भागीरथपुरा कांड के बाद सरकार जागी: हर कुएं, बावड़ी और बोरिंग का हेल्थकार्ड बनेगा

(ब्यूरो कार्यालय)
इंदौर (साई)।
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 35 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में जल-जनित महामारी पाई गई। एनजीटी के निर्देश पर अब सभी 55 जिलों के पर्यावरण प्लान बदले गए हैं। इंदौर में जल स्रोतों की सेहत जांचने के लिए नई मॉनिटरिंग सेल बनी है। हर कुएं, तालाब और नदी का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी 55 जिलों के पर्यावरण प्लान संशोधित किए हैं। हर जिले में पानी की गुणवत्ता जांचना अब जरूरी होगा।

जल स्रोतों की सेहत जांचने के लिए नई मॉनिटरिंग सेल

इंदौर में जल स्रोतों की सेहत जांचने के लिए नई मॉनिटरिंग सेल बनी है। यह सेल जिले के सभी जल स्रोतों की निगरानी करेगी। नदी, तालाब और अन्य स्रोतों की जांच नियमित होगी। जल स्रोतों की जियो टैगिंग भी की जाएगी। इससे हर स्रोत की स्थिति साफ पता चलेगी।

इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी 55 जिलों के पर्यावरण प्लान संशोधित किए हैं। हर जिले में पानी की गुणवत्ता जांचना अब जरूरी होगा। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार पूरे जिले के लिए नई योजना तैयार की गई है। इस योजना में जल स्रोतों के संरक्षण पर खास फोकस रहेगा।

पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए योजना

सरकार ने पानी बचाने के लिए 9 बिंदुओं की योजना बनाई है। इसमें सतही पानी और ग्राउंड वॉटर दोनों शामिल हैं। परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। दूषित पानी के उपचार को प्राथमिकता दी गई है। यह योजना नदी, तालाब और भूजल तीनों को कवर करती है।

हर स्रोत के लिए अलग रणनीति बनाई गई है। इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। जिले की सभी नदियों और तालाबों को चिह्नित किया जाएगा। जो हिस्से प्रदूषित हैं, उन्हें अलग से पहचाना जाएगा। हर जल स्रोत का गुणवत्ता के आधार पर हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनेगा।

water quality monitoring के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी 55 जिलों के पर्यावरण प्लान संशोधित किए हैं। हर जिले में पानी की गुणवत्ता जांचना अब जरूरी होगा। इंदौर में इसके लिए अलग मॉनिटरिंग सेल बनाई गई है। यह सेल जिले के सभी जल स्रोतों की निगरानी करेगी। नदी, तालाब और अन्य स्रोतों की जांच नियमित होगी।

इसके अलावा, जल स्रोतों की सेहत जांचने के लिए नई मॉनिटरिंग सेल बनी है। यह सेल जिले के सभी जल स्रोतों की निगरानी करेगी। नदी, तालाब और अन्य स्रोतों की जांच नियमित होगी। जल स्रोतों की जियो टैगिंग भी की जाएगी। इससे हर स्रोत की स्थिति साफ पता चलेगी।

नदी-तालाबों को कचरे और अतिक्रमण से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं

नदी-तालाबों को कचरे और अतिक्रमण से बचाया जाएगा। भूजल स्रोतों की जियो टैगिंग की जाएगी। इससे हर स्रोत की सही लोकेशन दर्ज होगी। वॉटर हार्वेस्टिंग और वॉटर रिचार्जिंग को भी बढ़ाया जाएगा।

इसके अलावा, पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए योजना बनाई गई है। इसमें सतही पानी और ग्राउंड वॉटर दोनों शामिल हैं। परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। दूषित पानी के उपचार को प्राथमिकता दी गई है। यह योजना नदी, तालाब और भूजल तीनों को कवर करती है।