मध्य प्रदेश में सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानें ‘ऑफ श्रेणी’ घोषित, शराब दुकानों पर बैठकर पीना पूरी तरह प्रतिबंधित

मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह ‘ऑफ श्रेणी’ घोषित कर दिया है। अब शराब दुकानों पर केवल बिक्री की अनुमति होगी, जबकि परिसर या आसपास शराब सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अवैध अहातों, ओवर रेटिंग और समय सीमा उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नई नीति का उद्देश्य कानून व्यवस्था मजबूत करना और सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन पर नियंत्रण लगाना है।

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का कलेक्टर्स का निर्देश – ‘शराब दुकान से सिर्फ शराब की बिक्री हो, वहां अवैध आहतों के जरिए न परोसी जाए शराब‘

(विद्याधर जाधव)

भोपाल (साई)।मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश की आबकारी व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। राज्य की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को अब पूरी तरह “ऑफ श्रेणी” घोषित कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब शराब दुकानों पर केवल शराब की बिक्री की अनुमति होगी, जबकि दुकान परिसर या उसके आसपास बैठकर शराब पीना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स और आबकारी अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति को जमीनी स्तर पर पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए। सरकार ने अवैध अहातों, ओवर रेटिंग, देर रात शराब बिक्री और नियमों के उल्लंघन पर विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है।

राज्य सरकार के इस निर्णय को आबकारी व्यवस्था में बड़े सुधार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या होती हैऑफ श्रेणीमदिरा दुकान?

मध्य प्रदेश आबकारी नियमों के अनुसार “ऑफ श्रेणी” यानी Off Category ऐसी मदिरा दुकानों को कहा जाता है जहां केवल शराब की बिक्री की अनुमति होती है। इन दुकानों पर शराब खरीदकर ग्राहक उसे घर या किसी वैध निजी स्थान पर ले जाकर सेवन कर सकते हैं, लेकिन दुकान परिसर या उसके आसपास शराब पीना पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है।

सरल शब्दों में:

  • दुकान केवल बिक्री केंद्र के रूप में काम करेगी
  • शराब पीने के लिए बैठने की सुविधा नहीं होगी
  • टेबल, कुर्सी, बार काउंटर जैसी व्यवस्था प्रतिबंधित रहेगी
  • दुकान के बाहर या आसपास शराब सेवन नहीं किया जा सकेगा
  • किसी प्रकार का अस्थायी या अवैध अहाता संचालित नहीं होगा

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन और उससे जुड़ी अव्यवस्थाओं पर नियंत्रण लगेगा।

डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने दिए सख्त निर्देश

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने आबकारी विभाग और जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नई नीति का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि:

  • अवैध रूप से संचालित शॉप बार तुरंत बंद किए जाएं
  • शराब दुकानों पर अवैध अहातों की जांच हो
  • तय समय सीमा के बाद शराब बिक्री रोकने के लिए अभियान चलाया जाए
  • ओवर रेटिंग करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई हो
  • नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए

सरकार ने इस अभियान के लिए विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश भी दिए हैं।

अवैध अहातों पर चलेगा विशेष अभियान

प्रदेश में लंबे समय से यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई शराब दुकानों के आसपास अवैध रूप से बैठकर शराब पीने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। कई स्थानों पर दुकानों के पास अस्थायी शेड, कुर्सियां और खाने-पीने की व्यवस्था भी की जाती थी।

नई नीति के तहत अब:

  • अवैध अहातों को तत्काल बंद कराया जाएगा
  • औचक निरीक्षण किए जाएंगे
  • पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त कार्रवाई करेंगे
  • नियम उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है

सरकार का मानना है कि इससे सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली अव्यवस्था, विवाद और अपराध की घटनाओं में कमी आएगी।

देर रात शराब बिक्री पर भी सख्ती

आबकारी विभाग को यह शिकायतें भी मिल रही थीं कि कई मदिरा दुकानें तय समय से पहले खुल जाती हैं और देर रात तक शराब बेचती रहती हैं। इसे लेकर अब सख्त निगरानी की तैयारी की गई है।

राजपत्र में निर्धारित समय सीमा का पालन सुनिश्चित कराने के लिए:

  • पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें गश्त करेंगी
  • देर रात शराब बिक्री पर तत्काल कार्रवाई होगी
  • समय सीमा उल्लंघन पर जुर्माना लगाया जाएगा
  • बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आबकारी नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर भी उनका पालन हो।

ओवर रेटिंग रोकने के लिए नई व्यवस्था

शराब दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने यानी ओवर रेटिंग की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।

