नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेज बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली में इस साल अब तक 2,300 से ज्यादा इन्फ्लुएंजा-A के मामले सामने आए हैं, जिनमें 1,777 से अधिक H1N1 संक्रमण शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में 114 नए H1N1 मामले भी दर्ज किए गए।
मामलों में वृद्धि के बीच दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से श्वसन संबंधी स्वच्छता का ध्यान रखने, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। विशेषज्ञों ने खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।
दिल्ली में H1N1 के मामले तेजी से क्यों बढ़े?
दिल्ली में इस साल मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 अगस्त तक दिल्ली में कुल 2,602 मौसमी इन्फ्लुएंजा मामले दर्ज किए गए थे। इनमें 2,392 मामले Influenza-A और 210 मामले Influenza-B के थे। Influenza-A मामलों में H1N1 प्रमुख वायरस रहा और इसके 1,777 मामले सामने आए।
पिछले साल इसी अवधि में H1N1 के मामलों की संख्या 229 थी। यानी इस साल संक्रमण में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा बढ़ोतरी का मतलब किसी नए या ज्यादा खतरनाक H1N1 स्ट्रेन का सामने आना नहीं है।
ICMR ने कहा- नए H1N1 स्ट्रेन की वजह से नहीं बढ़े केस
H1N1 मामलों में अचानक हुई वृद्धि के बाद लोगों में नए वायरस या नए स्ट्रेन को लेकर चिंता बढ़ी थी। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि भारत में इस समय फैल रहे H1N1 वायरस को किसी नए स्ट्रेन के रूप में नहीं देखा जा रहा है।
ICMR के अनुसार मौजूदा वायरस पहले से प्रचलित A(H1N1)pdm09 समूह से संबंधित हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि वर्तमान में प्रसारित इन्फ्लुएंजा वायरस वैक्सीन के लिए अनुशंसित स्ट्रेन से मेल खाते हैं। इसलिए मामलों में वृद्धि को लेकर घबराने के बजाय सावधानी और संक्रमण नियंत्रण पर ध्यान देने की जरूरत है।
बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा सावधानी
विशेषज्ञों के मुताबिक H1N1 संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ समूहों में जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।
इनमें खास तौर पर:
- छोटे बच्चे
- बुजुर्ग
- गर्भवती महिलाएं
- लंबे समय से किसी बीमारी से पीड़ित लोग
- कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति
शामिल हैं।
इन समूहों में फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
H1N1 के सामान्य लक्षण क्या हैं?
H1N1 और अन्य इन्फ्लुएंजा संक्रमणों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। सामान्य तौर पर इनमें शामिल हैं:
- बुखार
- खांसी
- गले में खराश
- सिरदर्द
- शरीर में दर्द
- ठंड लगना
- अत्यधिक थकान
- नाक बहना
- नाक बंद होना
कुछ बच्चों में मतली, उल्टी या दस्त जैसी शिकायत भी हो सकती है।
हालांकि, इन लक्षणों के आधार पर अकेले H1N1 की पुष्टि नहीं की जा सकती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।
हर बुखार H1N1 नहीं होता
H1N1 के मामलों में वृद्धि के बीच सामान्य वायरल बुखार या दूसरी श्वसन संबंधी बीमारियों को भी स्वाइन फ्लू समझ लेना सही नहीं है। H1N1 और COVID-19 समेत कई श्वसन संक्रमणों के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं।
इसलिए सिर्फ बुखार, खांसी या शरीर में दर्द होने के आधार पर स्वयं बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
कब H1N1 मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए?
ज्यादातर मौसमी फ्लू के मरीज उचित आराम और चिकित्सकीय सलाह के साथ ठीक हो सकते हैं। लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर हो सकता है।
खास तौर पर अगर मरीज को:
- सांस लेने में परेशानी हो,
- सीने में लगातार दर्द हो,
- ऑक्सीजन का स्तर कम हो,
- अत्यधिक कमजोरी महसूस हो,
- भ्रम या असामान्य व्यवहार दिखाई दे,
- होंठ या त्वचा का रंग नीला पड़ने लगे,
- हालत तेजी से बिगड़ रही हो,
तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों में लक्षण बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
H1N1 की जांच कहां होती है?
