पात्र को योजनाओं का लाभ मिले तभी साकार होगा विकसित भारत: राज्यपाल मंगुभाई पटेल का जनजातीय संवाद

मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सीधी जिले के वनांचल ग्राम परसिली में जनजातीय समुदाय से संवाद करते हुए कहा कि पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही विकसित भारत के संकल्प की कुंजी है। उन्होंने अधिकारियों को गरीब और जरूरतमंदों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों, सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन, और जनजातीय उत्थान योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। यह संवाद सामाजिक समावेशन और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

(ब्यूरो कार्यालय)

सीधी (साई)।मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने स्पष्ट कहा है कि जब तक शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंचेगा, तब तक विकसित भारत का संकल्प अधूरा रहेगा। गुरुवार को सीधी जिले के मझौली जनपद अंतर्गत वनांचल ग्राम परसिली में आयोजित जनजातीय संवाद कार्यक्रम में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं से जोड़ा जाए।

यह कार्यक्रम सामाजिक समावेशन, जनजातीय सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वनांचल में संवाद: सीधे जुड़ाव का संदेश

सीधी जिले के परसिली ग्राम में आयोजित जनजातीय संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल का पारंपरिक जनजातीय नृत्य से स्वागत किया गया। उन्होंने कन्या-पूजन और मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

राज्यपाल ने कहा कि शासन की योजनाएं तभी सार्थक हैं जब उनका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से कहा:

  • पात्रता की सही पहचान सुनिश्चित करें
  • हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी दें
  • प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाएं
  • सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दें

उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने पर बल दिया।

विकसित भारत संकल्प और योजनाओं का प्रभाव

राज्यपाल ने विकसित भारत के लक्ष्य को केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे सामाजिक न्याय और समावेशन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गांव और सशक्त परिवार ही विकसित राष्ट्र की नींव हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि:

  • धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत जनजातीय समुदाय के लिए 80 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • पीएम जनमन योजना के तहत 24 हजार करोड़ रुपये से विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।

इन योजनाओं का उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है।

स्व-सहायता समूह: महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि स्व-सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाया है।

रमाबाई अंबेडकर स्व-सहायता समूह की सदस्य साधना ने बताया कि समूह से जुड़कर उन्होंने सिलाई, कृषि एवं बीमा कार्य शुरू किया और अब प्रतिमाह 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।

आस्था स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष ललिता ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, लेकिन अब वे ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

राज्यपाल ने कहा कि देश में एक करोड़ ‘ड्रोन दीदी’ कार्यरत हैं और आने वाले समय में यह संख्या दो करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। आधुनिक तकनीक अपनाने में महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन पर विशेष जोर

जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। राज्यपाल ने मरीजों से नियमित दवा लेने और संतुलित खान-पान अपनाने की अपील की।

सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि राज्यपाल गुजरात में भी सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए सक्रिय रहे हैं और उनका यह संकल्प प्रदेश में भी जारी है।

विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने सभी नागरिकों से सिकल सेल एनीमिया की जांच कराने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से परीक्षण और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हितलाभ वितरण और आजीविका विस्तार

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के लाभार्थियों को हितलाभ वितरित किए गए। मध्यप्रदेश डे-आजीविका मिशन के तहत ऋण वितरण भी किया गया।

प्रदर्शनी में हर्बल अबीर, गुलाल और महुआ के लड्डू जैसे उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। यह पहल ग्रामीण और जनजातीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने का प्रयास है।

इससे:

  • स्थानीय उत्पादों को पहचान मिल रही है
  • महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है
  • पारंपरिक कौशल को प्रोत्साहन मिल रहा है

शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर बल

राज्यपाल ने ओम प्रकाश बैगा के बच्चों शिवानी, शिवम और पुष्पेंद्र को शिक्षा के महत्व के बारे में प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही सपनों को साकार करने का माध्यम है।

उन्होंने युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और नैतिक मूल्यों का पालन करने की सीख दी। परिवार ने बताया कि उन्हें बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

राज्यपाल ने परसिली स्थित सत्यसाई आश्रम में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से जीवन के विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया।

उन्होंने जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण पर भी बल दिया तथा पारंपरिक कला और पेंटिंग को आजीविका का माध्यम बनाने की आवश्यकता बताई।

प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव

इस कार्यक्रम को प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे:

  • अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी
  • योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा होगी
  • जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत होगी

सामाजिक स्तर पर यह संदेश गया है कि शासन जनजातीय और ग्रामीण समुदायों के साथ संवाद और सहयोग की नीति पर काम कर रहा है।

विशेषज्ञ दृष्टिकोण

नीतिगत विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं का प्रभाव तभी दीर्घकालिक होगा जब:

  • डेटा आधारित लाभार्थी चयन हो
  • पारदर्शी वितरण प्रणाली हो
  • नियमित मूल्यांकन और फीडबैक तंत्र हो

जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर एकीकृत रणनीति की आवश्यकता बताई जा रही है।

भविष्य की संभावनाएं

विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश जैसे राज्यों की भूमिका अहम है। यदि:

  • योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे
  • महिला सशक्तिकरण को और बढ़ावा मिले
  • स्वास्थ्य जागरूकता अभियान प्रभावी हों
  • स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार मिले

तो जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की गति तेज हो सकती है।

निष्कर्ष

सीधी जिले के वनांचल ग्राम परसिली में राज्यपाल मंगुभाई पटेल का जनजातीय संवाद केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह विकसित भारत के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में ठोस पहल का संकेत है। पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जोर भविष्य की नीति दिशा को स्पष्ट करता है।

यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर इस लक्ष्य की ओर कार्य करें, तो विकसित भारत का सपना केवल नारा नहीं बल्कि वास्तविकता बन सकता है।