खरीफ सीजन 2026 को सफल बनाने के लिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
(प्रीति भौसले)
सिवनी (साई)।मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर शासन स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) श्री के.सी. गुप्ता ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य खरीफ फसलों की तैयारियों का आकलन करना, किसानों को आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा विभिन्न कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति को गति देना रहा।
सिवनी जिला मुख्यालय से आयोजित इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह सहित कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं जबलपुर और सागर संभाग के कलेक्टर एवं संभागायुक्त भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए दिए गए स्पष्ट निर्देश
बैठक के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त श्री के.सी. गुप्ता ने कहा कि खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए ताकि बोवनी कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश स्तर पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। इसलिए वितरण व्यवस्था को प्रभावी बनाते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामीण क्षेत्रों तक भी खाद की सुचारू आपूर्ति बनी रहे।
इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि यदि कोई किसान अतिरिक्त उर्वरक की मांग करता है तो उसकी वास्तविक आवश्यकता का परीक्षण किया जाए और नियमानुसार उचित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।
खरीफ सीजन में उर्वरकों की भूमिका और किसानों की चुनौतियां
खरीफ फसलों की बेहतर पैदावार के लिए समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई संसाधनों की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विशेषकर मानसून आधारित खेती वाले क्षेत्रों में बोवनी का समय सीमित होता है, इसलिए किसानों को कृषि आदानों की समय पर आपूर्ति आवश्यक है।
पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों में किसानों को उर्वरक वितरण के दौरान लंबी कतारों और आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इसे देखते हुए इस वर्ष प्रशासन पहले से तैयारियां कर रहा है ताकि खरीफ मौसम में किसी प्रकार की परेशानी न आए।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उर्वरकों का संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में भी सहायक होता है।
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कम पानी वाली फसलों पर जोर
समीक्षा बैठक में जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा की गई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों, विशेष रूप से सोयाबीन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, जिसके लिए अधिक जल की आवश्यकता होती है। ऐसे में फसल विविधीकरण और कम जल खपत वाली फसलों को बढ़ावा देकर जल संसाधनों पर दबाव को कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के दौर में ऐसी कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक हो गया है, जो कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हों।
मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर
कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन क्षेत्र की समीक्षा करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों को मछली उत्पादन संबंधी गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से जुड़े पात्र हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं की जानकारी समय पर पहुंचाई जानी चाहिए, जिससे वे इन योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
बैठक में विभिन्न जिलों में संचालित केज कल्चर परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई और इनके प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र को बढ़ावा देना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक माना जा रहा है।
पशुपालन योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश
पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने लखपति गौपालक दीदी योजना और क्षीरधारा ग्राम योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना तथा दुग्ध उत्पादन से जुड़े रोजगार के अवसरों को मजबूत करना है।
पशुपालन कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण सहायक व्यवसाय है, जो किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराता है। इसलिए इसकी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विभागों के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और सहकारिता विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक शासन की योजनाओं की जानकारी सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने से अधिक से अधिक हितग्राहियों को लाभ मिल सकेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सभी क्षेत्रों के संतुलित विकास से ही व्यापक आर्थिक सुधार संभव है।
किसानों की उम्मीदें और आने वाले समय की संभावनाएं
खरीफ सीजन किसानों के लिए वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण कृषि चक्र माना जाता है। अच्छी वर्षा, समय पर उर्वरक उपलब्धता और विभागीय सहयोग से बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों की अपेक्षा है कि उन्हें कृषि संसाधन आसानी से उपलब्ध हों और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो। प्रशासन की ओर से समय रहते की जा रही तैयारियां किसानों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों, जल संरक्षण उपायों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने समन्वित प्रयासों पर दिया जोर
बैठक के समापन के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त श्री के.सी. गुप्ता ने कहा कि खरीफ सीजन प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए सभी योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक ने यह स्पष्ट किया है कि शासन किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने, जल संरक्षण आधारित खेती को प्रोत्साहित करने और कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन और सहकारिता विभागों के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है। समयबद्ध योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों तक संसाधनों की सुगम पहुंच से आने वाला खरीफ सीजन अधिक उत्पादक और लाभकारी बनने की उम्मीद है।

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