सिवनी में छात्रावास दिवस पर सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का बड़ा संदेश, बोले- शिक्षा के साथ संस्कार और व्यक्तित्व विकास भी जरूरी
(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार 01 नवंबर 2026 को जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों में छात्रावास दिवस उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम छात्रावास बींझावाड़ा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन के दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों में जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की आकर्षक झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री कुलस्ते ने कहा कि छात्रावास विद्यार्थियों के लिए केवल रहने की व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सामने आगे बढ़ने के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। पढ़ाई के साथ खेल, कला, संस्कृति, विज्ञान और तकनीकी जैसे क्षेत्रों में भी अपनी रुचि एवं प्रतिभा के अनुसार भविष्य बनाया जा सकता है। इसके लिए विद्यार्थियों को छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अपने ज्ञान एवं कौशल को लगातार विकसित करना चाहिए।
जिला स्तरीय छात्रावास दिवस समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, छात्रावास अधीक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को जीवंत बनाया, वहीं कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी पढ़ाई, दिनचर्या और छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
छात्रावास केवल आवास नहीं, शिक्षा और संस्कार का केंद्र : सांसद कुलस्ते
छात्रावास दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए छात्रावासों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को एक साथ रहकर सीखने, एक-दूसरे का सहयोग करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
उनके अनुसार, छात्रावास का महत्व केवल विद्यार्थियों को रहने और पढ़ने की जगह उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यहां विकसित होने वाली अनुशासन की भावना, आपसी सहयोग, सामाजिक व्यवहार और जिम्मेदारी की समझ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सांसद ने विद्यार्थियों को छात्रावास दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। लक्ष्य निर्धारित करने के बाद उन्हें प्राप्त करने के लिए नियमित अध्ययन, मेहनत और अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि सफलता प्राप्त करने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि निरंतर प्रयास और अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीरता भी आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन का सम्मान करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
पढ़ाई के साथ खेल, कला और तकनीकी क्षेत्र में भी आगे बढ़ें विद्यार्थी
सांसद श्री कुलस्ते ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थियों के सामने आगे बढ़ने के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। शिक्षा के साथ-साथ खेल, कला, संस्कृति, विज्ञान और तकनीकी जैसे क्षेत्रों में भी अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी रुचियों को पहचानें और उन्हें विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास करें। केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित रहने के बजाय ज्ञान और कौशल के अन्य क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश करें।
वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, व्यवहारिक समझ, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी है। ऐसे में खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां और रचनात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में उपयोगी हो सकते हैं।
सांसद ने छात्रावासों में उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं का पूरा लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए। नियमित अध्ययन, अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक सोच के माध्यम से वे अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकते हैं।
जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की दिखी आकर्षक झलक
छात्रावास दिवस समारोह का एक प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। छात्र-छात्राओं ने समूह गायन, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इन प्रस्तुतियों में जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं की आकर्षक झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से प्रस्तुतियां देकर अपनी कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का परिचय दिया।
जनजातीय संस्कृति में लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, सामूहिकता और परंपरागत जीवनशैली का विशेष महत्व रहा है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने और उसे समझने का अवसर मिलता है।
छात्रावास दिवस जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराते हैं। इससे उन विद्यार्थियों को भी अपनी क्षमता सामने लाने का अवसर मिलता है, जिनकी रुचि केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है।
समूह गायन और नृत्य जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों को आपसी तालमेल, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी का अनुभव भी मिलता है। वहीं नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से वे अपनी अभिव्यक्ति क्षमता और मंच पर प्रस्तुति देने का आत्मविश्वास विकसित कर सकते हैं।
इस प्रकार सांस्कृतिक गतिविधियां छात्रावासों में शिक्षा के साथ रचनात्मक वातावरण तैयार करने में सहायक हो सकती हैं।
कलेक्टर ने विद्यार्थियों से किया संवाद, पढ़ाई और सुविधाओं की ली जानकारी
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने उनकी पढ़ाई, दैनिक दिनचर्या और छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
