देहरादून में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का सीएम आवास कूच: मानदेय बढ़ाने की मांग पर सड़क पर उतरीं महिलाएं, दिवाली तक फैसला नहीं तो मनाएंगी काला दिवस

(ब्यूरो कार्यालय)

देहरादून (साई)। उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लंबे समय से लंबित मानदेय वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार 2 नवंबर को आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन के बैनर तले प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। हालांकि, मुख्यमंत्री आवास पहुंचने से पहले ही पुलिस ने हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारी महिलाओं को रोक दिया। इससे नाराज कार्यकत्रियां सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि वे लंबे समय से मानदेय बढ़ाने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार और संबंधित विभागों से आग्रह कर रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस निर्णय के बजाय आश्वासन ही मिलते रहे हैं। संगठन का कहना है कि वर्ष 2024 में मानदेय वृद्धि के संबंध में सरकार ने एक कमेटी गठित की थी, लेकिन लंबे समय के बाद भी कमेटी के निर्णय और उस पर आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दिवाली से पहले उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दिवाली का त्योहार काला दिवस के रूप में मनाएंगी। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास के लिए निकाला मार्च

अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार 2 नवंबर को प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां देहरादून के परेड ग्राउंड में एकत्रित हुईं। यहां से सभी महिलाओं ने संगठित होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच शुरू किया।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के हाथों में अपनी मांगों से संबंधित संदेश और नारे थे। मार्च के दौरान उन्होंने मानदेय वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

जैसे ही प्रदर्शनकारी महिलाएं हाथीबड़कला पहुंचीं, पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया।

मुख्यमंत्री आवास तक नहीं पहुंच पाने से नाराज कार्यकत्रियां सड़क पर ही बैठ गईं। इसके बाद मौके पर धरना शुरू हो गया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।

प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए मौके पर गहमागहमी की स्थिति भी देखने को मिली। महिलाओं का कहना था कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

मानदेय वृद्धि की मांग पर लंबे समय से आंदोलन कर रही हैं कार्यकत्रियां

आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन की प्रदेश महामंत्री सुशीला खत्री ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रही हैं।

उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं को विभिन्न विभागीय जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, लेकिन इसके अनुपात में मिलने वाला मानदेय उनकी अपेक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है।

सुशीला खत्री के अनुसार, संगठन की ओर से कई बार सरकार का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित किया गया। अलग-अलग अवसरों पर आंदोलन, ज्ञापन और अन्य माध्यमों से मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे कार्यकर्ताओं को राहत मिल सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद मांगों का निस्तारण नहीं हुआ। इसी कारण प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।

संगठन का कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को मानदेय वृद्धि और अन्य मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेकर उसे लागू करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में 12 हजार रुपये मानदेय का उदाहरण देकर उठाई मांग

प्रदर्शन के दौरान संगठन की प्रदेश महामंत्री सुशीला खत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में की गई वृद्धि का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार को भी अपने राज्य की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में जल्द वृद्धि करनी चाहिए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सितंबर 2026 से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कुल मासिक मानदेय 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का 6 हजार रुपये निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया गया है। <Cite refs={[“turn332752search3″,”turn332752search11”]}/>

उत्तराखंड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पड़ोसी राज्य में मानदेय वृद्धि के फैसले के बाद उनके राज्य में भी इस विषय पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।

हालांकि, अलग-अलग राज्यों की वित्तीय परिस्थितियां, मानदेय व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णय अलग हो सकते हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश में हुई वृद्धि को उत्तराखंड में स्वतः लागू होने वाला निर्णय नहीं माना जा सकता।

लेकिन इस उदाहरण के माध्यम से आंगनबाड़ी संगठन राज्य सरकार से अपनी मांग पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह कर रहा है।

वर्ष 2024 में गठित हुई थी मानदेय वृद्धि के लिए कमेटी

आंदोलन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन की ओर से वर्ष 2024 में गठित कमेटी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

सुशीला खत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि सहित विभिन्न समस्याओं पर विचार करने के लिए कमेटी गठित की गई थी।

उनका कहना है कि कमेटी गठित हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन कार्यकर्ताओं को अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए और सरकार ने उन पर क्या निर्णय लिया है।

संगठन का सवाल है कि जब कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार करने के लिए समिति बनाई गई थी, तो उसकी रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है?

इस मुद्दे को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष है। उनका कहना है कि यदि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, तो सरकार को उसके निष्कर्ष और आगे की कार्ययोजना स्पष्ट करनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, भोजन माताओं और आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर विचार के लिए समिति गठित किए जाने की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी है। <Cite refs={[“turn332752search5″,”turn332752search7”]}/>

उत्तराखंड सरकार ने भी मानदेय बढ़ाने की बात कही, लेकिन राशि अभी तय नहीं

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि उत्तराखंड सरकार की ओर से हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि पर विचार किए जाने की बात कही गई है।

28 अक्टूबर 2026 को विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सरकार प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाएगी। हालांकि, कितनी वृद्धि की जाएगी, इस पर राज्य के वित्तीय संसाधनों के आधार पर विचार किया जाएगा। <Cite refs={[“turn332752search1”]}/>

विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में लगभग 35 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं। प्रदेश के 20,070 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 9,300 रुपये मासिक मानदेय और 500 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है। वहीं सहायिकाओं को 5,250 रुपये मानदेय और 250 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। <Cite refs={[“turn332752search1”]}/>

