मानसून का कहर! काशी के 84 घाट डूबे, बिहार में 50 हजार प्रभावित; MP के 21 जिलों में भारी बारिश

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून की भारी बारिश ने जनजीवन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से जलभराव, बाढ़, भूस्खलन और सड़कें बाधित होने की खबरें सामने आ रही हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से काशी के सभी 84 घाट पानी में डूब गए हैं, जबकि बिहार में गंगा के उफान से 50 हजार से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी अगले दो दिनों के दौरान 21 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

बारिश का असर सिर्फ नदी किनारे के इलाकों तक सीमित नहीं है। वाराणसी के BHU अस्पताल परिसर में जलभराव, उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भूस्खलन, गुरुग्राम में सड़कों पर पानी और हिमाचल प्रदेश में सड़क पर पहाड़ का हिस्सा गिरने जैसी घटनाओं ने प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ा दी है।

काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, 84 घाट डूबे

वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर घाट क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। शहर के सभी 84 घाट पानी में डूब चुके हैं। घाटों की सीढ़ियां जलमग्न होने के साथ ही कई धार्मिक और पर्यटक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

गंगा का पानी लगातार ऊपर आने से अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और अन्य प्रमुख घाटों पर सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। नाव संचालन पर भी असर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों के आसपास कारोबार करने वाले दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मणिकर्णिका घाट पर पानी बढ़ने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ऊपरी हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती भी सामान्य स्थान के बजाय ऊंचे हिस्से में कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

घाटों के आसपास कारोबार पर भी असर

वाराणसी के घाट सिर्फ धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय कारोबारियों की रोजी-रोटी भी इनसे जुड़ी है। गंगा का पानी घाटों के निचले हिस्सों में पहुंचने से दुकानों और अन्य कारोबार पर असर पड़ा है।

घाट क्षेत्र में पानी बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही भी सामान्य नहीं रह गई है। गंगा में जलस्तर बढ़ने के साथ प्रशासन की निगरानी भी बढ़ाई गई है।

वाराणसी में गंगा के साथ वरुणा नदी के बढ़ते जलस्तर ने भी निचले इलाकों की चिंता बढ़ाई है। कुछ तटीय इलाकों में पानी भरने की स्थिति सामने आई है और प्रशासन ने राहत व्यवस्था को सक्रिय किया है।

BHU अस्पताल परिसर में घुटनों तक पानी

भारी बारिश और जलभराव का असर वाराणसी के BHU अस्पताल परिसर में भी दिखाई दिया। सामने आई तस्वीरों और रिपोर्टों में अस्पताल परिसर में पानी भरा हुआ नजर आया।

कई जगह जलभराव के बीच मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल जैसी आवश्यक सेवा वाली जगह पर पानी भरने से मरीजों की आवाजाही और इलाज के लिए आने-जाने वालों के सामने मुश्किलें बढ़ गईं।

यूपी के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

वाराणसी के अलावा उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा बढ़ाया है। रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश के 13 जिलों के 170 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में बताए गए हैं।

बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव जैसे जिलों में बाढ़ का असर दर्ज किया गया है।

नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

बिहार में गंगा उफान पर, 50 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

बिहार में भी गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। बेगूसराय में गंगा के खतरे के निशान से ऊपर बहने की जानकारी सामने आई है। नदी के आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से 50 हजार से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की खबर है।

भागलपुर के नवगछिया इलाके में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है। राघोपुर गांव के पास राघोपुर-नरकटिया तटबंध टूटने से आसपास के इलाकों में पानी फैल गया। इससे करीब 10 हजार लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

तटबंध टूटने के बाद स्थानीय लोगों के सामने सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बढ़ गई है।

MP के 21 जिलों में भारी बारिश की संभावना

मध्य प्रदेश में भी मानसून की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो दिनों के दौरान प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश हो सकती है।

भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है।

प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में बारिश का आंकड़ा अभी भी क्षेत्रवार अलग-अलग है। कुछ जिलों में औसत से कम तो कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर मार्ग पर लैंडस्लाइड

