वाराणसी के सभी 84 घाट डूबे, छतों पर आरती-अंतिम संस्कार; MP-UP समेत 4 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली: उत्तर भारत में मानसून की सक्रियता के बीच उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से सभी 84 घाट जलमग्न हो गए हैं। मणिकर्णिका घाट पर पानी बढ़ने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था ऊपरी हिस्से और छतों पर करनी पड़ रही है, जबकि दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती भी सामान्य स्थान के बजाय ऊपरी हिस्से से कराई जा रही है।

मौसम विभाग ने भी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। IMD के ताजा अपडेट के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में 23 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों के लिए अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी भी जारी है।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, सभी 84 घाट डूबे

लगातार बारिश के बाद वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसके चलते शहर के प्रमुख घाटों पर पानी पहुंच गया है और घाटों से जुड़ी सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। ताजा रिपोर्टों में शहर के सभी 84 घाटों के जलमग्न होने की बात सामने आई है।

घाटों के डूबने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। गंगा के किनारे होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।

वाराणसी में प्रशासन गंगा के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय स्तर पर बाढ़ चौकियों और निगरानी व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है।

मणिकर्णिका घाट पर छत पर अंतिम संस्कार

गंगा का पानी घाटों के निचले हिस्से तक पहुंचने के बाद मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है। पानी से सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं।

मणिकर्णिका घाट वाराणसी के सबसे महत्वपूर्ण श्मशान घाटों में से एक है। यहां गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर सीधे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक घाट का निचला हिस्सा पानी में डूबने के बाद ऊपरी हिस्सों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

दशाश्वमेध घाट पर छत से हो रही गंगा आरती

वाराणसी की पहचान बन चुकी दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती भी गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित हुई है। सामान्य स्थान पर पानी पहुंचने के बाद आरती को ऊंचे स्थान से कराया जा रहा है।

गंगा आरती देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में बढ़ते जलस्तर के बीच सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए घाट के निचले हिस्सों में आवाजाही सीमित की जा रही है।

गंगा के साथ दूसरी नदियों पर भी नजर

उत्तर प्रदेश में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि अन्य नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

वाराणसी में गंगा के साथ वरुणा नदी के आसपास के इलाकों में भी पानी का असर सामने आया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार वरुणा के पानी से कुछ निचले इलाकों के घर प्रभावित हुए हैं।

प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी की जा रही है और लोगों को नदी तथा जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

यूपी में बारिश का दौर जारी

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। IMD ने 23 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। अगले कुछ दिनों तक भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।

बारिश के कारण कई शहरों में जलभराव, यातायात बाधित होने और निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बन सकती है। तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश की चेतावनी

मध्य प्रदेश में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। IMD के ताजा उप-मंडलवार पूर्वानुमान में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश दोनों के लिए 23 से 26 अगस्त के बीच अलग-अलग दिनों में भारी बारिश की चेतावनी दर्ज की गई है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश के कारण कई नदियों और जलप्रपातों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में नदी, नाले, बांध और झरनों के आसपास जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

हालिया मौसम अपडेट में मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज चेतावनी भी जारी की गई थी।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी बारिश का असर

मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भी मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। मौसम विभाग के अनुसार ओडिशा में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में व्यापक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखने की जरूरत है।

उत्तराखंड और हिमाचल में भी सावधानी जरूरी

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क अवरोध का खतरा बढ़ जाता है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण अचानक मलबा आने और सड़कों पर फिसलन की स्थिति बन सकती है।

IMD ने भी उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां भी कुछ क्षेत्रों में हो सकती हैं।

ऐसे में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

राजस्थान में बारिश कमजोर, गर्मी और उमस का असर

उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में जहां बारिश का दौर तेज है, वहीं राजस्थान के कई इलाकों में मानसून कमजोर पड़ने से गर्मी और उमस का असर बढ़ सकता है।

बारिश में क्षेत्रीय अंतर के कारण राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग बना हुआ है। कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण तापमान में वृद्धि और उमस महसूस की जा सकती है।

23 अगस्त को देशभर में सक्रिय रहेगा मानसून

IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 23 अगस्त को देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। उत्तराखंड, मध्य और पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर तथा ओडिशा समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लिए खास तौर पर बारिश की चेतावनी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन क्षेत्रों में पहले से ही कई स्थानों पर जलस्तर और जलभराव की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात के बीच लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • नदी और घाटों के बढ़े जलस्तर के करीब जाने से बचें।
  • जलभराव वाले रास्तों पर पैदल या वाहन से जाने से पहले स्थिति की जानकारी लें।
  • पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन संभावित मार्गों पर यात्रा से बचें।
  • बिजली गिरने के दौरान खुले मैदान, पेड़ और ऊंची संरचनाओं से दूर रहें।
  • स्थानीय प्रशासन और IMD की ओर से जारी ताजा चेतावनियों का पालन करें।
  • बच्चों और बुजुर्गों को बाढ़ या तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रखें।

वाराणसी में गंगा का बढ़ता जलस्तर बना सबसे बड़ी चिंता

वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि मानसून के दौरान नदी किनारे बसे इलाकों में स्थिति कितनी तेजी से बदल सकती है। 84 घाटों का जलमग्न होना और धार्मिक गतिविधियों का ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित होना जलस्तर बढ़ने की गंभीरता को दर्शाता है।

फिलहाल प्रशासन की निगरानी और मौसम विभाग की चेतावनियां महत्वपूर्ण हैं। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और गंगा के जलस्तर पर निर्भर करेगा कि वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के प्रभावित इलाकों में हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं।