(आशीष कौशल)
नागपुर (साई)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने विभाजन के बाद भारत आए लोगों को शरणार्थी नहीं बल्कि संघर्ष के योद्धा बताया। उन्होंने कहा कि वे अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम में बहुत कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने अपनी संपत्ति और व्यवसाय छोड़ दिए और भारत आने का फैसला किया। यह एक महत्वपूर्ण बयान है जो देश की एकता और अखंडता को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि इसका उद्देश्य अच्छे इंसान बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि प्रयास करना चाहिए और आगे बढ़ने का रास्ता ढूंढना चाहिए।
विभाजन के बाद की कहानी
मोहन भागवत ने कहा कि विभाजन के बाद भारत आए लोगों ने बहुत कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने अपनी संपत्ति और व्यवसाय छोड़ दिए और एक नए देश में बसने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ा बलिदान था जो उन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम में दिया। उन्होंने अपने परिवार और समुदाय के लिए भी बहुत कुछ किया।
शिक्षा का महत्व
मोहन भागवत ने शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य अच्छे इंसान बनाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से हमें ज्ञान और समझ मिलती है जो हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के साथ-साथ हमें अपने मूल्यों और संस्कृति को भी महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश और समुदाय के प्रति भी जिम्मेदारी महसूस करनी चाहिए।
मोहन भागवत के बयान का महत्व
मोहन भागवत के बयान का बहुत महत्व है। उन्होंने विभाजन के बाद भारत आए लोगों को शरणार्थी नहीं बल्कि संघर्ष के योद्धा बताया। यह एक महत्वपूर्ण बयान है जो देश की एकता और अखंडता को दर्शाता है।
उनके बयान से हमें यह भी समझ मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि प्रयास करना चाहिए और आगे बढ़ने का रास्ता ढूंढना चाहिए। भारतीय राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
- मोहन भागवत ने विभाजन के बाद भारत आए लोगों को शरणार्थी नहीं बल्कि संघर्ष के योद्धा बताया।
- उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इसका उद्देश्य अच्छे इंसान बनाना है।
- उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि प्रयास करना चाहिए और आगे बढ़ने का रास्ता ढूंढना चाहिए।
निष्कर्ष
मोहन भागवत के बयान से हमें यह समझ मिलती है कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा।
हमें अपने मूल्यों और संस्कृति को भी महत्व देना चाहिए और अपने देश और समुदाय के प्रति जिम्मेदारी महसूस करनी चाहिए। भारतीय समाचार में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के बयान का बहुत महत्व है।

आशीष कौशल का नाम महाराष्ट्र के विदर्भ में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय आशीष कौशल वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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