कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने किया INDIANPSU डायरी एवं डायरेक्टरी–2026 का विमोचन, PSU सेक्टर के लिए बताया महत्वपूर्ण पहल

कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने नई दिल्ली में INDIANPSU डायरी एवं डायरेक्टरी–2026 का औपचारिक विमोचन किया। इस प्रकाशन को भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, एमएसएमई और विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज बताया गया। डायरेक्टरी का उद्देश्य पीएसयू सेक्टर से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी को एक मंच पर उपलब्ध कराना है। डिजिटल संस्करण भी जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।

(वाय.के. पाण्डे)

नई दिल्ली (साई)।नई दिल्ली में गुरुवार 21 मई 2026 को आयोजित एक सादे लेकिन महत्वपूर्ण समारोह में कोयला एवं खान राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey ने INDIANPSU डायरी एवं डायरेक्टरी–2026 का औपचारिक विमोचन किया। इस अवसर पर सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से जुड़े विभिन्न प्रतिनिधि, मीडिया क्षेत्र के विशेषज्ञ और उद्योग जगत के लोग उपस्थित रहे।

समारोह में Vivek Awasthi, जो indianpsu.com के एडिटर-इन-चीफ और व्हाइट डॉल्फिन मीडिया के संस्थापक हैं, भी मौजूद रहे। इस दौरान मंत्री ने इस प्रकाशन की सराहना करते हुए इसे भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र यानी पीएसयू इकोसिस्टम के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक दस्तावेज बताया।

पीएसयू सेक्टर को संगठित जानकारी देने की पहल

INDIANPSU डायरी एवं डायरेक्टरी–2026 को सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से संबंधित विस्तृत और अद्यतन जानकारी के एक समग्र संग्रह के रूप में तैयार किया गया है। इसमें विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय पीएसयू, उनसे जुड़े प्रशासनिक ढांचे, कॉर्पोरेट जानकारी, संपर्क विवरण, नीतिगत पहल और औद्योगिक डेटा को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में एक विश्वसनीय और समेकित डायरेक्टरी की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह प्रकाशन केवल एक डायरेक्टरी नहीं, बल्कि पीएसयू सेक्टर से जुड़े विभिन्न हितधारकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक साबित होगा।

मंत्री ने क्या कहा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस प्रकाशन में प्रस्तुत आंकड़ों और सूचनाओं का अवलोकन किया है, जो काफी विस्तृत और व्यवस्थित हैं।

उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन:

  • सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के अधिकारियों के लिए उपयोगी होगा
  • एमएसएमई सेक्टर को पीएसयू से जुड़ने में मदद करेगा
  • पीएसयू विक्रेताओं और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोगों के लिए मार्गदर्शक बनेगा
  • विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए एक “रेडी रेकनर” की तरह काम करेगा

मंत्री ने यह भी कहा कि देश में सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में सूचना आधारित प्रकाशनों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

पीएसयू सेक्टर क्यों है महत्वपूर्ण

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों का योगदान ऊर्जा, खनन, पेट्रोलियम, परिवहन, रक्षा, इस्पात, बैंकिंग और दूरसंचार जैसे कई रणनीतिक क्षेत्रों में है। केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत अनेक पीएसयू देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • पीएसयू देश के लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं
  • बुनियादी ढांचे के विकास में इनकी बड़ी भूमिका है
  • सामाजिक जिम्मेदारी और सीएसआर गतिविधियों में भी पीएसयू अग्रणी रहते हैं
  • रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में इनका योगदान महत्वपूर्ण है

ऐसे में पीएसयू से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी को एक मंच पर लाना उद्योग और प्रशासन दोनों के लिए लाभकारी माना जा रहा है।

डायरेक्टरी में क्या-क्या शामिल

INDIANPSU डायरी एवं डायरेक्टरी–2026 में विभिन्न प्रकार की उपयोगी जानकारियां शामिल की गई हैं। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से जुड़ी संस्थागत जानकारी के साथ-साथ प्रशासनिक और व्यावसायिक डेटा को भी स्थान दिया गया है।

इस प्रकाशन में शामिल प्रमुख बिंदु:

प्रमुख जानकारी

  • केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय पीएसयू का विवरण
  • संपर्क और प्रशासनिक जानकारी
  • उद्योग क्षेत्रवार वर्गीकरण
  • कॉर्पोरेट और नीतिगत अपडेट
  • पीएसयू से जुड़े अवसरों की जानकारी
  • संबंधित विभागों और मंत्रालयों का संदर्भ

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी

यह डायरेक्टरी केवल कॉर्पोरेट या प्रशासनिक उपयोग तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देश में बड़ी संख्या में छात्र पीएसयू सेक्टर, सार्वजनिक नीति और कॉर्पोरेट प्रशासन जैसे विषयों पर अध्ययन करते हैं। ऐसे में उन्हें एक विश्वसनीय और अद्यतन स्रोत की आवश्यकता होती है। इस डायरेक्टरी के माध्यम से उन्हें संरचित और व्यवस्थित जानकारी मिल सकेगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रकाशन:

