साढ़े तीन दशक पहले का घटनाक्रम आज जेहन में हो गया है ताजा . . .
(लिमटी खरे)
एक समय था जब सिवनी में कांग्रेस के कद्दावर सांसद गार्गी शंकर मिश्र हुआ करते थे, उस दौर में उन्हें पराजित करना बहुत आसान नहीं था। उन्हें किस नारे ने पराजित किया यह बात आज प्रासंगिक इसलिए नजर आ रही है क्योंकि एक कचौरी दो समौसा इस वक्त ट्रेण्ड करता दिख रहा है।
बात लगभग 37 बरस पहले सन 1989 की है। उस समय सिवनी के सांसद कांग्रेस के गार्गी शंकर मिश्रा हुआ करते थे जो केंद्र में पेट्रोलियम मंत्री भी रहे। वे कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी थे और दूसरी ओर सिवनी लोकसभा सीट को भाजपा और जनता दल के समझौते के तहत जनता दल को देने की बात सामने आ रही थी। इसी बीच उन दिनों जिस पत्रिका का जादू सर चढ़कर बोलता था, उसका नाम था रविवार, रविवार पत्रिका के संपादक हुआ करते थे उदयन शर्मा। उदयन शर्मा के बहुत अच्छे मित्रों में सिवनी के मूर्धन्य पत्रकार स्व. गोविंद नेमा का शुमार था।
गोविंद नेमा के हवाले से एक खबर उस समय दैनिक संवाद कुंज की सुर्खी बनी कि उदयन शर्मा सिवनी से लोक सभा चुनाव लड़ सकते हैं! चूंकि खबर की बायलाईन गोविंद नेमा के नाम की थी, इसलिए उस पर शक की गुंजाईश करना किसी के लिए लेश मात्र भी उचित नहीं माना जा सकता था।

भाजपा के द्वारा सिवनी में प्रहलाद पटेल को टिकिट देने की घोषणा की जा चुकी थी। उस दौर में प्रत्याशी को बी फार्म अर्थात पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित करने की जवाबदेही पार्टी के जिलाध्यक्ष पर ही आहूत होती थी, और उस वक्त भाजपा के जिलाध्यक्ष थे पंडित महेश प्रसाद शुक्ला। वे सुनारी मोहल्ले में चंदू दीक्षित के मकान में किराए से रहा करते थे। अपरान्ह हम सभी उनके पास बैठे थे, तभी किसी ने आकर उनसे कहा कि प्रहलाद पटेल का फार्म भरवा दिया जाए। महेश चाचा की आंख कुछ छोटी हुईं मानो वे कुछ विचार कर रहे हों, और उन्होंने तत्काल ही प्रहलाद पटेल को बुलवा भेजा। प्रहलाद पटेल के आते ही पंडित महेश प्रसाद शुक्ला ने प्रहलाद पटेल को पार्टी का अधिकृत प्रत्शशी घोषित करने वाला बी फार्म दे दिया, क्योंकि तब तक पार्टी हाईकमान का यही निर्देश था।
इसके कुछ समय के उपरांत अचानक ही खबर आई कि सिवनी की सीट भाजपा और जनता दल के समझौते के तहत जनता दल को दे दी गई है। सिवनी में मदन तिवारी को जनता दल का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया था। युवाओं में इस बात का गुस्सा भरा हुआ था कि मदन तिवारी बाहरी प्रत्याशी हैं।
इसके अलावा गार्गी शंकर मिश्रा से भी युवाओं का मोहभंग हो चुका था। युवाओं के दबाव में प्रहलाद पटेल ने पहले ही अपना नामांकन दाखिल कर दिया था और बी फार्म भी जमा कर दिया था। प्रहलाद पटेल ने पर्चा नहीं उठाया। पार्टी ने उन्हें बागी करार दे दिया। उनका निष्काशित कर दिया। युवाओं के दबाव के चलते प्रहलाद पटेल ने चुनाव लड़ा।
इसी बीच गार्गी शंकर मिश्र और तत्कालीन विधायक विमला वर्मा के खिलाफ सिवनी के सभी खेलों के स्टेडियम जिसे आज बलात फुटबाल स्टेडियम का नाम देने का कुत्सित प्रयास जारी है को बनाने को लेकर छात्र नेता संजय चौरसिया की मुहिम जारी थी। शुक्रवारी बाजार की एक सभा में गार्गी शंकर मिश्री की जुबान फिसली और उन्होंने कुतिया को दान करने जैसी बात कह दी। गार्गी शंकर रूके नहीं, वे अपनी जीत पर पूरी तरह आश्वस्त थे। उन्होंने कह दिया कि युवा दस की कच्ची (कच्ची शराब) और दो रूपए के नमकीन (खारा) में ही बहक रहा है।
फिर क्या था, उस दौर में लोगों के बीच अपनी अलग और अति विश्वसनीय छवि बना चुका दैनिक संवादकुंज जैसे ही अगले दिन लोगों के हाथ में आया वैसे ही कुतिया दान और युवाओं की जुबान पर ‘‘गार्गी शंकर का एक ही नारा, दस की कच्ची, दो का खारा‘‘ जैसी हेडिंग ने धमाल मचा दिया।
चुनाव हुए परिणाम आए, निर्दलीय प्रत्याशी या भाजपा के बागी प्रत्याशी जिन्हें कमल चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ थाको 46.39 प्रतिशत वोट के साथ दो लाख 04 हजार 916 वोट मिले। कांग्रेस के कद्दावर नेता गार्गी शंकर मित्रा को 40.39 फीसदी वोट के साथ कुल 01 लाख 78 हजार 391 तो जनता दल के मदन तिवारी को सिर्फ 7.62 प्रतिशत अर्थात 33 हजार 653 वोट से ही संतोष करना पड़ा था।
आज दिल्ली में ‘एक कचौरी, दो समोसा, ज्ञानेश तेरा क्या भरोसा, जमकर ट्रेंड कर रहा है। आज युवाओं का गुस्सा सरकार के खिलाफ चरम पर दिख रहा है। आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि यह सब देखते सुनते हुए भी सबसे बड़ी और पुरानी विपक्षी पार्टी कांग्रेस इसे भुनाने में अपने आप को सक्षम नहीं पा रही है। पता नहीं कांग्रेस किस बात का इंतजार कर रही है। कांग्रेस के सरमायादार राहुल गांधी को अत्म मंथन करना ही होगा, उन्हें अपने सलाहकार बदलने ही होंगे, वरना सरकार की कथित निरंकुशता दिनों दिन बढ़ती जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब विपक्ष मौन रहता है तब ही सत्ताधारी निरंकुश हो जाते हैं . . .
(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं)
(साई फीचर्स)