सिंगरौली बलराम कृषि महोत्सव: तकनीक से किसानों की आय बढ़ेगी

(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगरौली जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित किया। उन्होंने बताया कि सरकार तकनीक और नवाचार के आधार पर किसानों की फसल उत्पादन और आय दोनों को बढ़ाने के लिए कई पहलें शुरू कर रही है। यह कार्यक्रम रत्नगर्भा भूमि में प्राकृतिक खेती के तेज़ी से प्रसार और 3000 से अधिक किसानों के जुड़ाव को उजागर करता है।

मुख्य घोषणाएँ और पहल

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले पाँच वर्षों में राज्य में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा, जबकि उद्यानिकी को 30 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित किया जाएगा। खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और एक जिला‑एक उत्पाद की नीति के तहत स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने की योजना है। साथ ही, पशुपालन और डेयरी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

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तकनीक एवं नवाचार के माध्यम से उत्पादन वृद्धि

डॉ. यादव ने बताया कि सिंगरौली को ऊर्जा‑धनी जिले के रूप में पहचानते हुए, इसे प्राकृतिक खेती का बड़ा केंद्र बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, सटीक खेती उपकरण और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को लागू किया जाएगा। कोदो‑कुटकी की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी का निर्णय भी किसानों की आय में स्थिरता लाने के लिए लिया गया है। इसके अतिरिक्त, एक लाख किसानों, युवाओं और बेटियों को विशेष प्रशिक्षण देकर कृषि उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

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खबर के प्रमुख बिंदु

• कंपनी: राज्य सरकार, मुख्यमंत्री कार्यालय
• आयोजन: बलराम कृषि महोत्सव, सिंगरौली
• स्थान: सिंगरौली, मध्य प्रदेश
• मुख्य उद्देश्य: तकनीक‑आधारित कृषि उत्पादन व आय वृद्धि
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: 100 लाख हेक्टेयर सिंचाई विस्तार, 30 लाख हेक्टेयर उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती को केंद्र बनाना
• लक्ष्य: 3000+ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना, कोदो‑कुटकी न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करना

डॉ. यादव ने कहा कि निरंतर तकनीकी उन्नयन, नियमित प्रशिक्षण और किसान‑केन्द्रित नीतियों के माध्यम से सिंगरौली को कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनाना संभव है। भविष्य में भी सरकार कर्मचारी कल्याण, आधुनिक उपकरणों का प्रसार और सतत विकास को प्राथमिकता देगी, जिससे राज्य की कृषि उत्पादन क्षमता और ग्रामीण आय दोनों में स्थायी सुधार होगा।