(नरेंद्र शिवाजी पटेल)
मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक परिदृश्य में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने दो वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। यह कालखंड केवल सत्ता के निरंतर संचालन का नहीं, बल्कि राज्य की पहचान को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रयास भी रहा है। अतीत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए, वर्तमान की प्रशासनिक चुनौतियों से जूझना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं को आकार देना—इन तीनों आयामों को एक साथ साधने का प्रयास इस सरकार की प्रमुख विशेषता के रूप में उभरा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की दृष्टि में यह कार्यकाल संतुलन, निरंतरता और दूरदर्शिता का मिश्रण रहा है, जिसमें सांस्कृतिक चेतना और विकासात्मक सोच समानांतर चलती दिखाई देती है।
🟩पृष्ठभूमि /Background
डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी ऐसे समय में संभाली, जब मध्यप्रदेश के सामने प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने, विकास की गति को तेज करने और सामाजिक संतुलन को सुदृढ़ करने की चुनौती थी। राज्य की जनता की अपेक्षाएं स्पष्ट थीं—
- शासन में पारदर्शिता
- विकास कार्यों में गति
- सांस्कृतिक अस्मिता का संरक्षण
उज्जैन की पवित्र भूमि से निकलकर प्रदेश की बागडोर संभालने वाले डॉ. यादव की राजनीतिक पृष्ठभूमि और वैचारिक झुकाव ने सरकार की प्राथमिकताओं को काफी हद तक दिशा दी।
🟩अतीत: सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम
डॉ. मोहन यादव सरकार के दो वर्षों की सबसे प्रमुख पहचान रही—मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत का पुनर्स्मरण और पुनर्स्थापन।
🟢धार्मिक एवं सांस्कृतिक परियोजनाएं
सरकार ने धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी।
प्रमुख पहलें इस प्रकार रहीं:
- महाकाल लोक (कॉरिडोर) का विस्तार
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर के विकास ने न केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाई, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई। - ओंकारेश्वर में अद्वैत लोक परियोजना
अद्वैत दर्शन को केंद्र में रखकर आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। - श्रीकृष्ण पाथेय
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन की नई परिकल्पना सामने आई।
इन पहलों से यह संदेश गया कि सरकार विकास को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के रूप में भी देख रही है।
🟩वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे पर फोकस
सरकार के वर्तमान कार्यकाल की पहचान प्रशासनिक सक्रियता और आधारभूत ढांचे के विस्तार से जुड़ी रही है।
🟢बुनियादी ढांचा विकास
- राज्य और ग्रामीण सड़कों का उन्नयन
- औद्योगिक कॉरिडोरों का विकास
- शहरी परिवहन और अधोसंरचना में सुधार
इन कार्यों का सीधा असर आवागमन, निवेश और रोजगार संभावनाओं पर पड़ा है।
🟢कृषि और ग्रामीण विकास
कृषि क्षेत्र में सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाए:
- उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता
- सिंचाई क्षमता का विस्तार
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को टिकाऊ बनाना रहा।
🟢शिक्षा,युवा और महिलाएं
- तकनीकी शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार
- रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों की शुरुआत
- लाड़ली बहना योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से महिला सशक्तिकरण को मजबूती
युवाओं के लिए स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाएं सरकार की प्राथमिकताओं में रहीं।
🟩प्रशासनिक,सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
दो वर्षों में सरकार के निर्णयों का असर केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी महसूस किया गया।
- प्रशासनिक तंत्र में निर्णय प्रक्रिया तेज हुई
- योजनाओं की मॉनिटरिंग पर जोर बढ़ा
- राजनीतिक रूप से सरकार ने स्थिरता और स्पष्ट दिशा का संकेत दिया
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाओं के अनुरूप परिणाम न मिलने को लेकर आलोचनाएं भी सामने आईं, लेकिन सरकार ने इन्हें सुधार के अवसर के रूप में लिया।
🟩आंकड़े,तथ्य और विश्लेषण
- धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश में इजाफा
- सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी
विश्लेषकों के अनुसार, सरकार का फोकस “लघु अवधि के लाभ” से अधिक “दीर्घकालिक प्रभाव” पर रहा है।
🟩आम जनता पर असर
सरकार की नीतियों का असर आम नागरिक के जीवन में कई स्तरों पर दिखाई देता है:
- बेहतर सड़कें और कनेक्टिविटी
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से आर्थिक सहारा
- धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों में सरकार की पहुंच बढ़ी है, जिससे प्रशासन और जनता के बीच संवाद मजबूत हुआ है।
🟩भविष्य: विकास की दिशा और संभावनाएं
डॉ. मोहन यादव सरकार का अगला फोकस भविष्य की आवश्यकताओं पर केंद्रित दिखाई देता है।
🟢औद्योगिक और निवेश नीति
- MSME और बड़े उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण
- पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में औद्योगिक क्लस्टर
🟢ऊर्जा और पर्यावरण
- सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार
- जल संरक्षण
- इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
🟢स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचा
- जिला और ग्रामीण स्तर पर अस्पतालों का उन्नयन
- टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार
इन योजनाओं का उद्देश्य प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत और सामाजिक रूप से संतुलित बनाना है।
🟩निष्कर्ष /Conclusion
मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार के दो वर्ष ऐसे कार्यकाल के रूप में सामने आए हैं, जिसमें अतीत की सांस्कृतिक विरासत, वर्तमान की प्रशासनिक जरूरतों और भविष्य की विकास आकांक्षाओं को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है। यह संतुलन ही इस सरकार की सबसे बड़ी पहचान बनता है।
आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक प्रभाव आर्थिक प्रगति, सामाजिक स्थिरता और प्रशासनिक दक्षता के रूप में दिखाई देगा। फिलहाल, मोहन सरकार का दो वर्षीय कार्यकाल यह संकेत देता है कि मध्यप्रदेश की राजनीति और विकास यात्रा एक स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ रही है।
(लेखक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन हैं।)
(साई फीचर्स)

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