(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में पुलिस की सुस्ती के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। 11 हजार से ज्यादा लोगों ने पुलिस के व्यवहार, एफआईआर में देरी और जांच को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। सीएम मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। इसके अलावा पुलिस की सुस्ती के कारण कई मामलों में आरोपियों को नहीं पकड़ा जा सका है, जिससे पीड़ितों के भरोसे को कमजोर किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है और कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। इसके बाद भी लोगों को पुलिस की सुस्ती के कारण परेशानी हो रही है।
पुलिस की सुस्ती के कारण
पुलिस की सुस्ती के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। जब वे अपराध का शिकार होने के बाद थाने पहुंचते हैं, तो पहले उन्हें ही डांटा-फटकारा जाता है। इससे पीड़ित को कानूनी मदद मिलने की बजाय परेशानी बढ़ जाती है।
इसके अलावा शिकायतों में सबसे बड़ा मुद्दा एफआईआर दर्ज करने में देरी का है। लोगों का कहना है कि पुलिस पहले टालमटोल करती है। दबाव बनाने या जान-पहचान का सहारा लेने के बाद ही एफआईआर दर्ज होती है।
जांच में देरी के कारण
जांच में देरी के कारण आरोपियों को नहीं पकड़ा जा सका है। कई मामलों में तो पुलिस को सब कुछ पता होने के बावजूद आरोपियों को नहीं पकड़ा जा सका है। इससे आरोपी फरार हो जाते हैं और दोबारा अपराध करने से नहीं चूकते।
इसके अलावा जांच में देरी के कारण पीड़ितों के भरोसे को कमजोर किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि पुलिस जांच में देरी के कारण आरोपियों को बचाने का प्रयास करती है।
MP Police Complaints के आंकड़े
जांच में सामने आए आंकड़े स्थिति को साफ बयां करते हैं। कुल चार हजार 951 लोगों का कहना है कि अपराध होने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। वहीं चार हजार 800 लोगों ने जांच में देरी की शिकायत की है।
- कुल चार हजार 951 लोगों का कहना है कि अपराध होने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
- चार हजार 800 लोगों ने जांच में देरी की शिकायत की है।
- 1340 लोगों का कहना है कि एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई।
सीएम मोहन यादव की प्रतिक्रिया
सीएम मोहन यादव ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने पुलिस महकमे से सुधार की अपेक्षा जताई है। इसके अलावा मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी इस पर संज्ञान लिया है।
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