(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। डिजिटल युग में बढ़ती ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया हैकिंग और साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच सिवनी पुलिस ने नागरिकों को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश भोपाल के निर्देशानुसार जिले में ‘SAFE CLICK 2.0’ (वर्ष 2026) अभियान के तहत व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अभियान का उद्देश्य केवल साइबर अपराधों के प्रति लोगों को सतर्क करना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया में सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। अभियान के दौरान पुलिस ने रचनात्मक तरीकों से लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया, जिसमें संवाद, प्रशिक्षण और नुक्कड़ नाटक प्रमुख आकर्षण रहे।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चला विशेष अभियान
साइबर अपराधों के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा राज्यभर में ‘SAFE CLICK 2.0’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सिवनी जिले में पुलिस अधीक्षक कृष्णलाल चंदानी के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा और एसडीओपी सचिन परते के मार्गदर्शन में थाना अजाक की टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों का जागरूक होना भी उतना ही आवश्यक है।
संवाद और प्रशिक्षण के जरिए लोगों को किया जागरूक
अभियान के तहत 29 और 30 जून 2026 को थाना अजाक की टीम ने विभिन्न स्थानों पर जाकर लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया।
थाना प्रभारी अजाक निरीक्षक अनंती मर्सकोले और प्रधान आरक्षक परवेज सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक, बरघाट नाका और वार्ड क्रमांक-18 जनता नगर, ग्राम डोरली छतरपुर में नागरिकों, चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के साथ जागरूकता सत्र आयोजित किए।
इन कार्यक्रमों में लोगों को बताया गया कि—
- अनजान नंबरों से आने वाली कॉल पर सतर्क रहें।
- किसी भी व्यक्ति को ओटीपी साझा न करें।
- बैंक खाते की जानकारी फोन पर न दें।
- फर्जी लिंक और संदिग्ध वेबसाइट से दूर रहें।
- सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों को साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
नुक्कड़ नाटक बना जागरूकता का प्रभावी माध्यम
अभियान का सबसे आकर्षक और प्रभावशाली हिस्सा नुक्कड़ नाटक रहा।
डी.पी. चतुर्वेदी स्कूल, ड्रीमलैंड सिटी के विद्यार्थियों ने शुक्रवारी चौक और कचहरी चौक में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से साइबर अपराधों के खतरों को जीवंत तरीके से प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों ने अभिनय के जरिए लोगों को बताया कि किस प्रकार साइबर अपराधी—
- ओटीपी फ्रॉड,
- फिशिंग लिंक,
- केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी,
- सोशल मीडिया हैकिंग,
- डिजिटल अरेस्ट,
- फर्जी निवेश योजनाओं
के माध्यम से लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
नुक्कड़ नाटक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
क्यों बढ़ रहे हैं साइबर अपराध?
विशेषज्ञों के अनुसार देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट उपयोग के कारण साइबर अपराधों में भी तेजी आई है।
पिछले कुछ वर्षों में—
- ऑनलाइन बैंकिंग,
- यूपीआई भुगतान,
- डिजिटल वॉलेट,
- सोशल मीडिया,
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म
का उपयोग बढ़ा है। इसी के साथ साइबर अपराधियों ने भी नए-नए तरीके विकसित कर लिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक जितनी सुविधाजनक होती जा रही है, उसके दुरुपयोग की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ रही हैं।
डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल बने बड़ी चुनौती
पुलिस अधिकारियों ने कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों के प्रति लोगों को जागरूक किया।
हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं और उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि—
- कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
- किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन पर पैसे जमा कराने के निर्देश नहीं दिए जाते।
- ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
पुलिस ने दिए साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण टिप्स
निरीक्षक अनंती मर्सकोले ने नागरिकों को साइबर सुरक्षित रहने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
साइबर सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- ओटीपी, पासवर्ड और बैंक विवरण साझा न करें।
- मोबाइल में केवल विश्वसनीय एप्लिकेशन डाउनलोड करें।
- सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सार्वजनिक न करें।
- ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों से सावधान रहें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
ठगी होने पर घबराएं नहीं, तुरंत करें यह काम
सिवनी पुलिस ने लोगों को बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
तुरंत उठाएं ये कदम
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर : 1930
ऑनलाइन शिकायत : NCRPपोर्टल पर दर्ज करें।
पुलिस का कहना है कि साइबर धोखाधड़ी की शिकायत जितनी जल्दी दर्ज कराई जाती है, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
नागरिकों ने ली साइबर सुरक्षा की शपथ
कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, चिकित्सा कर्मियों और सामाजिक प्रतिनिधियों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई।
सभी ने संकल्प लिया कि—
- स्वयं साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे।
- अपने परिवार और मित्रों को जागरूक करेंगे।
- ऑनलाइन ठगी से बचने के उपायों का प्रचार करेंगे।
- संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देंगे।
समाज के लिए क्यों जरूरी हैं ऐसे अभियान?
डिजिटल दुनिया में आज लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में इंटरनेट से जुड़ा हुआ है। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- जागरूक नागरिक ही साइबर अपराधों को रोक सकते हैं।
- स्कूल और कॉलेज स्तर पर साइबर शिक्षा आवश्यक है।
- डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की जरूरत है।
- पुलिस और समाज के बीच सहयोग साइबर अपराध नियंत्रण की कुंजी है।
भविष्य में और बढ़ेगी जागरूकता की जरूरत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी बदल रहे हैं।
आने वाले समय में—
- डीपफेक,
- फर्जी निवेश ऐप,
- एआई आधारित ठगी,
- डिजिटल पहचान चोरी
जैसी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
ऐसे में ‘SAFE CLICK 2.0’ जैसे अभियान नागरिकों को समय रहते जागरूक करने और डिजिटल सुरक्षा की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सिवनी पुलिस का ‘SAFE CLICK 2.0’ अभियान केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिजिटल युग में सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नुक्कड़ नाटक, संवाद और प्रशिक्षण के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों से बचने का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया, जो वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है।
साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता और सतर्कता है। यदि नागरिक समय रहते सावधानी बरतें, अनजान लिंक और कॉल से बचें तथा किसी भी ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर संपर्क करें, तो डिजिटल दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
सुरक्षित क्लिक,सुरक्षित नागरिक और सुरक्षित समाज—यही ‘SAFE CLICK 2.0’अभियान का मूल संदेश है।

लगभग 16 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सिवनी ब्यूरो के रूप में लगभग 12 सालों से कार्यरत हैं.
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