(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। वर्तमान में अरहर की फसल में पत्ती लपेटक कीट (लीफ वेबर) का प्रकोप देखा जा रहा है। इस कीट की सूंडियां पत्तियों को मोड़कर जाला बनाती हैं, जिससे पत्तियों और कलियों को नुकसान पहुंचता है। फसल की वृद्धि बाधित होने के साथ-साथ उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है। कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को प्रारम्भिक अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी।
कीट का विवरण और संभावित प्रभाव
पत्ती लपेटक की सूंडियां पत्तियों को आपस में मोड़कर जाला बनाती हैं और जाले के भीतर रहकर पत्तियों तथा कलियों को चूसती हैं। इससे पत्तियों का पीला पड़ना, सड़ना और अंततः फसल की कुल उत्पादन क्षमता में 10‑15 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित फील्ड निरीक्षण और प्रभावित पत्तियों की शीघ्र पहचान प्रकोप को सीमित करने की कुंजी है।
जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण उपाय
प्रकोप के शुरुआती चरण में प्रभावित जालों को तोड़कर बाहर फेंकें या मिट्टी में दबा दें। जैविक नियंत्रण के लिए नीम अर्क (NSKE 5%) या नीम ऑयल 3000 पीपीएम को 2‑3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। यदि प्रकोप तीव्र हो तो निम्नलिखित रासायनिक विकल्पों में से एक को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें: • एमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG – 80‑100 ग्राम • क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC – 60 मिलीलीटर • फ्लूबेंडियामाइड 39.35% SC – 40 मिलीलीटर • इंडोक्साकार्ब 15.8% EC – 135 मिलीलीटर। छिड़काव साफ मौसम में और शाम के समय करना चाहिए ताकि मधुमक्खियों व अन्य परागणकारी कीटों को न्यूनतम नुकसान हो।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: कृषि विभाग, सिवनी • आयोजन: पत्ती लपेटक कीट नियंत्रण कार्यशाला • स्थान: सिवनी • मुख्य उद्देश्य: फसल सुरक्षा एवं उत्पादन संरक्षण • प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: जैविक एवं रासायनिक उपायों की त्वरित कार्यान्वयन • लक्ष्य: प्रकोप को 30 दिनों में 70% तक घटाना
कीट नियंत्रण में निरंतर निगरानी, जैविक विकल्पों का उपयोग और समय पर रासायनिक उपचार का संतुलित मिश्रण फसल की उत्पादन क्षमता को सुरक्षित रखेगा। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि किसान इन सिफारिशों को अपनाते हैं तो अरहर की फसल में संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सकेगा और सतत कृषि विकास की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जाएगा।