शराब दुकानों से बीयर गायब, चुनिंदा ब्रांड पर वसूले जा रहे मनमाने दाम; गर्मी में बढ़ा संकट

मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बीयर की भारी कमी ने शराब दुकानों से लेकर ग्राहकों तक सभी को परेशान कर दिया है। लोकप्रिय ब्रांड्स की सप्लाई बाधित होने से कई जिलों में ओवररेटिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं। आबकारी विभाग ने एक्सपोर्ट रोकने और राशनिंग लागू करने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन इसके बावजूद संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस स्थिति का असर बाजार, उपभोक्ताओं और सरकारी राजस्व पर भी दिखाई देने लगा है।

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल़ (साई)।मध्य प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ बीयर की मांग अचानक तेज हो गई है, लेकिन बाजार में सप्लाई की स्थिति पूरी तरह बिगड़ती नजर आ रही है। प्रदेश के कई जिलों में लोकप्रिय बीयर ब्रांड्स की भारी कमी ने ग्राहकों, शराब ठेकेदारों और आबकारी विभाग सभी की चिंता बढ़ा दी है। हालत यह है कि कई शराब दुकानों पर सुबह स्टॉक आने के कुछ घंटों के भीतर ही बीयर खत्म हो जाती है और ग्राहक खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

बीयर की कमी का असर सिर्फ उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार में ओवररेटिंग की शिकायतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। कई दुकानों पर ग्राहकों से प्रति बोतल 50 रुपये और प्रति कैन 70 रुपये तक अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब आबकारी विभाग पहले ही राशनिंग और एक्सपोर्ट पर रोक जैसे कदम उठा चुका है।

गर्मियों में अचानक बढ़ी डिमांड ने बढ़ाई परेशानी

हर साल गर्मी के मौसम में बीयर की खपत तेजी से बढ़ती है। आमतौर पर शराब कारोबारी पहले से अतिरिक्त स्टॉक जमा कर लेते हैं ताकि सीजन के दौरान सप्लाई प्रभावित न हो। लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं हैं।

प्रदेश के कई शराब कारोबारियों का कहना है कि उन्हें आबकारी वेयरहाउस से सीमित मात्रा में ही बीयर उपलब्ध कराई जा रही है। खासतौर पर प्रीमियम और हाई रेंज ब्रांड्स की भारी कमी बनी हुई है। कई दुकानों पर स्टॉक सुबह पहुंचता है और कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है।

भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में ग्राहकों को पसंदीदा ब्रांड नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ दुकानों ने महंगी बीयर की बिक्री पर प्रति ग्राहक दो कैन या बोतल की सीमा तक तय कर दी है।

लोकप्रिय ब्रांड्स की सबसे ज्यादा कमी

प्रदेश में जिन ब्रांड्स की सबसे ज्यादा शॉर्टेज बताई जा रही है, उनमें शामिल हैं:

  • हेवईस
  • हेनरिक
  • हेइनेकेन
  • किंगफिशर
  • ट्यूबॉर्ग
  • हंटर
  • लीजेंड

वहीं दूसरी तरफ कुछ स्थानीय और कम लोकप्रिय ब्रांड्स बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन ग्राहक उन्हें खरीदने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे। उपलब्ध ब्रांड्स में दबंग, माउंट, प्रेसिडेंट, महारानी और बाबा जैसे नाम शामिल हैं।

शराब दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक प्रीमियम ब्रांड्स की मांग कर रहे हैं और विकल्प के तौर पर सस्ती बीयर खरीदने से बच रहे हैं। इससे बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।

ओवररेटिंग की शिकायतों ने बढ़ाई मुश्किल

बीयर की कमी का सबसे बड़ा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि दुकानदार लोकप्रिय ब्रांड्स की बीयर निर्धारित एमआरपी से ज्यादा कीमत पर बेच रहे हैं।

नियमों के अनुसार शराब और बीयर की बिक्री एमआरपी से अधिक पर नहीं की जा सकती। इसके बावजूद मांग और कमी का फायदा उठाकर कुछ दुकानदार अतिरिक्त रकम वसूल रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी ग्राहकों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि पसंदीदा ब्रांड के लिए अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि महीनों से कई ब्रांड्स बाजार में दिखाई ही नहीं दे रहे।

आबकारी विभाग ने उठाए कई कदम

बीयर संकट को देखते हुए आबकारी विभाग ने पहले ही कुछ बड़े फैसले लागू किए थे। विभाग ने प्रदेश से अन्य राज्यों और विदेशों में होने वाले बीयर एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा शराब दुकानों के लिए सप्लाई लिमिट भी तय की गई।

सूत्रों के अनुसार फिलहाल एक शराब दुकान को अधिकतम 300 पेटी बीयर की ही सप्लाई की जा रही है। इसका उद्देश्य उपलब्ध स्टॉक को सभी जिलों में संतुलित तरीके से बांटना है।

