स्कूल की किताब में फिल्मी गीत, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
(वाय.के. पाण्डे)
नई दिल्ली (साई)।ओडिशा की स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला कक्षा 5 की अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक से जुड़ा है, जिसमें गलती से बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के प्रसिद्ध गीत ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ के बोल छप गए। यह गीत अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन पर फिल्माया गया था और वर्ष 1999 में रिलीज हुई इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत माना जाता है।
नई किताबें छात्रों तक पहुंचने के बाद जब उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, तो इस गलती ने शिक्षा विभाग, पुस्तक संपादन प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कैसे सामने आया पूरा मामला?
मामले की जानकारी तब सामने आई जब कक्षा 5 की अंग्रेजी पुस्तक के कुछ पन्नों की तस्वीरें ऑनलाइन साझा की गईं। तस्वीरों में स्पष्ट रूप से फिल्मी गीत के बोल दिखाई दिए, जिसके बाद सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो गया।
कई अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस गलती पर आश्चर्य जताते हुए सवाल उठाया कि प्राथमिक कक्षा की पुस्तक में फिल्मी गीत के बोल आखिर कैसे छप गए।
यह घटना केवल एक प्रिंटिंग मिस्टेक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और समीक्षा प्रक्रिया में गंभीर चूक के रूप में देखा जा रहा है।
‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ क्यों बना चर्चा का विषय?
‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ हिंदी सिनेमा का एक बेहद लोकप्रिय गीत है, जिसे आज भी लोग पसंद करते हैं। लेकिन इस गीत का किसी प्राथमिक स्कूल की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में छप जाना कई सवाल पैदा करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- पाठ्यपुस्तकों की सामग्री बच्चों की उम्र और पाठ्यक्रम के अनुरूप होनी चाहिए।
- हर पुस्तक कई स्तरों की समीक्षा से गुजरती है।
- ऐसी गलती बताती है कि संपादन और प्रूफरीडिंग में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है।
एडिटिंग और क्वालिटी कंट्रोल पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि पुस्तक प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया में यह गलती कैसे नजरअंदाज हो गई।
सामान्य तौर पर किसी भी पाठ्यपुस्तक के प्रकाशन से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ता है:
- विषय विशेषज्ञ द्वारा सामग्री तैयार करना।
- भाषा विशेषज्ञ द्वारा संपादन।
- प्रूफरीडिंग।
- अंतिम स्वीकृति।
- छपाई और वितरण।
यदि इन सभी चरणों के बावजूद इतनी बड़ी त्रुटि सामने आई है, तो यह गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की गंभीर खामी की ओर संकेत करता है।
सोशल मीडिया पर भी उठी प्रतिक्रिया
जैसे ही यह मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया।
कुछ लोगों ने इसे हास्यास्पद बताया, जबकि कई लोगों ने इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक करार दिया। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में इस प्रकार की त्रुटियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि छोटी कक्षाओं की पुस्तकों में किसी भी प्रकार की गलती बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
पहली बार नहीं हुई ऐसी गलती
यह पहला अवसर नहीं है जब ओडिशा की स्कूली किताबें विवादों में आई हों।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत राज्य में लागू की गई नई पुस्तकों में पहले भी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आ चुकी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार:
- कक्षा 1 से 8 तक की 55 नई पुस्तकों में कुल 1,678 गलतियां पाई गईं।
- इनमें तथ्यात्मक त्रुटियां शामिल थीं।
- व्याकरण संबंधी गलतियां मिलीं।
- स्पेलिंग की कई गलतियां पाई गईं।
- कुछ संदर्भ भी गलत पाए गए।
सबसे ज्यादा 705 गलतियां कक्षा 8 की पुस्तकों में दर्ज की गई थीं।
अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
पुस्तकों में बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए थे।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने:
- टीचर एजुकेशन और स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (TE&SCERT) के तत्कालीन निदेशक को निलंबित किया।
- तीन सहायक निदेशकों पर भी कार्रवाई की।
यह कार्रवाई इस बात का संकेत थी कि सरकार शिक्षा सामग्री में लापरवाही को गंभीरता से ले रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों की चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा बच्चों के बौद्धिक विकास की नींव होती है। यदि शुरुआती कक्षाओं की पुस्तकों में लगातार त्रुटियां मिलती हैं, तो इसका असर विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
- डिजिटल और मैनुअल दोनों स्तरों पर समीक्षा होनी चाहिए।
- प्रत्येक पुस्तक के लिए स्वतंत्र प्रूफरीडिंग तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
- प्रकाशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
नई शिक्षा नीति के सामने चुनौती
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और बच्चों को बेहतर शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना है। लेकिन लगातार सामने आ रही त्रुटियां इस लक्ष्य के सामने चुनौती बनती दिखाई दे रही हैं।
यदि पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे, तो इससे शिक्षा सुधार के प्रयासों की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।
अभिभावकों की बढ़ती चिंता
माता-पिता का कहना है कि बच्चों की किताबों में गलत जानकारी या अनावश्यक सामग्री छपना चिंता का विषय है।
अभिभावकों की प्रमुख मांगें हैं:
- सभी पुस्तकों की दोबारा जांच हो।
- त्रुटिपूर्ण पुस्तकों को बदला जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
भविष्य में क्या हो सकते हैं बदलाव?
इस विवाद के बाद राज्य सरकार पुस्तक प्रकाशन प्रक्रिया की समीक्षा कर सकती है।
संभावित कदमों में शामिल हो सकते हैं:
- बहु-स्तरीय प्रूफरीडिंग प्रणाली।
- विशेषज्ञ समिति द्वारा अंतिम परीक्षण।
- डिजिटल कंटेंट वेरिफिकेशन।
- पुस्तक छपाई से पहले सैंपल समीक्षा।
- जवाबदेही तय करने के लिए नई व्यवस्था।
कक्षा 5 की अंग्रेजी पुस्तक में ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ गीत के बोल छपने का मामला केवल एक प्रिंटिंग त्रुटि नहीं, बल्कि स्कूली शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। इससे पहले भी राज्य की नई पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में गलतियां सामने आ चुकी हैं, जिसके कारण पाठ्यपुस्तक निर्माण और समीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की शिक्षा से जुड़ी पुस्तकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। यह विवाद भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुधारने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर भी साबित हो सकता है।

लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं प्रीति भोसले, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि में पत्रकारिता करने के साथ ही समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से जुड़ी हुई हैं, प्रीति भोसले ….
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजीटल न्यूज एजेंसी है. इसका शुभारंभ 18 दिसंबर 2008 को किया गया था. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में देश विदेश, स्थानीय, व्यापार, स्वास्थ्य आदि की खबरों के साथ ही साथ धार्मिक, राशिफल, मौसम के अपडेट, पंचाग आदि का प्रसारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है. इसके वीडियो सेक्शन में भी खबरों का प्रसारण किया जाता है. यह पहली ऐसी डिजीटल न्यूज एजेंसी है, जिसका सर्वाधिकार असुरक्षित है, अर्थात आप इसमें प्रसारित सामग्री का उपयोग कर सकते हैं.
अगर आप समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को खबरें भेजना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 9425011234 या ईमेल samacharagency@gmail.com पर खबरें भेज सकते हैं. खबरें अगर प्रसारण योग्य होंगी तो उन्हें स्थान अवश्य दिया जाएगा.