  • शोध कार्यों में मदद करेगा
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी होगा
  • कॉर्पोरेट गवर्नेंस की समझ विकसित करेगा
  • उद्योग और प्रशासन के बीच संबंधों को समझने में सहायक होगा

डिजिटल संस्करण भी होगा उपलब्ध

कार्यक्रम में यह जानकारी भी दी गई कि डायरी एवं डायरेक्टरी का डिजिटल संस्करण भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसे समय-समय पर अपडेट किया जाएगा ताकि नई जानकारी और बदलावों को शामिल किया जा सके।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता से:

  • अधिक लोगों तक पहुंच आसान होगी
  • जानकारी तेजी से अपडेट की जा सकेगी
  • विभिन्न राज्यों और संस्थानों के उपयोगकर्ताओं को सुविधा मिलेगी
  • डेटा एक्सेस और संदर्भ कार्य अधिक सरल होगा

डिजिटलाइजेशन के दौर में इस प्रकार के प्रकाशनों का ऑनलाइन उपलब्ध होना सूचना के लोकतंत्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बिक्री के लिए नहीं होगी उपलब्ध

इस प्रकाशन को व्यावसायिक बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इसे विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, संबंधित विभागों, उद्योग संगठनों और हितधारकों के बीच निःशुल्क वितरित किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अधिकाधिक संस्थानों और लोगों तक यह जानकारी पहुंच सकेगी। सरकारी और कॉर्पोरेट नेटवर्किंग को भी इससे मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लिखी भूमिका

इस डायरेक्टरी की विशेषता यह भी है कि इसकी भूमिका केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri द्वारा लिखी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी प्रकाशन की भूमिका यदि वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री द्वारा लिखी जाती है तो उससे उसकी विश्वसनीयता और महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि पीएसयू सेक्टर को लेकर सरकार गंभीरता से सूचना प्रबंधन और जागरूकता पर ध्यान दे रही है।

मीडिया और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन की बदलती भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में कॉर्पोरेट और सरकारी क्षेत्रों में सूचना प्रबंधन और मीडिया कम्युनिकेशन का महत्व तेजी से बढ़ा है। डिजिटल मीडिया के विस्तार के साथ-साथ डेटा आधारित और तथ्यात्मक प्रकाशनों की मांग भी बढ़ी है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • संस्थागत पारदर्शिता बढ़ाने में ऐसे प्रकाशन मददगार हैं
  • उद्योग जगत और सरकार के बीच संवाद मजबूत होता है
  • सार्वजनिक क्षेत्र की उपलब्धियों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है
  • नीति निर्माण और कॉर्पोरेट रणनीति में डेटा की भूमिका बढ़ी है

ऐसे समय में INDIANPSU डायरी एवं डायरेक्टरी–2026 जैसे प्रकाशन को एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

व्हाइट डॉल्फिन मीडिया की भूमिका

व्हाइट डॉल्फिन मीडिया एक मीडिया एवं संचार परामर्श संस्था है, जिसकी स्थापना वरिष्ठ पत्रकार विवेक अवस्थी ने की थी। संस्था सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, नीति, शासन और कॉर्पोरेट मामलों से जुड़े विषयों पर केंद्रित कार्य करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पीएसयू सेक्टर को समर्पित विशेष मीडिया प्लेटफॉर्म अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में इस क्षेत्र पर केंद्रित सूचनात्मक और विश्लेषणात्मक सामग्री उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है।

संस्था द्वारा तैयार यह डायरेक्टरी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थागत जानकारी को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास मानी जा रही है।

भविष्य में और बढ़ सकता है दायरा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस प्रकार की डायरेक्टरी का दायरा और बढ़ सकता है। इसमें डिजिटल डेटा, क्षेत्रवार विश्लेषण, निवेश संबंधी जानकारी और उद्योग रिपोर्ट जैसे नए आयाम जोड़े जा सकते हैं।

यदि इसे नियमित रूप से अपडेट किया जाता है तो यह पीएसयू सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए दीर्घकालिक संदर्भ स्रोत बन सकती है।

संभावित भविष्य उपयोग:

  • नीति विश्लेषण
  • उद्योग अध्ययन
  • सरकारी परियोजनाओं की ट्रैकिंग
  • कॉर्पोरेट साझेदारी
  • निवेश और औद्योगिक शोध

नई दिल्ली में INDIANPSU डायरी एवं डायरेक्टरी–2026 का विमोचन सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से जुड़ी सूचनाओं को व्यवस्थित और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा इसकी सराहना और वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की भूमिका इस प्रकाशन के महत्व को और अधिक मजबूत बनाती है।

यह पहल न केवल पीएसयू सेक्टर, एमएसएमई और उद्योग जगत के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, बल्कि विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नीति विश्लेषकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज के रूप में उभर सकती है। डिजिटल और अद्यतन स्वरूप में उपलब्धता इसे भविष्य के लिए और अधिक प्रासंगिक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।