किसानों के सम्मान और उत्थान का वर्ष
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित करना राज्य की कृषि नीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शुरू किए गए इस महाअभियान का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। इस अभियान के माध्यम से अन्नदाता के सम्मान, आय वृद्धि और टिकाऊ कृषि विकास पर विशेष फोकस किया गया है।
कृषि रथ: ज्ञान और तकनीक का चलता-फिरता माध्यम
कृषक कल्याण वर्ष के तहत बुरहानपुर जिले से कृषि रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह कृषि रथ प्रत्येक ग्राम पंचायत तक पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रहा है। कृषि रथ के माध्यम से किसानों को उनकी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के अनुसार सही फसल और सही खेती पद्धति अपनाने की सलाह दी जा रही है, जिससे उत्पादन लागत कम हो और उपज में वृद्धि हो सके।
वैज्ञानिक खेती की जानकारी गांव-गांव
कृषि रथ द्वारा किसानों को निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जा रही है—
- जैविक एवं प्राकृतिक खेती की विधियां
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का महत्व
- एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन
- कीट एवं रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय
- फसल विविधीकरण और फसल कॉम्बिनेशन
- ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था
- पराली प्रबंधन से जुड़ी योजनाएं
इन जानकारियों का उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
कृषक चौपालों से सीधा संवाद
बुरहानपुर जिले के ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला और एमागिर्द में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कृषक चौपालों का आयोजन किया गया। इन चौपालों में किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझा गया और समाधान सुझाए गए।
कृषक चौपालों में प्राकृतिक खेती के आधार जैसे जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दसपर्णी अर्क बनाने की विधि की जानकारी दी गई। इसके साथ ही रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया।
मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग
विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी नमूना लेने की सही विधि समझाई और मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि लंबे समय में भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है। यह पहल खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
दलहन-तिलहन को बढ़ावा
कृषक कल्याण वर्ष के तहत दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। किसानों को जायद फसल के रूप में उड़द और मूंगफली की खेती के लिए प्रेरित किया गया। इससे फसल चक्र संतुलित रहेगा और किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होंगे।
ग्राम बाकड़ी में कृषि चौपाल का आयोजन
ग्राम बाकड़ी में आयोजित कृषि चौपाल में कृषि रथ के माध्यम से ग्रामीणों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार खेती को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।
प्राकृतिक खेती और बाजार की व्यवस्था
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत बुरहानपुर जिले में प्रति गुरुवार “प्राकृतिक हाट बाजार” का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को अपने उत्पादों के लिए सीधा बाजार उपलब्ध कराना है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है।
पर्यावरण संरक्षण और आय वृद्धि का संतुलन
प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के कम उपयोग से मिट्टी, जल और जैव विविधता सुरक्षित रहती है। साथ ही उपभोक्ताओं को सुरक्षित और पौष्टिक उत्पाद प्राप्त होते हैं।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
कृषक कल्याण वर्ष के तहत चलाए जा रहे अभियानों से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ी है। किसानों को सरकारी योजनाओं की सीधी जानकारी मिल रही है और वे नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। यह पहल कृषि को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
जन प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीदें
कृषि रथ और कृषक चौपालों को लेकर किसानों में सकारात्मक उत्साह देखा जा रहा है। किसानों का मानना है कि यदि इस प्रकार की तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी निरंतर मिलती रही, तो खेती की लागत घटेगी और आमदनी में सुधार होगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य जिलों के लिए उदाहरण बन सकता है।
आगे की राह
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत शुरू किए गए प्रयासों को लंबे समय तक जारी रखने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती और बाजार से जुड़ाव यदि एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो राज्य की कृषि व्यवस्था में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
8️⃣ CONCLUSION / निष्कर्ष
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार किसानों को वैज्ञानिक, प्राकृतिक और लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ा रही है। कृषि रथ, कृषक चौपाल और प्राकृतिक हाट बाजार जैसी पहलें किसानों के ज्ञान, आय और आत्मविश्वास को मजबूत कर रही हैं। यह अभियान न केवल किसानों के कल्याण का माध्यम बन रहा है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास को भी नई दिशा दे रहा है।

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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