इससे स्पष्ट है कि मानदेय वृद्धि का विषय सरकार के स्तर पर भी विचाराधीन है, लेकिन प्रस्तावित वृद्धि की राशि और उसे लागू करने की तारीख को लेकर अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

यही स्थिति प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का एक प्रमुख कारण भी है। वे सरकार से केवल भविष्य में विचार करने के बजाय निश्चित समय-सीमा के साथ निर्णय की अपेक्षा कर रही हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका और जिम्मेदारियां भी हैं महत्वपूर्ण

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता महिला एवं बाल विकास व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक विभिन्न सेवाएं पहुंचाने में उनकी भूमिका रहती है।

इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को संचालित किया जाता है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:

  • छोटे बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित गतिविधियां।
  • गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को आवश्यक जानकारी देना।
  • बच्चों के वजन और पोषण की निगरानी।
  • कुपोषण की पहचान और संबंधित जानकारी विभाग तक पहुंचाना।
  • बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां।
  • सरकारी पोषण एवं महिला-बाल विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहयोग।
  • परिवारों को स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक करना।

इन जिम्मेदारियों के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं और आम परिवारों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क माध्यम के रूप में काम करती हैं।

ऐसे में मानदेय, सेवा संबंधी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सवाल उनके लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

केवल मानदेय नहीं, अन्य सेवा संबंधी मांगें भी हैं महत्वपूर्ण

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन में मानदेय वृद्धि प्रमुख मुद्दा है, लेकिन उनके सेवा संबंधी अन्य विषय भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

विभिन्न आंगनबाड़ी संगठनों की मांगों में सेवा की सुरक्षा, सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, पदोन्नति और विभागीय सुविधाओं से जुड़े विषय शामिल रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का तर्क है कि लंबे समय तक विभागीय जिम्मेदारियां निभाने के बाद सेवानिवृत्ति की स्थिति में भी उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

इसके अतिरिक्त कार्यकर्ताओं की मांगों में निम्नलिखित विषय भी चर्चा में रहे हैं:

  1. मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि।
  2. सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा।
  3. सेवा संबंधी नियमों में स्पष्टता।
  4. पदोन्नति के अवसर।
  5. कार्य के अनुरूप सुविधाएं।
  6. सामाजिक सुरक्षा से संबंधित लाभ।
  7. विभागीय कार्यों और अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था।

इन मांगों के समाधान के लिए सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद की आवश्यकता है। मांगों पर निर्णय लेते समय वित्तीय संसाधनों के साथ कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों और उनकी सेवा परिस्थितियों का भी मूल्यांकन जरूरी होगा।

दिवाली से पहले मांगें पूरी नहीं हुईं तो काला दिवस मनाने की चेतावनी

देहरादून में प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन ने सरकार को दिवाली से पहले मांगों के निस्तारण का अल्टीमेटम दिया है।

संगठन की ओर से कहा गया है कि यदि दिवाली से पहले मानदेय वृद्धि सहित अन्य लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दिवाली का त्योहार काला दिवस के रूप में मनाएंगी।

यह चेतावनी आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

संगठन का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से कार्यकर्ताओं के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

हालांकि, दिवाली से पहले सरकार की ओर से कोई नया आदेश या अंतिम निर्णय जारी होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल प्रदर्शनकारी संगठन अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है और उसने आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

सरकार और संगठन के बीच बातचीत से निकल सकता है समाधान

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों और सरकार की वित्तीय परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण पहलू है।

एक ओर कार्यकर्ता अपने मानदेय में वृद्धि और सेवा संबंधी सुरक्षा की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने विधानसभा में मानदेय वृद्धि को राज्य के वित्तीय संसाधनों के आधार पर तय करने की बात कही है।

ऐसे में सरकार और संगठन के बीच औपचारिक बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।

इस विषय पर समाधान निकालने के लिए कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी होगी:

  • मानदेय वृद्धि की प्रस्तावित राशि कितनी होगी?
  • कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए अलग-अलग क्या व्यवस्था होगी?
  • वृद्धि किस तारीख से लागू की जाएगी?
  • वर्ष 2024 में गठित कमेटी की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई?
  • सेवानिवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा संबंधी मांगों पर सरकार का क्या रुख है?
  • मांगों के निस्तारण की समय-सीमा क्या होगी?

इन सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलने से कार्यकर्ताओं के बीच बनी असमंजस की स्थिति कम हो सकती है।

मानदेय वृद्धि पर फैसले का इंतजार, दिवाली से पहले सरकार के सामने चुनौती

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 2 नवंबर को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया मुख्यमंत्री आवास कूच उनके लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर जारी असंतोष को सामने लाता है। परेड ग्राउंड से निकली कार्यकर्ताओं को हाथीबड़कला में पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सड़क पर धरना देना पड़ा।

संगठन की प्रमुख मांग मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि है। इसके साथ ही वर्ष 2024 में गठित कमेटी की रिपोर्ट और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों पर भी स्पष्ट निर्णय की अपेक्षा की जा रही है।

दूसरी ओर, सरकार ने विधानसभा में मानदेय वृद्धि का आश्वासन दिया है, लेकिन बढ़ोतरी की राशि और लागू होने की तारीख अभी तय नहीं की गई है।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या दिवाली से पहले सरकार और आंगनबाड़ी संगठनों के बीच कोई ठोस सहमति बन पाएगी? यदि ऐसा नहीं होता है, तो संगठन की काला दिवस मनाने की चेतावनी के अनुसार आंदोलन आगे बढ़ सकता है।

फिलहाल प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की निगाहें सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हैं।