(ब्यूरो कार्यालय)
महावीर जी (साई)। राजस्थान के करौली जिले में स्थित प्रसिद्ध श्रीमहावीरजी रेलवे स्टेशन पर ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने कुछ देर के लिए यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को हैरान कर दिया। यहां एक बंदर ने महिला यात्री का करीब 40 हजार रुपये से भरा पर्स छीन लिया और उसे लेकर फुट ओवरब्रिज की टीन शेड पर जा बैठा।
महिला और आसपास मौजूद लोगों को उम्मीद थी कि बंदर शायद खाने-पीने की कोई चीज निकालकर पर्स छोड़ देगा। लेकिन पर्स में खाने की कोई वस्तु नहीं मिली तो बंदर ने उसमें रखे नोटों को निकालना शुरू कर दिया।
इसके बाद करीब 15 मिनट तक स्टेशन पर अलग ही तरह का नजारा दिखाई दिया। बंदर ने 500, 200 और 100 रुपये के नोट हवा में उछालना शुरू कर दिए। ऊपर से गिरते नोटों को नीचे मौजूद यात्री और रेलवे कर्मचारी तेजी से समेटने लगे।
घटना के बाद जब रकम की गिनती की गई तो करीब 40 हजार रुपये में से 39 हजार रुपये वापस मिल गए। करीब एक हजार रुपये का पता नहीं चल सका। महिला यात्री के लिए यह घटना बेहद परेशान करने वाली थी, लेकिन यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की ईमानदारी के कारण उनकी बड़ी रकम बच गई।
कोटा से आई थीं महिला यात्री, रिश्तेदारों को देने थे पैसे
जानकारी के अनुसार महिला यात्री कोटा से जनशताब्दी एक्सप्रेस में सवार होकर श्रीमहावीरजी पहुंची थीं। उनका उद्देश्य अपने रिश्तेदारों से मिलने और उन्हें पैसे देने का था।
महिला के पर्स में करीब 40 हजार रुपये रखे हुए थे। ट्रेन से उतरने के बाद वह प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पहुंचीं। इसी दौरान वहां मौजूद एक बंदर ने अचानक उनके हाथ से पर्स झपट लिया।
अचानक हुई इस घटना से महिला यात्री घबरा गईं। बंदर पर्स लेकर भागा और देखते ही देखते फुट ओवरब्रिज के ऊपर बनी टीन शेड पर पहुंच गया।
महिला और आसपास मौजूद लोगों ने बंदर से पर्स वापस लेने की कोशिश की, लेकिन बंदर ऊंचाई पर पहुंच चुका था। इसके बाद जो हुआ, वह स्टेशन पर मौजूद लोगों के लिए अप्रत्याशित था।
खाने की चीज नहीं मिली तो नोट निकालने लगा बंदर
बंदर ने टीन शेड पर बैठकर पर्स को खोल लिया। आमतौर पर बंदर यात्रियों से खाने-पीने की चीजें छीनने के लिए जाने जाते हैं। लोगों को उम्मीद थी कि पर्स में कुछ खाने का सामान मिलते ही बंदर उसे लेकर भाग जाएगा।
लेकिन पर्स में खाने की कोई चीज नहीं थी।
इसके बाद बंदर ने पर्स में रखे नोटों को निकालना शुरू कर दिया। उसने एक-एक करके 500, 200 और 100 रुपये के नोट बाहर निकाले और उन्हें नीचे फेंकना शुरू कर दिया।
नीचे मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य किसी फिल्मी दृश्य जैसा था। कुछ ही देर में हवा में उड़ते नोट प्लेटफॉर्म और आसपास के हिस्से में गिरने लगे।
करीब 15 मिनट तक चलता रहा ‘नोटों की बारिश’ का सिलसिला
बताया गया कि बंदर करीब 15 मिनट तक टीन शेड पर बैठा रहा और इस दौरान वह पर्स से नोट निकालकर नीचे फेंकता रहा।
जैसे ही नोट नीचे गिरते, यात्री और रेलवे कर्मचारी उन्हें उठाने के लिए दौड़ पड़ते। स्टेशन पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया।
हालांकि लोगों की भीड़ में किसी ने नोटों को अपने पास रखने की कोशिश नहीं की। यात्रियों और रेलकर्मियों ने गिरते हुए नोटों को समेटना शुरू किया।
इस पूरी घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यही रही कि लोगों ने महिला की परेशानी को समझते हुए नोटों को सुरक्षित रखने और वापस करने की कोशिश की।
यात्रियों और रेलवे स्टाफ ने दिखाई ईमानदारी
किसी सार्वजनिक स्थान पर बड़ी मात्रा में नकदी बिखर जाने पर उसे सुरक्षित रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। श्रीमहावीरजी स्टेशन की इस घटना में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने तत्परता दिखाई।
जैसे-जैसे नोट नीचे गिरते गए, लोगों ने उन्हें उठाकर एक जगह इकट्ठा किया। इससे रकम के बिखरने या किसी नोट के गुम होने की संभावना कम हुई।
