(ब्यूरो कार्यालय)
नई दिल्ली (साई)। नई दिल्ली में 2 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट ने भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की 122वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष भजन संध्या का आयोजन किया। इस समारोह की अध्यक्षता ट्रस्टी अनिल शास्त्री ने की और प्रमुख अतिथि के रूप में भजन सम्राट अनूप जलोटा ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शास्त्री जी के सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्रसेवा को स्मरण कर जनजागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा
भजन संध्या से पहले लाल बहादुर शास्त्री स्माइल फाउंडेशन ने 100 से अधिक लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर चलाया, जिसमें रक्तचाप, शुगर और दृष्टि परीक्षण शामिल थे। इसके बाद स्मारक में शास्त्री जी की जीवन यात्रा को दर्शाती फोटो प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें उनके शुरुआती दिनों से लेकर प्रधानमंत्री पद तक की प्रमुख घटनाएँ प्रदर्शित थीं। शाम को अनूप जलोटा ने ‘ओ मेरे प्रभु’ और ‘श्री राम जी की बांसुरी’ जैसे लोकप्रिय भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिससे उपस्थित दर्शकों में आध्यात्मिक उमंग का संचार हुआ।
सांस्कृतिक और सामाजिक पहल
समारोह के मुख्य आकर्षण में से एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी संजीव चोपड़ा द्वारा लिखित ‘जय जवान जय किसान’ पुस्तक का विमोचन था। पुस्तक में शास्त्री जी के कृषि और रक्षा नीतियों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, जो वर्तमान नीति निर्माताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकती है। इस अवसर पर ट्रस्टी अनिल शास्त्री ने कहा कि शास्त्री जी के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है और ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकता व राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ करते हैं।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: लाल बहादुर शास्त्री नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट
• आयोजन: 122वीं जयंती भजन संध्या, स्वास्थ्य शिविर, फोटो प्रदर्शनी, पुस्तक विमोचन
• स्थान: लाल बहादुर शास्त्री स्मारक, नई दिल्ली
• मुख्य उद्देश्य: शास्त्री जी के आदर्शों को स्मरण, जनजागरूकता, स्वास्थ्य सेवा
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: स्वास्थ्य जांच का नियमित आयोजन, शास्त्री जी की विचारधारा पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम
• लक्ष्य: युवा वर्ग में राष्ट्रीय भावना का संवर्धन, सामाजिक कल्याण में योगदान
भजन संध्या, स्वास्थ्य शिविर और पुस्तक विमोचन ने शास्त्री जी की विरासत को जीवंत किया और जनता को उनके सिद्धांतों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया। भविष्य में नियमित रूप से ऐसे सांस्कृतिक‑सामाजिक कार्यक्रमों को जारी रखकर राष्ट्रीय एकता, स्वास्थ्य जागरूकता और युवा प्रेरणा को सुदृढ़ किया जा सकता है, जिससे भारत की प्रगति में नई ऊर्जा का संचार होगा।