दिल्ली-NCR में इन्फ्लुएंजा और H1N1 की जांच कई अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में उपलब्ध है। जांच का प्रकार और उसकी कीमत संस्थान के अनुसार अलग हो सकती है।
सिर्फ जांच कराने के लिए खुद से कोई टेस्ट चुनने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि हर फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्ति को एक जैसी जांच की जरूरत नहीं होती।
H1N1 वैक्सीन को लेकर बढ़ी दिलचस्पी
दिल्ली में मामलों में वृद्धि के बाद मौसमी इन्फ्लुएंजा वैक्सीन को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार हाई-रिस्क समूहों और बच्चों या बुजुर्गों वाले परिवारों में टीकाकरण को लेकर जानकारी लेने वालों की संख्या बढ़ी है।
हालांकि, वैक्सीन लगवाने का निर्णय व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। वैक्सीन के बावजूद संक्रमण का जोखिम पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं होती, लेकिन यह गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
H1N1 से बचने के लिए क्या करें?
संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ सावधानियां बेहद महत्वपूर्ण हैं।
1. हाथ साफ रखें:
साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं। बाहर से आने के बाद और खाने से पहले हाथों की सफाई पर विशेष ध्यान दें।
2. खांसते-छींकते समय मुंह ढकें:
टिश्यू या कोहनी का इस्तेमाल करें और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत उचित तरीके से फेंकें।
3. भीड़ में सावधानी बरतें:
फ्लू के मामले बढ़ने के दौरान भीड़भाड़ वाली जगहों पर अतिरिक्त सावधानी रखें। जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।
4. बीमार होने पर घर पर रहें:
फ्लू जैसे लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय या भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। इससे संक्रमण दूसरों तक फैलने का खतरा कम होगा।
5. कमरे में वेंटिलेशन रखें:
घर और कार्यालय में हवा के उचित आवागमन का ध्यान रखें।
6. बिना सलाह दवा न लें:
विशेष रूप से बच्चों और हाई-रिस्क मरीजों को स्वयं दवा देने से बचें और डॉक्टर की सलाह लें।
बच्चों को लेकर स्कूलों में भी बढ़ी चिंता
H1N1 और अन्य मौसमी संक्रमणों के बढ़ते मामलों के बीच स्कूलों में भी सतर्कता जरूरी हो गई है। अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि यदि बच्चे को बुखार, खांसी, सर्दी या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसे स्कूल भेजने से बचें।
बीमार बच्चे को सिर्फ उपस्थिति बनाए रखने के लिए स्कूल भेजने से उसकी हालत बिगड़ सकती है और अन्य बच्चों में संक्रमण फैलने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
स्कूलों में हाथ धोने, साफ-सफाई, कक्षाओं के वेंटिलेशन और संक्रमण के लक्षणों के प्रति जागरूकता पर जोर देना महत्वपूर्ण है।
क्या H1N1 से घबराने की जरूरत है?
मामलों में तेज वृद्धि निश्चित रूप से निगरानी और सावधानी की मांग करती है, लेकिन विशेषज्ञों ने नए H1N1 स्ट्रेन को लेकर किसी तरह की पुष्टि नहीं की है। ICMR के अनुसार वर्तमान में प्रसारित H1N1 वायरस पहले से ज्ञात pdm09 समूह से संबंधित हैं।
इसलिए लोगों को घबराने के बजाय संक्रमण से बचाव के उपायों पर ध्यान देना चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में लक्षण दिखाई देने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।
दिल्ली में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ी
मामलों में वृद्धि के बाद दिल्ली में स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और तैयारी पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्र और दिल्ली के स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा की है और अस्पतालों को निगरानी, जांच तथा उपचार की तैयारी मजबूत रखने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से श्वसन संबंधी स्वच्छता का पालन करने, भीड़भाड़ से बचने और फ्लू के लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।
दिल्ली-NCR में H1N1 मामलों में इस साल तेज वृद्धि दर्ज की गई है। 1,777 से ज्यादा H1N1 संक्रमण और 2,300 से ज्यादा Influenza-A मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।
हालांकि, ICMR के मुताबिक मौजूदा स्थिति किसी नए H1N1 स्ट्रेन के कारण नहीं है। ऐसे में घबराने की बजाय स्वच्छता, भीड़ में सावधानी, बीमार होने पर घर पर आराम और हाई-रिस्क लोगों में समय पर चिकित्सकीय सलाह सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। H1N1 के लक्षण होने पर, खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या पहले से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में, डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें। स्वयं से दवा या एंटीवायरल शुरू न करें।

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