अब हर शराब दुकान पर:

  • विक्रय दरों की सूची अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी होगी
  • क्यूआर कोड लगाए जाएंगे
  • ग्राहक वास्तविक कीमत की जांच कर सकेंगे
  • पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी

यदि कोई ठेकेदार तय दर से अधिक कीमत वसूलता पाया गया तो उसके खिलाफ भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की जाएगी।

महिलाओं और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों पर फोकस

सरकार के इस फैसले को सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई इलाकों में स्थानीय नागरिक और विशेष रूप से महिलाएं शराब दुकानों के आसपास होने वाली भीड़, विवाद और सार्वजनिक शराब सेवन को लेकर लगातार शिकायतें कर रही थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन कम होगा
  • महिलाओं की सुरक्षा भावना मजबूत होगी
  • स्कूल, कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों में व्यवस्था सुधरेगी
  • सड़क किनारे होने वाली अव्यवस्था पर रोक लगेगी

सरकार इसी सामाजिक दबाव और जन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सख्त नीति लागू कर रही है।

पवित्र नगरों में निगरानी और कड़ी

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश के पवित्र घोषित नगरों और धार्मिक क्षेत्रों में शराब की अवैध बिक्री किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इन क्षेत्रों में पहले से ही:

  • मदिरा दुकानों पर प्रतिबंध लागू है
  • शराब बिक्री नियंत्रित है
  • अवैध परिवहन रोकने के आदेश हैं

अब निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।

प्रशासनिक जवाबदेही भी होगी तय

सरकार ने केवल ठेकेदारों पर ही नहीं बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार नियम उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

इससे प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ेगी और निरीक्षण व्यवस्था मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि आबकारी नीति का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है जब प्रशासनिक निगरानी लगातार सक्रिय रहे।

आबकारी नीति में क्यों जरूरी माने जा रहे बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में शराब दुकानों से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई थीं। इनमें शामिल हैं:

  • अवैध अहाते
  • सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन
  • देर रात बिक्री
  • ओवर रेटिंग
  • कानून व्यवस्था की शिकायतें

सरकार अब इन समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए सख्त आबकारी प्रबंधन मॉडल लागू कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि “ऑफ श्रेणी” व्यवस्था लागू होने से शराब दुकानों की गतिविधियां नियंत्रित दायरे में रहेंगी और सामाजिक प्रभाव को कम किया जा सकेगा।

सामाजिक और राजनीतिक असर

राज्य सरकार के इस फैसले का सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर असर देखने को मिल सकता है।

सामाजिक स्तर पर:

  • सार्वजनिक अनुशासन मजबूत होगा
  • शराब दुकानों के आसपास विवाद कम हो सकते हैं
  • नागरिकों की शिकायतों में कमी आ सकती है

राजनीतिक स्तर पर:

  • सरकार कानून व्यवस्था पर सख्ती का संदेश देना चाहती है
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनभावनाओं को ध्यान में रखा गया है
  • महिलाओं और परिवारों से जुड़े मुद्दों पर फोकस बढ़ा है

हालांकि कुछ व्यापारिक संगठनों का मानना है कि नई सख्ती से कारोबार प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय

आबकारी मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि सरकार इस नीति को पूरी सख्ती से लागू करती है तो यह प्रदेश की शराब व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • डिजिटल निगरानी और क्यूआर कोड व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाएगी
  • अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा
  • राजस्व प्रणाली अधिक व्यवस्थित हो सकती है
  • पुलिस और आबकारी विभाग के संयुक्त अभियान से असर बढ़ेगा

हालांकि इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग और स्थानीय स्तर पर सख्त अमल जरूरी होगा।

भविष्य में क्या हो सकते हैं बदलाव?

सरकार की सख्ती को देखते हुए आने वाले समय में आबकारी व्यवस्था में और बदलाव संभव माने जा रहे हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम
  • ऑनलाइन शिकायत निगरानी
  • जीपीएस आधारित निरीक्षण
  • लाइसेंस नवीनीकरण में सख्ती
  • नियम उल्लंघन पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई

यदि यह मॉडल सफल रहता है तो अन्य राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को “ऑफ श्रेणी” घोषित करना आबकारी व्यवस्था में बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन रोकना, अवैध अहातों पर कार्रवाई करना और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब शराब दुकानों से जुड़े नियमों के उल्लंघन को किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस नीति को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है। यदि सख्ती और निगरानी लगातार बनी रहती है तो इससे सामाजिक व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण दोनों को मजबूती मिल सकती है।