नेतन्याहू की दो टूक: अमेरिकी खैरात नहीं चाहिए, लेबनान से नहीं हटेगी सेना

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी वित्तीय सहायता को ‘खैरात’ बताया और इसे बंद करने की इच्छा जताई। उन्होंने लेबनान से इजरायली सेना को हटाने से इनकार किया और स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के गठन को नकारा।

(रश्मि कुलश्रेष्ठ)
नई दिल्ली (साई)।  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी वित्तीय सहायता को ‘खैरात’ बताया और इसे बंद करने की इच्छा जताई। उन्होंने लेबनान से इजरायली सेना को हटाने से इनकार किया और स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के गठन को नकारा। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की अर्थव्यवस्था अब इतनी मजबूत हो चुकी है कि उसे किसी विदेशी मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने अमेरिका से मिलने वाली वित्तीय सहायता को बंद करने की इच्छा जताई है। इसके अलावा, नेतन्याहू ने लेबनान से इजरायली सेना को हटाने से इनकार किया और कहा कि सेना तब तक नहीं हटेगी जब तक खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

नेतन्याहू का बयान और इसके मायने

नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि इजरायल की अर्थव्यवस्था अब इतनी मजबूत हो चुकी है कि उसे किसी विदेशी मदद की जरूरत नहीं है।

उन्होंने अमेरिका से मिलने वाली वित्तीय सहायता को बंद करने की इच्छा जताई है। इसके पीछे का कारण यह है कि नेतन्याहू चाहते हैं कि इजरायल अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाए।

लेबनान से इजरायली सेना को हटाने से इनकार

नेतन्याहू ने लेबनान से इजरायली सेना को हटाने से इनकार किया और कहा कि सेना तब तक नहीं हटेगी जब तक खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

उन्होंने कहा कि इजरायल ने लेबनान की सरकार की सहमति से उसकी सीमा के अंदर लगभग 10 किलोमीटर तक एक ‘सुरक्षा घेरा’ बना लिया है, जिससे हिजबुल्लाह और ईरान बौखलाए हुए हैं।

फलस्तीनी राष्ट्र के गठन को नकारा

नेतन्याहू ने स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के गठन को नकारा और कहा कि इजरायल की सुरक्षा को खतरा है।

उन्होंने कहा कि इजरायल की सुरक्षा को खतरा है और इसलिए वह फलस्तीनी राष्ट्र के गठन को नहीं मानेगा।

  • नेतन्याहू ने अमेरिकी वित्तीय सहायता को ‘खैरात’ बताया और इसे बंद करने की इच्छा जताई।
  • लेबनान से इजरायली सेना को हटाने से इनकार किया और कहा कि सेना तब तक नहीं हटेगी जब तक खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।
  • स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के गठन को नकारा और कहा कि इजरायल की सुरक्षा को खतरा है।

नेतन्याहू के बयान के मायने और भविष्य

नेतन्याहू के बयान के मायने यह हैं कि इजरायल अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा, नेतन्याहू के बयान से यह भी पता चलता है कि इजरायल लेबनान और फलस्तीनी राष्ट्र के मुद्दे पर अपनी सख्त रणनीति को जारी रखेगा। इजरायली समाचार एजेंसी के अनुसार, नेतन्याहू के बयान का मतलब यह है कि इजरायल अपनी सुरक्षा को खतरा होने से रोकने के लिए किसी भी कीमत पर तैयार है।