई। परिणामस्वरूप, वर्तमान में उनका दूध उत्पादन स्थिर है और स्थानीय बाजार में निर्यात भी हो रहा है। इस व्यवसाय से प्राप्त आय ने परिवार के खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में उल्लेखनीय सुधार लाया है।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की योजनाएँ
नियमित आय के साथ, वर्मा ने अपने घर की बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया और अतिरिक्त बचत के माध्यम से दो और पशुधन खरीदने की योजना बनाई है। उन्होंने समूह के अन्य महिलाओं को भी समान व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। इस पहल से सिवनी जिले में महिला‑उद्यमिता की दर में धीरे‑धीरे वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ हो रहा है।
प्रमुख बिंदु
• कंपनी/समूह: सरस्वती स्व-सहायता समूह
• आयोजन: आर्थिक आत्मनिर्भरता हेतु ऋण एवं पशुपालन प्रशिक्षण
• स्थान: सिवनी, साकरा गाँव
• मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण महिलाओं को आय सृजन के अवसर प्रदान करना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: 1.5 लाख रुपये का ऋण, पशुपालन व्यवसाय शुरू
• लक्ष्य: महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, स्थानीय विकास
भंवररेखा वर्मा की सफलता यह दर्शाती है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। निरंतर प्रशिक्षण, वित्तीय समर्थन और तकनीकी उन्नयन से ऐसी पहलें सतत विकास और सामाजिक समावेशन को सुदृढ़ करती हैं। भविष्य में अधिक महिलाओं को इस मॉडल से जोड़कर सिवनी और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण को तेज़ी से बढ़ावा दिया जा सकता है।