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बारिश के बीच धारचूला-गुंजी के पास कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भूस्खलन हुआ। पहाड़ से मलबा सड़क पर आने के कारण मार्ग बाधित हो गया।

सड़क बंद होने के बाद दोनों ओर यात्रियों और अन्य लोगों के फंसे होने की स्थिति सामने आई। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बना रहता है, इसलिए संवेदनशील मार्गों पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उत्तराखंड के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारों की संभावना भी जताई गई है।

गुरुग्राम में जलभराव, कैब की छत पर बैठकर काम करता दिखा युवक

हरियाणा के गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। सोहना रोड पर पानी जमा होने के बीच एक युवक का वीडियो सामने आया, जिसमें वह कैब की छत पर बैठकर लैपटॉप से काम करता दिखाई दिया

यह दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। हालांकि यह घटना गुरुग्राम में जलभराव की गंभीर स्थिति को भी दिखाती है, जहां सड़कों पर पानी भरने से वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हुई।

IFFCO चौक पर धंसी सड़क

गुरुग्राम के IFFCO चौक पर सड़क धंसने से बड़ा गड्ढा बनने की जानकारी सामने आई है। बारिश और जलभराव के बीच सड़क क्षतिग्रस्त होने से यातायात प्रभावित हुआ।

सड़क धंसने की घटनाएं भारी बारिश के दौरान शहर के ड्रेनेज सिस्टम और सड़क की स्थिति पर भी सवाल खड़े करती हैं। ऐसे स्थानों पर दुर्घटना रोकने के लिए तत्काल बैरिकेडिंग और यातायात नियंत्रण जरूरी हो जाता है।

हिमाचल प्रदेश में सड़क पर गिरा पहाड़

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भी बारिश के बीच भूस्खलन की घटना सामने आई। कोडला-उरई-घरोड़ सड़क पर पहाड़ का बड़ा हिस्सा गिरने से मार्ग बाधित हो गया।

मलबा सड़क पर आने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान ऐसी घटनाएं आम तौर पर जोखिम बढ़ाती हैं, इसलिए यात्रियों को मौसम और स्थानीय प्रशासन की सलाह के अनुसार ही सफर करने की जरूरत है।

बारिश से कई राज्यों में अलग-अलग चुनौतियां

इस मानसून में अलग-अलग राज्यों में बारिश का असर अलग रूप में दिखाई दे रहा है। वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाटों और धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। बिहार में नदी का पानी आबादी वाले इलाकों की ओर फैल रहा है। मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना के बीच प्रशासन को अलर्ट रहने की जरूरत है।

वहीं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन के कारण पहाड़ी मार्ग बाधित हुए हैं। गुरुग्राम जैसे शहरी इलाकों में जलभराव ने ड्रेनेज और सड़क व्यवस्था की चुनौती सामने रखी है।

प्रशासन और लोगों के लिए चुनौती

नदियों का जलस्तर बढ़ने और लगातार बारिश की संभावना के बीच निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सावधानी जरूरी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए और नदी, नाले या जलभराव वाले स्थानों के बेहद करीब जाने से बचना चाहिए।

पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए यात्रियों को संवेदनशील मार्गों पर जाने से पहले स्थानीय स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।

आगे कैसा रहेगा मौसम?

मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के अनुसार देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर अभी जारी रह सकता है। मध्य प्रदेश में अगले दो दिनों के दौरान कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि उत्तराखंड में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

ऐसे में अगले कुछ दिनों तक नदियों के जलस्तर, शहरी जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन पर नजर रखना जरूरी होगा।

मानसून की भारी बारिश ने उत्तर प्रदेश से बिहार और मध्य प्रदेश से लेकर उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित किया है। काशी के 84 घाटों का डूबना गंगा के बढ़ते जलस्तर की गंभीरता दिखाता है, जबकि बिहार में 50 हजार से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की खबर बाढ़ की चुनौती को सामने रखती है।

मध्य प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश की संभावना और पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम तेजी से बदल रहा है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा एडवाइजरी को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।