हालांकि इन उपायों के बावजूद स्थिति में ज्यादा सुधार दिखाई नहीं दे रहा। कई कारोबारी लगातार सप्लाई बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

लाइसेंस निरस्त होने से बिगड़ी सप्लाई चेन

आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार बीयर संकट के पीछे एक बड़ी वजह प्रमुख शराब निर्माता कंपनी का लाइसेंस निरस्त होना भी है। बताया जा रहा है कि यह कंपनी प्रदेश में सस्ती और प्रीमियम दोनों श्रेणियों की लगभग 50 फीसदी बीयर सप्लाई करती थी।

लाइसेंस रद्द होने के बाद अचानक बाजार में सप्लाई चेन प्रभावित हो गई। इसका असर सीधे शराब दुकानों और उपभोक्ताओं पर पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े सप्लायर के बाहर होने से बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि सीमित स्टॉक वाले ब्रांड्स की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी असर

बीयर संकट केवल स्थानीय स्तर की समस्या नहीं मानी जा रही। अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भी इस पर दिखाई दे रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ईरान-अमेरिका तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

बीयर की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली बोतलें, कैन और कार्डबोर्ड की लागत में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ी और सप्लाई प्रभावित हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि पैकेजिंग लागत लगातार बढ़ती रही तो आने वाले महीनों में बीयर के दाम और बढ़ सकते हैं।

शराब कारोबारियों में बढ़ रही चिंता

बीयर की कमी का असर शराब कारोबारियों की आय पर भी पड़ रहा है। गर्मियों का मौसम शराब कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान बीयर की बिक्री सबसे ज्यादा होती है।

कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक खास ब्रांड्स की मांग करते हैं और उपलब्ध नहीं होने पर खरीदारी छोड़ देते हैं। इससे उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है।

भोपाल और इंदौर सहित कई जिलों के शराब कारोबारियों ने आबकारी अधिकारियों से मुलाकात कर सप्लाई बढ़ाने की मांग की है। हालांकि अधिकारियों ने समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी सामान्य नहीं हो पाई है।

ग्राहकों में नाराजगी,सोशल मीडिया पर बढ़ी प्रतिक्रिया

बीयर की कमी और ओवररेटिंग के कारण ग्राहकों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग लगातार पोस्ट कर अपनी शिकायतें साझा कर रहे हैं।

कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि दुकानों पर कृत्रिम कमी पैदा कर ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। वहीं कई लोगों का आरोप है कि दुकानदार चुनिंदा ग्राहकों को ही पसंदीदा ब्रांड उपलब्ध करा रहे हैं।

गर्मी के मौसम में ठंडी बीयर की मांग बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन लगातार कमी के कारण उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

सरकार के राजस्व पर भी पड़ सकता है असर

बीयर बिक्री में कमी का असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है। शराब और बीयर से मिलने वाला आबकारी राजस्व राज्य सरकारों की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

यदि लोकप्रिय ब्रांड्स की उपलब्धता लंबे समय तक प्रभावित रही तो बिक्री घट सकती है। इससे सरकार की टैक्स आय पर असर पड़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सप्लाई संकट जल्द दूर नहीं हुआ तो अवैध बिक्री और कालाबाजारी जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

विभाग जल्द जारी कर सकता है नया आदेश

सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग जल्द बड़ा फैसला ले सकता है। जानकारी मिली है कि जिस कंपनी का लाइसेंस निरस्त हुआ था, उसके पास मौजूद पुराने स्टॉक को बाजार में लाने की तैयारी की जा रही है।

संभावना जताई जा रही है कि विभाग इस संबंध में आदेश जारी कर सकता है, जिससे शराब दुकानों पर अतिरिक्त स्टॉक पहुंच सकेगा। इससे बीयर की कमी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।

हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पुराने स्टॉक से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। इसके लिए उत्पादन और सप्लाई दोनों स्तरों पर दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत होगी।

भविष्य में और बढ़ सकती है चुनौती

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है। ऐसे में बीयर की मांग में और तेजी आने की संभावना है। यदि सप्लाई व्यवस्था समय पर मजबूत नहीं हुई तो संकट और गहरा सकता है।

इसके अलावा यदि ओवररेटिंग पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उपभोक्ताओं की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। आबकारी विभाग के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है—एक तरफ सप्लाई सामान्य करना और दूसरी तरफ कीमतों को नियंत्रित रखना।

मध्य प्रदेश में बीयर की कमी केवल मौसमी समस्या बनकर नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक, कारोबारी और उपभोक्ता स्तर पर बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। लोकप्रिय ब्रांड्स की अनुपलब्धता, ओवररेटिंग की शिकायतें और सीमित सप्लाई ने पूरे बाजार का संतुलन बिगाड़ दिया है।

आबकारी विभाग द्वारा उठाए गए कदमों से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां बताती हैं कि समस्या का स्थायी समाधान अभी दूर है। आने वाले दिनों में सरकार, विभाग और शराब कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय ही इस संकट को कम कर सकता है।