भारत में अगर किसी चीज़ की सबसे ज़्यादा पूजा होती है,
तो वो है—सरकारी नौकरी!
सुबह चाय में,
दोपहर चर्चा में,
और रात सपनों में—
बस एक ही डायलॉग गूंजता है,
“कहीं सरकारी नौकरी लग जाए…”
इसी देसी मानसिकता पर आधारित है यह मज़ेदार कल्पना।
किसी ने मज़ाक में कह दिया—
“अगर ऊपर से बस एक ऐलान हो जाए…”
फिर क्या था,
सोचते ही लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
😄 देसी सोच का देसी गणित
- सरकारी नौकरी = पेंशन + सम्मान + रिश्तेदारों की चुप्पी
- मेहनत चाहे जैसी हो,
- रिज़ल्ट सीधा—जोश हाई लेवल!
😂 कुछ मज़ेदार जोक संवाद
दोस्त–दोस्त
दोस्त: भाई सरकारी नौकरी क्यों चाहिए?
दूसरा दोस्त: ताकि शादी में लोग पूछें—“कहां काम करता है?”
पति–पत्नी
पत्नी: तुम हमेशा फोन क्यों देखते रहते हो?
पति: कहीं सरकारी नौकरी का फॉर्म न निकल जाए!
टीचर–स्टूडेंट
टीचर: बड़े होकर क्या बनोगे?
स्टूडेंट: सर, लाइन में लगूंगा… फॉर्म भरने के लिए।
बॉस–कर्मचारी
बॉस: ऑफिस में मन नहीं लगता क्या?
कर्मचारी: सर, मन तो सरकारी नौकरी में अटका है।
🤣सोशल मीडिया स्टाइल हंसी
- ऐलान की अफवाह → व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी एक्टिव
- युवाओं का जोश → जीपीएस ऑफ
- प्लानिंग → “पहले नौकरी, बाद में सोचेंगे”
देसी कल्पना में हर चीज़ संभव है,
और जो संभव न हो—
उसे मज़ाक बना दिया जाता है!
8️⃣ Conclusion /निष्कर्ष
इस तरह के जोक्स हमें याद दिलाते हैं कि
हमारी रोज़मर्रा की चिंताएं, सपने और इच्छाएं
हास्य का बेहतरीन स्रोत बन सकती हैं।
आख़िरी पंचलाइन:
“देश में दो चीज़ें कभी कम नहीं होंगी—
सरकारी नौकरी की चाह
और उस पर बनने वाले जोक्स!” 😄
अगर मोदी बस एक बार ऐलान कर दे.
की जो भी आतंकवादी को पकड़ के लाएगा उसे सरकारी नौकरी दी जायेगी.
कसम से 24 घंटे भी नहीं लगेंगे,
देश के लडके पूरा पकिस्तान उठा लाएंगे!
(साई फीचर्स)

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