🌿गोवर्धन पूजा पर गौ सेवा का आह्वान
(ब्यूरो कार्यालय)
मंदसौर (साई)। दीपावली के बाद आने वाला गोवर्धन पर्व इस बार मंदसौर के लामगरी-नगरी स्थित कमलमुनि चिन्मयानंद गौशाला में एक विशेष रूप में मनाया गया।
इस पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने गौशाला पहुँचकर गोवर्धन पूजा की और गौ माता की सेवा का संदेश दिया।
उप मुख्यमंत्री ने परंपरागत रूप से पूजा अर्चना कर गौ माता को गुड़ और रोटी खिलाई, गाय-बछड़ों को दुलारा तथा गौशाला परिसर में बने गोवर्धन पर्वत प्रतिरूप के दर्शन किए।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि —
“हमारी सनातन संस्कृति हमें प्रकृति से जोड़ती है। गौ माता हमारे जीवन का आधार हैं, जो हमें अन्न, दूध, घी और धन देती हैं। उनकी सेवा ही सच्ची पूजा है।”
🐄गौशाला में श्रद्धा और सेवा का संगम
कमलमुनि चिन्मयानंद गौशाला में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणजन, गौभक्त, साधु-संत और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गौशाला में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों और भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।
उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने गौशाला सेवादारों का सम्मान पत्र और शॉल देकर सम्मानित किया तथा कहा कि —
“गौ सेवा में लगे प्रत्येक व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा हैं। गौमाता की सेवा और संरक्षण से ही हमारा समाज समृद्ध और संस्कारित बनता है।”
उन्होंने गौशाला में बिजली की स्थायी व्यवस्था जल्द करवाने की घोषणा भी की और कहा कि “गौशालाओं में सुविधा बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।”
🌸गौमाता का महत्व—भारतीय संस्कृति की आत्मा
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में गौमाता को ‘माता’ का स्थान प्राप्त है। वह केवल एक पशु नहीं, बल्कि जीव जगत के पोषण और संतुलन की प्रतीक हैं।
गौमाता से मिलने वाले दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर — पंचगव्य — हमारे आरोग्य,कृषि और आध्यात्मिक जीवन का आधार हैं।
उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा —
“गौमाता केवल दूध नहीं देतीं, वे हमारी भावनाओं, संवेदनाओं और संस्कृति को जीवित रखती हैं। हमें गौशालाओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता दोनों बढ़ानी होंगी।”
🌾किसानों और गौपालन से जुड़ा आत्मनिर्भरता का सूत्र
देवड़ा ने इस अवसर पर कहा कि गौपालन और कृषि एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि किसान गौमाता की सेवा और संरक्षण करें, तो जैविक खेती के माध्यम से न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है बल्कि रासायनिक खादों पर निर्भरता भी घटाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि —
“गौपालन और जैविक कृषि आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में गाय की भूमिका अतुलनीय है।”
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
⚡गौशालाओं में बिजली और संसाधन की घोषणा
देवड़ा ने गौशाला में उपस्थित लोगों से संवाद करते हुए कहा कि गौशाला में बिजली आपूर्ति की स्थायी व्यवस्था शीघ्र की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी गौशालाएँ जिनमें बुनियादी सुविधाओं की कमी है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
“हमारा लक्ष्य है कि हर गौशाला में पानी, बिजली, चारा और सुरक्षा की व्यवस्था पूर्ण रूप से हो,” – उप मुख्यमंत्री देवड़ा
उन्होंने बताया कि सरकार जल्द ही ‘गौशाला विकास योजना’ के तहत नई नीतियाँ ला रही है, जिससे ग्रामीण स्तर पर गोसेवा को प्रोत्साहन मिलेगा।
🌻गोवर्धन पर्व का आध्यात्मिक संदेश
गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अहंकार को तोड़ने की घटना का स्मरण कराती है। यह पर्व प्रकृति, जल, वनस्पति और गौमाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का उत्सव है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा —
“गोवर्धन पूजा हमें यह सिखाती है कि हम प्रकृति के साथ सहअस्तित्व में जीना सीखें। गौमाता और पर्यावरण का संरक्षण करना ही सच्ची भक्ति है।”
