(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। भोपाल में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर एक विशेष समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लालघाटी स्थित श्रद्धेय दीनदयाल जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत आम का पौधा रोपा। इस कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सांरग, भोपाल महापौर मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा और कई जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
समारोह की विस्तृत रिपोर्ट
समारोह की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने दीनदयाल जी के अंत्योदय और एकात्म मानववाद के दर्शन को समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के मार्ग के रूप में उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी के राष्ट्र सेवा और जनकल्याण के विचार आज भी राज्य की नीतियों में प्रतिबिंबित होते हैं। इसके बाद, सभी उपस्थित प्रतिनिधियों ने मिलकर आम के पौधे को रोपित किया, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रतीक माना गया। कार्यक्रम के दौरान कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कविताओं ने दीनदयाल जी के जीवन एवं कार्यों को श्रद्धांजलि दी।
समाज में दीनदयाल जी की विचारधारा का प्रभाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि दीनदयाल जी की विचारधारा से प्रेरित होकर राज्य ने समावेशी विकास के कई कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सृजन के लिए नई योजनाएँ लागू की गई हैं, जिससे सामाजिक असमानताओं को कम करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा, दीनदयाल जी के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने महिलाओं और शरणार्थियों के लिए विशेष कल्याण कार्यक्रम शुरू किए हैं। यह सभी पहलें राज्य के विकास मॉडल को अधिक मानवीय और स्थायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: कोई नहीं (सरकारी कार्यक्रम)
• आयोजन: पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती समारोह
• स्थान: लालघाटी, भोपाल
• मुख्य उद्देश्य: श्रद्धांजलि अर्पित करना, सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत आम का पौधा रोपण, समावेशी विकास के नए कदम
• लक्ष्य: पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कल्याण, जनजागरूकता
डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित इस समारोह ने दीनदयाल जी के मानवतावादी सिद्धांतों को पुनः जीवंत किया और राज्य के विकास में सामाजिक समावेशिता की महत्ता को रेखांकित किया। निरंतर कर्मचारी कल्याण, आधुनिक तकनीक का उपयोग और नियमित समीक्षा के माध्यम से राज्य की प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, जिससे सतत विकास और सामाजिक प्रगति के लक्ष्य साकार होंगे।