सिवनी के धान महोत्सव से किसानों को मिली बड़ी सौगात
(मनोज राव)
सिवनी (साई)।मध्यप्रदेश की कृषि राजनीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बुधवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। राज्य स्तरीय धान महोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रदेश में धान की फसल को भी भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि यदि बाजार में धान का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम रहता है, तो दोनों के बीच का अंतर किसानों के खातों में सरकार द्वारा जमा कराया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब प्रदेश के कई हिस्सों में किसान फसल की लागत, बाजार मूल्य और मौसम की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को किसानों की आय सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
किसानों को बताया धरती का वास्तविक शुभंकर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में किसानों को धरती का वास्तविक शुभंकर बताते हुए कहा कि अन्नदाता केवल अपने परिवार का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि ही प्रदेश और देश की समृद्धि का आधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, खेती को लाभकारी बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास की नई संभावनाएं तैयार करना है।
धान की फसल पर भावांतर योजना क्या है?
भावांतर योजना का उद्देश्य किसानों को फसल की उचित कीमत दिलाना है। कई बार बाजार में फसलों की कीमत एमएसपी से नीचे चली जाती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सरकार किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के बीच का अंतर सीधे उनके खाते में उपलब्ध कराती है।
अब तक प्रदेश में विभिन्न फसलों के लिए इस योजना का लाभ दिया जाता रहा है, लेकिन धान को इसमें शामिल करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद धान उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
- बाजार मूल्य और एमएसपी के बीच का अंतर सरकार देगी।
- राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
- धान उत्पादक किसानों को मूल्य गिरावट का कम जोखिम रहेगा।
- किसानों को अपनी उपज बेचने में अधिक भरोसा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे धान उत्पादक क्षेत्रों में कृषि निवेश बढ़ सकता है।
महाकौशल क्षेत्र की पहचान है धान उत्पादन
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र धान उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों की कृषि पहचान धान से जुड़ी रही है।
उन्होंने विशेष रूप से छत्रिय धान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त हुआ है। जीआई टैग मिलने से इस धान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जीआई टैग मिलने से स्थानीय उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ती है और किसानों को बेहतर बाजार मिलने की संभावना बनती है।
कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों को मिला बोनस
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत 3,941 किसानों के खातों में 2 करोड़ 84 लाख रुपये की बोनस राशि अंतरित की।
यह बोनस एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान किया गया। सरकार का कहना है कि श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बोनस और खरीद नीति दोनों को मजबूत किया जा रहा है।
सरकार की श्रीअन्न नीति की प्रमुख बातें
- कोदो-कुटकी की सरकारी खरीद।
- किसानों को बोनस राशि।
- प्रसंस्करण और पैकेजिंग व्यवस्था।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांडिंग।
- वैल्यू चेन का विकास।
मिलेट्स पर बढ़ रहा सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कोदो-कुटकी, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों को गरीबों की फसल माना जाता था, लेकिन आज पूरी दुनिया इनके पोषण मूल्य को स्वीकार कर रही है।
उन्होंने कहा कि श्रीअन्न स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं और बदलती जलवायु परिस्थितियों में कम पानी में बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट और जलवायु परिवर्तन के दौर में मिलेट्स भविष्य की खेती बन सकते हैं।
अल नीनो के बीच किसानों को सलाह
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष मानसून पर अल नीनो के संभावित प्रभाव का उल्लेख करते हुए किसानों को फसल विविधीकरण की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि बारिश कम होती है तो किसानों को ऐसी फसलें अपनानी चाहिए जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है।
कम पानी वाली प्रमुख फसलें
- कोदो
- कुटकी
- ज्वार
- बाजरा
- मक्का
कृषि वैज्ञानिक भी लंबे समय से किसानों को पारंपरिक फसल चक्र में बदलाव और जल संरक्षण आधारित खेती अपनाने की सलाह देते रहे हैं।
सिवनी जिले को494करोड़ रुपये से अधिक की सौगात
मुख्यमंत्री ने सिवनी जिले को 494 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से 629 विकास कार्यों की सौगात दी।
इनमें शामिल हैं—
- 349.33 करोड़ रुपये की लागत से 586 विकास कार्यों का लोकार्पण।
- 144.83 करोड़ रुपये की लागत से 43 विकास कार्यों का भूमिपूजन।
इन परियोजनाओं में सड़क, शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं।
बालाघाट से सिवनी तक बनेगी फोरलेन सड़क
