(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल (साई)। 20 सितंबर को भोपाल में एक आईएएस अधिकारी की पत्नी होटल के लिफ्ट में फँस गईं। उसी दिन तीन लिफ्टें तुरंत सील कर दी गईं और लिफ्ट सुरक्षा पर एक विशेष समिति का गठन हुआ। दो हफ्ते बाद, 27 सितंबर को बिजली के खंभे में करंट से भाजयुमो नेता दिव्यऋषि तिवारी की दुखद मृत्यु हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की और चार अधिकारियों की जांच समिति बनायी। दोनों घटनाएँ सार्वजनिक सुरक्षा के अभाव को उजागर करती हैं, इसलिए सरकार ने लिफ्ट एक्ट की रूपरेखा तैयार करने की घोषणा की।
घटना विवरण और सरकारी प्रतिक्रिया
लिफ्ट दुर्घटना के बाद, नगर निगम ने तीन लिफ्टों को तकनीकी कारणों से बंद कर दिया और एक स्वतंत्र विशेषज्ञ टीम को नियुक्त कर लिफ्टों की सुरक्षा जाँच करने का आदेश दिया। समिति में सार्वजनिक कार्य विभाग, नगर निगम और सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं, जो लिफ्ट में ओवरलोड, रूटीन मेंटेनेंस और आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम की समीक्षा करेंगे। करंट मौत के संदर्भ में, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) की 2024‑25 की रिपोर्ट में 1,102 मौतें दर्ज हैं, औसत हर 8 घंटे में एक मृत्यु। राज्य सरकार ने इस आंकड़े को घटाने के लिए इलेक्ट्रिक सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करने का संकल्प लिया।
सुरक्षा संस्कृति और तकनीकी उपाय
सरकार ने लिफ्ट एक्ट के मसौदे में डिजिटल मॉनिटरिंग, रीयल‑टाइम अलार्म और नियमित अनिवार्य निरीक्षण को अनिवार्य किया है। साथ ही, इलेक्ट्रिक लाइनों के लिए इन्सुलेशन मानक, ग्राउंडिंग और सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। MPERC ने सुझाव दिया कि स्मार्ट सेंसर और IoT‑आधारित सिस्टम से करंट लीक का पता तुरंत लगाया जा सके। इन तकनीकी उपायों से न केवल दुर्घटनाओं की संख्या घटेगी, बल्कि सार्वजनिक भरोसा भी बढ़ेगा।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी/संस्था: नगर निगम, MPERC, मुख्यमंत्री कार्यालय
• आयोजन: लिफ्ट सुरक्षा समिति गठन, करंट मौतों की जांच समिति
• स्थान: भोपाल
• मुख्य उद्देश्य: लिफ्ट सुरक्षा को सुदृढ़ करना, करंट मौतों को कम करना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: लिफ्ट एक्ट का मसौदा तैयार, इलेक्ट्रिक सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन
• लक्ष्य: 2025‑26 तक करंट मौतों को 30% तक घटाना, सभी सार्वजनिक लिफ्टों में रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग लागू करना
भविष्य में नियमित निरीक्षण, आधुनिक तकनीक का उपयोग और कर्मचारियों एवं जनता की जागरूकता को मिलाकर ही सार्वजनिक सुरक्षा में स्थायी सुधार संभव है। लिफ्ट एक्ट की तेज़ कार्यवाही और इलेक्ट्रिक सुरक्षा के कड़े मानक मध्यप्रदेश को दुर्घटनाओं‑मुक्त मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।