कलेक्टर द्वारा विद्यार्थियों से संवाद करना कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने और अपनी प्रतिभा एवं कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों का बेहतर उपयोग करते हुए अपने भविष्य को संवारने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक वातावरण के साथ-साथ दैनिक सुविधाओं का महत्व भी होता है। पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण, अनुशासित दिनचर्या और आवश्यक संसाधन विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
ऐसे में छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों से प्रशासनिक अधिकारियों का सीधा संवाद उपयोगी माना जाता है। इससे विद्यार्थियों को अपनी बात रखने और अपनी आवश्यकताओं से अधिकारियों को अवगत कराने का अवसर मिलता है।
छात्रावासों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों की पढ़ाई, दिनचर्या और उपलब्ध सुविधाओं की नियमित जानकारी लेते रहना भी महत्वपूर्ण है।
छात्रावासों में व्यक्तित्व विकास और अनुशासन की भूमिका
छात्रावास जीवन विद्यार्थियों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण होता है। घर और परिवार से अलग रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को यहां अपनी दिनचर्या स्वयं व्यवस्थित करने, समय का प्रबंधन करने और सामूहिक जीवन के नियमों का पालन करने का अनुभव मिलता है।
छात्रावास में अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थी एक साथ रहते हैं। इस दौरान उन्हें एक-दूसरे की परिस्थितियों, विचारों और अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है।
छात्रावासों में शिक्षा के साथ संस्कार और व्यक्तित्व विकास पर जोर दिए जाने का उद्देश्य भी यही है कि विद्यार्थी भविष्य में जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें।
विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण पक्षों पर ध्यान देना आवश्यक है।
- नियमित अध्ययन: पढ़ाई के लिए निर्धारित समय और अनुशासित दिनचर्या अपनाना।
- अनुशासन: समय का पालन करना और अपनी जिम्मेदारियों को समझना।
- आपसी सहयोग: साथी विद्यार्थियों के साथ सहयोग और सम्मान का व्यवहार रखना।
- सांस्कृतिक गतिविधियां: कला, संगीत, नृत्य और रचनात्मक कार्यक्रमों में भाग लेना।
- खेलकूद: शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से सक्रियता और टीम भावना विकसित करना।
- कौशल विकास: विज्ञान, तकनीकी और अन्य रुचि के क्षेत्रों में ज्ञान बढ़ाना।
इन गतिविधियों को नियमित रूप से प्रोत्साहित किए जाने से छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और विकसित करने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में छात्रावासों का महत्व
जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की भूमिका विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास के अवसर उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण है।
छात्रावासों में विद्यार्थियों को सामूहिक वातावरण में रहने और पढ़ने का अवसर मिलता है। यहां शिक्षा के साथ सामाजिक व्यवहार, अनुशासन और सहयोग जैसी आदतों को विकसित करने की संभावनाएं रहती हैं।
जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों का महत्व विशेष रूप से है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।
सांसद श्री कुलस्ते द्वारा अपने संबोधन में शिक्षा के साथ खेल, कला, संस्कृति, विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने की बात कहना इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने लाता है।
छात्रावासों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के साथ उनकी व्यक्तिगत रुचियों को भी महत्व दिया जाना जरूरी है। इससे उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और भविष्य के लिए बेहतर दिशा चुनने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही उपस्थिति
छात्रावास बींझावाड़ा में आयोजित जिला स्तरीय छात्रावास दिवस समारोह में अनेक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती डेहरिया, जनपद अध्यक्ष श्रीमती किरण भलावी, कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी एवं सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री लालजीराम मीना सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए।
इसके अलावा छात्रावास अधीक्षक, विभागीय स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके शैक्षणिक और रचनात्मक विकास से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई।
सहभोज के साथ हुआ छात्रावास दिवस समारोह का समापन
कार्यक्रम के समापन पर सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों और छात्रावास स्टाफ ने सहभागिता की।
सहभोज सामूहिक सहभागिता और आपसी मेलजोल का प्रतीक रहा। छात्रावास में एक साथ रहने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए ऐसे आयोजन आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
दिनभर आयोजित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से संवाद करने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिला।
शिक्षा के साथ संस्कार और प्रतिभा विकास पर जोर
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर सिवनी के छात्रावास बींझावाड़ा में आयोजित जिला स्तरीय छात्रावास दिवस समारोह में शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और व्यक्तित्व विकास के महत्व को रेखांकित किया गया।
सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाने का संदेश दिया। वहीं कलेक्टर श्रीमती अंजू अरुण कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी पढ़ाई और छात्रावास की सुविधाओं की जानकारी ली।
विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। सहभोज के साथ संपन्न हुए इस आयोजन ने छात्रावासों को शिक्षा के साथ रचनात्मकता, संस्कार और सामूहिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।
छात्रावासों की वास्तविक उपयोगिता तभी और अधिक बढ़ेगी, जब विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर सुविधाओं, अनुशासित वातावरण और अपनी प्रतिभा निखारने के पर्याप्त अवसर निरंतर उपलब्ध होते रहेंगे।