मुख्यमंत्री ने बालाघाट से सिवनी तक फोरलेन सड़क निर्माण की घोषणा भी की।
यह परियोजना महाकौशल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सड़क निर्माण से—
- आवागमन आसान होगा।
- व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी।
- कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी।
स्थानीय लोगों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सिवनी को मिली कई अन्य सौगातें
मुख्यमंत्री ने कई अन्य घोषणाएं भी कीं—
- ग्राम चमारी में शासकीय महाविद्यालय।
- सागर से खटकर तक पक्की सड़क।
- छिड़िया पलारी में नगर वन।
- प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मिनी स्टेडियम।
इन घोषणाओं को जिले के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संबल योजना के तहत365करोड़ रुपये का वितरण
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना के तहत 16 हजार 754 से अधिक श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की।
संबल योजना के तहत—
- दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख रुपये।
- सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये।
- स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये।
सरकार का कहना है कि यह योजना गरीब और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रही है।
यूसीसी पर भी बड़ा संकेत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इसी महीने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने के लिए प्रस्ताव लाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से अलग रखा जाएगा।
यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यूसीसी को लेकर देशभर में बहस जारी है।
गेहूं खरीद में रिकॉर्ड का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीद का नया रिकॉर्ड बनाया है।
सरकार के अनुसार—
- 13 लाख 46 हजार किसानों से खरीद हुई।
- 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई।
- 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।
इसके अलावा सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ देने का दावा किया गया।
किसानों को2106करोड़ रुपये का मुआवजा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को 2106 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है।
उन्होंने खाद वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एग्रीटेक सिस्टम का भी उल्लेख किया और कहा कि सभी जिलों में निगरानी बढ़ाई गई है।
खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन पर जोर
मुख्यमंत्री ने किसानों से केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि किसानों को—
- पशुपालन,
- डेयरी,
- मत्स्य पालन,
- फसल विविधीकरण
जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए ताकि उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री ने खेत में उतरकर की धान रोपाई
कार्यक्रम का सबसे चर्चित दृश्य वह रहा जब मुख्यमंत्री स्वयं खेत में उतरे और किसानों के साथ धान रोपा।
उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में मुख्य रूप से सोयाबीन की खेती होती है और धान रोपने का यह उनका पहला अनुभव है।
मुख्यमंत्री के साथ महिलाओं ने पारंपरिक गीत भी गाए, जिससे कार्यक्रम में ग्रामीण संस्कृति की झलक दिखाई दी।
किसान के घर की सिदोरी का लिया स्वाद
धान रोपाई के बाद मुख्यमंत्री ने किसान दौलतराम बिसेन के घर से लाई गई पारंपरिक सिदोरी का स्वाद भी चखा।
उन्होंने रोटी, गुड़ और अचार खाकर किसान परिवार का आभार व्यक्त किया और इसे ग्रामीण आत्मीयता का प्रतीक बताया।
श्रीअन्न को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी
राज्य सरकार डिंडौरी में मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र स्थापित कर रही है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 में 40 हजार मीट्रिक टन कोदो-कुटकी खरीदने का है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराया गया तो मध्यप्रदेश देश में मिलेट उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
क्या बदल सकती है धान पर भावांतर योजना?
कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि धान को भावांतर योजना में शामिल किए जाने से—
- किसानों की आय में स्थिरता आएगी।
- बाजार जोखिम कम होगा।
- सरकारी खरीद पर दबाव घट सकता है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- कृषि निवेश बढ़ने की संभावना बनेगी।
हालांकि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था को इसकी सफलता के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
सिवनी के धान महोत्सव से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों, श्रमिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा धान की फसल को भावांतर योजना में शामिल करने की घोषणा की हो रही है।
यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो लाखों धान उत्पादक किसानों को मूल्य सुरक्षा मिलेगी और मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है। इसके साथ ही श्रीअन्न को बढ़ावा, विकास कार्यों की सौगात और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर जोर यह संकेत देता है कि प्रदेश सरकार आने वाले वर्षों में कृषि और ग्रामीण विकास को अपनी प्राथमिकता बनाए रखना चाहती है।

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