इस अवसर पर उपस्थित साधु-संतों ने भी गौसेवा के महत्व पर प्रवचन दिए और ग्रामीणों से गौमाता की सेवा के लिए एक-एक गाय पालने का संकल्प लेने की अपील की।
🇮🇳स्वदेशी अपनाएं,आत्मनिर्भर भारत बनाएं
उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग “स्वदेशी उत्पादों के उपयोग” से होकर जाता है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे छोटे एवं कुटीर उद्योगों से निर्मित वस्तुओं को खरीदें, ताकि स्थानीय रोजगार को बल मिले और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता घटे।
उन्होंने कहा —
“हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी का संकल्प लें। जब हम अपने उत्पादों को अपनाएँगे, तभी भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन सकेगा।”
देवड़ा ने कहा कि जैसे गोपालन आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की पहचान है, वैसे ही स्वदेशी वस्तुएँ आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव हैं।
💬कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में लोकसभा सांसद श्री सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने गोवर्धन पर्व की शुभकामनाएँ दीं और गौसेवा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा —
“गौ सेवा केवल धर्म नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा है। गौमाता हमारे जीवन की सबसे बड़ी संपदा हैं।”
🧘सनातन परंपरा और आधुनिकता का समन्वय
देवड़ा ने कहा कि हमें आधुनिकता के साथ अपनी सनातन परंपरा को भी जीवित रखना है। गौसेवा, योग, आयुर्वेद और स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग मिलकर भारत को समृद्ध बना सकते हैं।
उन्होंने कहा —
“हम तकनीकी प्रगति के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहें। जब परंपरा और प्रगति साथ चलेंगी, तभी सच्चा विकास संभव है।”
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण में भी आगे आएँ, क्योंकि यही राष्ट्र निर्माण की सच्ची दिशा है।
🌍गौशाला विकास में सरकार का विजन
मध्यप्रदेश सरकार ने गौशालाओं के विकास के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। इनमें से कुछ प्रमुख पहलें हैं:
- गौ अभयारण्य योजना – बेसहारा गायों के संरक्षण हेतु राज्य स्तरीय गौ अभयारण्य।
- गौ उत्पाद प्रसंस्करण इकाइयाँ – गोबर गैस, जैविक खाद और पंचगव्य उत्पाद निर्माण के लिए सहायता।
- गौशाला डिजिटल रजिस्ट्रेशन – प्रत्येक गौशाला की ऑनलाइन निगरानी और अनुदान प्रक्रिया पारदर्शी बनाना।
- गौसेवक सम्मान योजना – सक्रिय गौसेवकों को वार्षिक सम्मान और आर्थिक सहयोग।
इन योजनाओं के माध्यम से सरकार का उद्देश्य है कि गौसेवा एक आंदोलन बने, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बने।
🔔ग्राम विकास और गौ सेवा का अटूट संबंध
गांवों की आत्मा गायों में बसती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन और जैविक जीवनशैली — इन सबका केंद्र बिंदु गाय रही है।
देवड़ा ने कहा कि जब तक गाँव सशक्त नहीं होंगे, तब तक भारत आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। इसलिए हर ग्राम पंचायत में गौशालाओं को विकसित करना आवश्यक है।
“गौशाला केवल गायों का घर नहीं, बल्कि संस्कृति, करुणा और कर्तव्य का मंदिर है।”
🕊️निष्कर्ष (Conclusion)
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का मंदसौर दौरा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश देने का अवसर भी था।
उन्होंने जो बातें कहीं — गौमाता की सेवा करें,स्वदेशी अपनाएँ और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करें — वही आज के भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता हैं।
गौसेवा, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता – ये तीनों भारत की सांस्कृतिक शक्ति के स्तंभ हैं। जब हर व्यक्ति एक गाय की सेवा का संकल्प लेगा और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएगा, तभी 2047 का विकसित भारत सपना नहीं, वास्तविकता बनेगा।
“गौमाता हमारे धर्म की नहीं, हमारे जीवन की धुरी हैं। उनकी सेवा से ही देश, संस्कृति और समाज सशक्त होता है।”
जय गौमाता—जय भारत।🇮🇳

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