सिवनी में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और वित्तीय साक्षरता का पाठ, डिजिटल बैंकिंग में सतर्क रहने का दिया संदेश

डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा बनी बड़ी जरूरत

(मनोज राव)

सिवनी (साई)।देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं के बीच साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की आवश्यकता बन चुका है। विशेष रूप से युवा और विद्यार्थी वर्ग इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान का सबसे अधिक उपयोग कर रहा है। ऐसे में उन्हें साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए जागरूक करना समय की मांग है।

इसी उद्देश्य से भारतीय स्टेट बैंक के अग्रणी जिला बैंक, सिवनी द्वारा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गंगेरुआ (धपारा) में कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों के लिए साइबर सुरक्षा एवं वित्तीय साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, बैंकिंग सेवाओं के जिम्मेदार उपयोग और वित्तीय अनुशासन के प्रति जागरूक बनाना था।

विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग का दिया गया प्रशिक्षण

कार्यक्रम में अग्रणी जिला प्रबंधक प्रवीण कुमार दिसोरिया और वित्तीय साक्षरता केंद्र के परामर्शदाता राजेंद्र सदाफल ने विद्यार्थियों को डिजिटल बैंकिंग के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन सुविधाओं ने लोगों के जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ा है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सतर्क रहना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारियां किसी भी स्थिति में किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

ओटीपी, पिन और पासवर्ड साझा करना पड़ सकता है भारी

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई बार साइबर ठग बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी नंबर, पासवर्ड या अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि—

  • कोई भी बैंक फोन पर ओटीपी नहीं मांगता।
  • किसी भी व्यक्ति को एटीएम पिन नहीं बताना चाहिए।
  • सीवीवी नंबर और पासवर्ड पूरी तरह गोपनीय रखने चाहिए।
  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
  • सोशल मीडिया या मैसेज के जरिए प्राप्त संदिग्ध ऑफर से बचना चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग का सुरक्षित उपयोग कैसे करें?

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के सुरक्षित उपयोग के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के लिए जरूरी सावधानियां

  • केवल आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करें।
  • अपने मोबाइल और बैंकिंग ऐप में मजबूत पासवर्ड रखें।
  • नियमित रूप से पासवर्ड बदलते रहें।
  • सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग लेन-देन से बचें।
  • अनजान क्यूआर कोड स्कैन न करें।
  • बैंक खाते की नियमित निगरानी करें।
  • किसी भी संदिग्ध लेन-देन की तुरंत जानकारी बैंक को दें।

विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल भुगतान सुविधाजनक है, लेकिन इसके उपयोग में जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है।

साइबर ठगी के बदलते तरीके बढ़ा रहे चिंता

पिछले कुछ वर्षों में देशभर में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

आज साइबर अपराधी—

  • फर्जी कॉल करते हैं।
  • बैंक अधिकारी बनकर जानकारी मांगते हैं।
  • नकली वेबसाइट तैयार करते हैं।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी करते हैं।
  • फर्जी निवेश योजनाओं का लालच देते हैं।
  • नकली लॉटरी और इनाम का प्रलोभन देते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है।

वित्तीय साक्षरता क्यों है जरूरी?

कार्यक्रम के दौरान केवल साइबर सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वित्तीय साक्षरता के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि आज के समय में केवल पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वित्तीय रूप से जागरूक होना भी उतना ही आवश्यक है। कम उम्र में बचत, निवेश और वित्तीय योजना की समझ विकसित करना भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद करता है।

विद्यार्थियों को नियमित बचत की आदत विकसित करने और बैंकिंग सेवाओं का सही उपयोग करने की सलाह दी गई।

वित्तीय साक्षरता के प्रमुख लाभ

  • धन प्रबंधन की बेहतर समझ।
  • अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण।
  • बचत और निवेश की आदत।
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता।
  • वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव।
  • भविष्य की बेहतर योजना।

डिजिटल इंडिया के दौर में बढ़ी जिम्मेदारी

देश में डिजिटल इंडिया अभियान के तहत डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। गांवों और छोटे शहरों तक भी डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं पहुंच चुकी हैं।

ऐसे में विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आज का युवा वर्ग ही भविष्य में डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर साइबर सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन की जानकारी दी जाए तो वे भविष्य में अधिक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बन सकते हैं।

साइबर धोखाधड़ी होने पर क्या करें?

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

साइबर ठगी होने पर उठाएं ये कदम

  1. तुरंत बैंक को जानकारी दें।
  2. राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
  3. राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करें।
  4. बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट की जांच करें।
  5. संबंधित साक्ष्य और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर शिकायत करने से कई मामलों में धन की रिकवरी संभव हो जाती है।

विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए सरल जवाब

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और साइबर सुरक्षा से जुड़े कई प्रश्न पूछे।

उन्होंने पूछा कि—

  • ओटीपी क्यों महत्वपूर्ण है?
  • फर्जी कॉल की पहचान कैसे करें?
  • बैंक खाते को सुरक्षित कैसे रखें?
  • साइबर अपराध की शिकायत कहां करें?

विशेषज्ञों ने व्यवहारिक उदाहरणों और सरल भाषा में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

समाज में बढ़ रही साइबर जागरूकता की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके अपना रहे हैं। इसलिए केवल तकनीक का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके सुरक्षित उपयोग की जानकारी होना भी जरूरी है।

विद्यालयों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल साइबर सुरक्षा की जानकारी देते हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से जिम्मेदार और सतर्क नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की बढ़ेगी जरूरत

आने वाले समय में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का दायरा और अधिक बढ़ने की संभावना है। ऐसे में साइबर सुरक्षा और वित्तीय साक्षरता को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युवाओं को समय रहते डिजिटल सुरक्षा और वित्तीय अनुशासन की जानकारी दी जाए तो साइबर अपराधों के मामलों में कमी लाई जा सकती है और एक सुरक्षित डिजिटल समाज का निर्माण किया जा सकता है।

सिवनी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंगेरुआ में आयोजित साइबर सुरक्षा एवं वित्तीय साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को डिजिटल युग की महत्वपूर्ण चुनौतियों और अवसरों से परिचित कराया। सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग, साइबर ठगी से बचाव और वित्तीय अनुशासन के प्रति जागरूकता आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। ऐसे कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हैं, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए जिम्मेदार, जागरूक और वित्तीय रूप से सशक्त नागरिक बनने की दिशा भी प्रदान करते हैं।