सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में तेजी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा— निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा से न हो समझौता

मध्यप्रदेश में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने उज्जैन में 778 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे नवीन घाटों और 919.94 करोड़ रुपए की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

उज्जैन में सिंहस्थ के लिए चल रहे विकास कार्यों का किया गया निरीक्षण

(एस.के. शर्मा)

उज्जैन (साई)। मध्यप्रदेश में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां लगातार गति पकड़ रही हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा उज्जैन में आधारभूत संरचना, घाट निर्माण, यातायात सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक विकास कार्य किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में शनिवार 20 जून 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने उज्जैन के शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में पहुंचकर सिंहस्थ 2028 के लिए निर्माणाधीन नवीन घाटों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को निर्माण की गुणवत्ता तथा तय समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक प्रदर्शन है। इसलिए तैयारियों में किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा।

778 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे हैं 29.15 किलोमीटर लंबे नवीन घाट

सिंहस्थ 2028 में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उज्जैन में लगभग 778 करोड़ रुपए की लागत से 29.15 किलोमीटर लंबे नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। बताया गया कि घाट निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई हिस्सों में कार्य पूर्ण भी हो चुका है।

अब तक की प्रगति के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं—

  • नवीन घाट की कुल लंबाई: 29.15किलोमीटर
  • कुल अनुमानित लागत: 778करोड़ रुपए
  • श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए चिन्हित स्थान: 150से अधिक
  • निर्मित रिटेनिंग वॉल की लंबाई: 18.20किलोमीटर
  • पूर्ण हो चुका घाट निर्माण: लगभग7किलोमीटर

शेष घाटों का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर प्रगति पर है ताकि सिंहस्थ शुरू होने से पहले सभी सुविधाएं पूरी तरह तैयार की जा सकें।

प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप भव्य और दिव्य सिंहस्थ की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार सिंहस्थ 2028 को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ सनातन संस्कृति की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण का श्रेष्ठ अनुभव प्राप्त हो।

इसके लिए घाटों का विस्तार, बेहतर आवागमन व्यवस्था, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल, नगरीय आवास एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में पौधरोपण भी किया।

इस दौरान नीम, रुद्राक्ष और पीपल जैसे पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधे लगाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान उसके विशाल वन क्षेत्र और प्राकृतिक संपदा से है तथा सरकार का प्रयास है कि प्रदेश हरियाली से आच्छादित बना रहे।

कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना का किया निरीक्षण, टनल में उतरकर परखी गुणवत्ता

सिंहस्थ की तैयारियों के साथ-साथ शिप्रा नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए संचालित कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का स्थल पर निरीक्षण किया। उन्होंने टनल में उतरकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।

चिंतामन जवासिया गांव के समीप स्थित शाफ्ट नंबर-2 पर फेज-3 के कार्यों की जानकारी अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की गई। परियोजना की तकनीकी चुनौतियों और भविष्य की उपयोगिता पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

क्या है कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना और क्यों है महत्वपूर्ण

कान्ह नदी से आने वाले दूषित जल को शिप्रा नदी के प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों में मिलने से रोकने के लिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की गई है।

इस योजना के अंतर्गत कान्ह नदी पर ग्राम जमालपुरा, तहसील उज्जैन में बैराज का निर्माण किया जा रहा है। यहां से दूषित जल को बंद पाइप लाइन प्रणाली के माध्यम से लगभग 30.15 किलोमीटर दूर गंभीर बांध के डाउन स्ट्रीम तक पहुंचाया जाएगा।

इससे शिप्रा नदी के जल की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी, जो सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

919.94 करोड़ रुपए की परियोजना, 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार डिजाइन

कान्ह डायवर्शन परियोजना आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुरूप विकसित की जा रही है। इसकी कुल लागत 919.94 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं—

  • कुल लंबाई: 30.15किलोमीटर
  • कट एंड कवर डक्ट: 18.15किलोमीटर
  • टनल की लंबाई: 12किलोमीटर
  • कुल निर्माण लागत: 919.94करोड़ रुपए
  • दूषित जल निकासी क्षमता: 40क्यूसेक तक
  • भविष्य की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लगभग 25वर्षों की आवश्यकता के अनुसार डिजाइन

परियोजना के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था निर्माण पूरा होने के बाद आगामी 15 वर्षों तक सुनिश्चित की गई है।

निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति क्या है

अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार परियोजना के कई महत्वपूर्ण चरण पूरे किए जा चुके हैं।

वर्तमान प्रगति के अनुसार—

  • हेड रेगुलेटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
  • बैराज निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  • 18.15 किलोमीटर कट एंड कवर भाग में से 4.50 किलोमीटर में प्री-कास्ट सेगमेंट बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है।
  • लगभग 10.30 किलोमीटर लंबाई के लिए आवश्यक प्री-कास्ट सेगमेंट तैयार किए जा चुके हैं।
  • टनल निर्माण के लिए चारों शाफ्ट तैयार हो चुके हैं।
  • 12 किलोमीटर लंबी टनल में से लगभग 8.15 किलोमीटर खुदाई का कार्य पूरा किया जा चुका है।

अधिकारियों का कहना है कि शेष कार्य निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने परियोजनाओं से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस अवसर पर महापौर, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति और आगामी कार्य योजना पर चर्चा की।

सिंहस्थ 2028 से क्षेत्रीय विकास और अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

सिंहस्थ केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है। इस आयोजन से पर्यटन, व्यापार, स्थानीय रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को नई गति मिलने की संभावना रहती है।

बेहतर घाट, स्वच्छ नदी, सुगम यातायात व्यवस्था और आधुनिक सुविधाएं न केवल श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाएंगी बल्कि उज्जैन के दीर्घकालिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए समय से पहले गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना का निर्माण शहर के भविष्य के विकास की मजबूत नींव तैयार करता है।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। 778 करोड़ रुपए के नवीन घाट निर्माण और 919.94 करोड़ रुपए की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना जैसे बड़े कार्य उज्जैन को एक स्वच्छ, व्यवस्थित और आधुनिक धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर दिया गया जोर यह दर्शाता है कि सिंहस्थ 2028 को भव्य, दिव्य और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है।