बंदर द्वारा पर्स खाली किए जाने के बाद पर्स को भी सुरक्षित वापस लिया गया।
बाद में महिला यात्री की मौजूदगी में बरामद रकम की गिनती की गई। इस दौरान पर्स की दूसरी जेब में रखे 10 हजार रुपये सुरक्षित मिले, जबकि बाकी रकम में से अधिकांश नोट नीचे से बरामद कर लिए गए।
40 हजार में से मिले 39 हजार रुपये
रकम की गिनती के बाद पता चला कि महिला के करीब 40 हजार रुपये में से लगभग 39 हजार रुपये वापस मिल गए।
करीब एक हजार रुपये की राशि नहीं मिल सकी। माना जा रहा है कि नोट हवा में उड़कर स्टेशन के किसी दूसरे हिस्से में चले गए होंगे या भीड़ के बीच उनकी तलाश नहीं हो सकी।
फिर भी महिला के लिए 39 हजार रुपये वापस मिलना बड़ी राहत थी।
यदि यात्री और रेलवे कर्मचारी समय रहते नोटों को नहीं समेटते तो नुकसान कहीं अधिक हो सकता था। महिला ने इस मदद के लिए यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के प्रति आभार जताया।
घटना ने बंदरों की समस्या को फिर चर्चा में ला दिया
श्रीमहावीरजी रेलवे स्टेशन पर बंदरों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं बताई जाती। श्रीमहावीरजी एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु तथा यात्री पहुंचते हैं।
यात्रियों की भीड़ और खाने-पीने की चीजों की उपलब्धता बंदरों को रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों की ओर आकर्षित कर सकती है।
ऐसे में यात्रियों के सामान पर बंदरों की नजर पड़ना कई बार परेशानी का कारण बन जाता है। बैग, पर्स, खाने का सामान और अन्य वस्तुएं बंदरों के निशाने पर आ सकती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे परिसर में बंदरों की मौजूदगी और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
धार्मिक पर्यटन स्थल होने के कारण बढ़ती है चुनौती
श्रीमहावीरजी क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं।
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ उनके सामान की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां बंदरों की संख्या अधिक हो, यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
यात्रियों के हाथ में खुले तौर पर खाने की चीजें या पॉलिथीन बैग देखकर बंदर अचानक झपट्टा मार सकते हैं। कई बार वे बैग या पर्स भी छीन लेते हैं।
ऐसी स्थिति में यात्री के घायल होने का जोखिम भी पैदा हो सकता है।
यात्रियों को बंदरों से कैसे सावधान रहना चाहिए?
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए यात्रियों को कुछ सामान्य सावधानियां अपनानी चाहिए।
पर्स और मोबाइल खुले में न रखें। स्टेशन पर चलते समय कीमती सामान को बैग के अंदर सुरक्षित रखें और पर्स को मजबूती से पकड़कर रखें।
बंदर को देखकर उसके पास न जाएं। बंदर के हाथ में सामान होने पर उसे वापस लेने के लिए सीधे उसके पास जाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
खाने की चीजें खुले में न दिखाएं। बंदर अक्सर खाने की वस्तुओं की ओर आकर्षित होते हैं।
बंदर को छेड़ने या डराने की कोशिश न करें। इससे बंदर आक्रामक हो सकता है।
बच्चों पर विशेष नजर रखें। भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशन पर बच्चों के हाथ में खाने की चीजें या छोटे बैग होने पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
बंदर ने पर्स क्यों छीना?
बंदरों द्वारा इंसानों का सामान छीनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों पर उन्हें यात्रियों के हाथ में खाने की चीजें दिखाई देती हैं। कई बार बंदर भोजन की तलाश में बैग या पर्स छीन लेते हैं।
इस मामले में भी संभवतः बंदर ने पर्स को किसी खाने की वस्तु के लिए छीना होगा। लेकिन जब उसे अंदर खाने की चीज नहीं मिली तो उसने पर्स में मौजूद नोटों के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी।
यह कहना संभव नहीं है कि बंदर ने नोटों का मूल्य समझकर उन्हें जानबूझकर उड़ाया। उसके व्यवहार को सामान्य पशु व्यवहार के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
रेलवे प्रशासन के सामने क्या चुनौती है?
इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यात्रियों को बंदरों से सुरक्षित रखने का है।
यदि किसी स्टेशन पर बंदरों की संख्या लगातार अधिक है और यात्रियों से सामान छीनने की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, तो वहां व्यवस्थित नियंत्रण उपायों की आवश्यकता होती है।
इसके लिए संबंधित स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और रेलवे के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो सकता है।
बंदरों को पकड़ने या स्थानांतरित करने जैसी कार्रवाई भी संबंधित नियमों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप ही की जानी चाहिए।
सिर्फ यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह देने के साथ समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। यदि बंदरों की संख्या या उनकी गतिविधियां यात्रियों के लिए लगातार जोखिम पैदा कर रही हैं, तो संबंधित विभागों को इसका व्यवस्थित समाधान तलाशना होगा।
क्या स्टेशन पर चेतावनी बोर्ड लगाए जा सकते हैं?
यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे स्टेशन पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाना एक व्यावहारिक कदम हो सकता है।
ऐसे बोर्ड पर यात्रियों को बताया जा सकता है कि—
- बंदरों को खाना न खिलाएं।
- उनके पास जाकर सामान वापस लेने की कोशिश न करें।
- मोबाइल और पर्स सुरक्षित रखें।
- बच्चों को बंदरों से दूर रखें।
- बंदर के झपटने पर तुरंत रेलवे कर्मचारियों को सूचना दें।
ऐसी जानकारी खासकर उन यात्रियों के लिए उपयोगी हो सकती है जो पहली बार श्रीमहावीरजी स्टेशन पहुंच रहे हों।
घटना का सबसे सकारात्मक पहलू क्या रहा?
पूरे घटनाक्रम में सबसे सकारात्मक पहलू यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की ईमानदारी रही।
लगभग 40 हजार रुपये की रकम स्टेशन पर बिखर गई थी। ऐसी स्थिति में महिला को अपनी पूरी रकम वापस मिलने की उम्मीद कम हो सकती थी। लेकिन लोगों ने नोटों को समेटकर महिला तक पहुंचाया।
करीब 39 हजार रुपये की बरामदगी इस बात को दिखाती है कि मौके पर मौजूद लोगों ने सहयोग किया।
महिला के लिए यह आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम करने वाला रहा। घटना भले ही बंदर की हरकत से शुरू हुई, लेकिन यात्रियों और कर्मचारियों के सहयोग के कारण इसका परिणाम अपेक्षाकृत राहत देने वाला रहा।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन सकती है घटना
रेलवे स्टेशन पर बंदर द्वारा पर्स छीनने और नोट उड़ाने की घटना अपने आप में असामान्य है। इसलिए ऐसी घटनाएं आमतौर पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती हैं।
‘बंदर ने उड़ाए नोट’ या ‘स्टेशन पर नोटों की बारिश’ जैसे शब्द इस घटना की विचित्रता को बयां करते हैं। हालांकि, घटना को मनोरंजक तरीके से देखने के बजाय इसके सुरक्षा पक्ष पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
महिला के लिए यह घटना निश्चित रूप से तनावपूर्ण रही होगी। खासकर तब जब वह किसी जरूरी काम के लिए बड़ी रकम लेकर यात्रा कर रही थीं।
आगे क्या होना चाहिए?
श्रीमहावीरजी जैसे व्यस्त धार्मिक पर्यटन स्थलों वाले रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए बंदरों की समस्या का स्थायी प्रबंधन जरूरी है।
इसके लिए संबंधित विभागों द्वारा क्षेत्र का निरीक्षण, बंदरों की गतिविधियों की निगरानी, यात्रियों को जागरूक करना और आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।
साथ ही यात्रियों को भी यह समझना होगा कि बंदरों को छेड़ना या उनसे जबरन सामान छीनना स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
रेलवे परिसर में यात्रियों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ही प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।
करौली के श्रीमहावीरजी रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना जितनी अनोखी है, उतना ही बड़ा संदेश भी देती है। एक बंदर महिला यात्री का करीब 40 हजार रुपये से भरा पर्स लेकर फुट ओवरब्रिज की टीन शेड पर चढ़ गया और करीब 15 मिनट तक 500, 200 और 100 रुपये के नोट नीचे फेंकता रहा।
स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने नोटों को समेटा और महिला को वापस सौंप दिया। गिनती के बाद करीब 39 हजार रुपये बरामद हुए, जबकि लगभग एक हजार रुपये नहीं मिल सके।
इस घटना का सबसे अहम पहलू लोगों की ईमानदारी और तत्परता रही। साथ ही, इसने श्रीमहावीरजी स्टेशन पर बंदरों की समस्या को भी फिर सामने ला दिया है।
अब जरूरत इस बात की है कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग बंदरों की समस्या के प्रबंधन के लिए प्रभावी कदम उठाएं। यात्रियों की ओर से भी सावधानी जरूरी है। पर्स, मोबाइल और खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित रखना तथा बंदरों से दूरी बनाए रखना ऐसी घटनाओं से बचने का सबसे व्यावहारिक तरीका है।

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