(ब्यूरो कार्यालय)
भोपाल/इंदौर/जबलपुर (साई)। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए अहम खबर है। प्रदेश में योजना के नियमों और निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन नहीं करने वाले 65 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें इंदौर के 17 और जबलपुर के सात अस्पताल शामिल बताए गए हैं। यह निर्णय 8 अक्टूबर 2026 को राज्य इम्पैनलमेंट कमेटी की बैठक में लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद आयुष्मान कार्डधारकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब उन्हें किन अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इंदौर में योजना से संबद्ध अस्पतालों की संख्या पहले 91 बताई गई थी, जो अब घटकर 74 रह गई है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्पताल की वर्तमान स्थिति की पुष्टि करना बेहद जरूरी हो गया है।
कार्रवाई के पीछे नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स यानी NABH की मान्यता संबंधी शर्तों का पालन नहीं करना प्रमुख कारणों में शामिल है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश के सभी 65 अस्पतालों पर कार्रवाई का कारण एक जैसा नहीं था। इसलिए मरीजों को यह समझना चाहिए कि अस्पताल की सूची से संबद्धता समाप्त होने का उनके इलाज पर क्या असर पड़ेगा और उन्हें आगे क्या करना चाहिए।
7. आखिर क्या है पूरा मामला?
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित उपचार के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए अस्पतालों को योजना की पात्रता, गुणवत्ता, उपचार और प्रशासनिक शर्तों का पालन करना होता है।
मध्य प्रदेश में निजी अस्पतालों की योजना से संबद्धता को लेकर अक्टूबर 2026 में सख्ती बढ़ाई गई। राज्य इम्पैनलमेंट कमेटी की 8 अक्टूबर की बैठक में कुल 65 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इनमें से 60 अस्पतालों पर NABH मान्यता संबंधी शर्तों के पालन में कमी के कारण कार्रवाई हुई, जबकि पांच अस्पतालों को पिछले छह महीने से आयुष्मान लाभार्थियों का उपचार नहीं करने के आधार पर सूची से हटाया गया। इस प्रकार, यह कहना सही नहीं होगा कि सभी 65 अस्पताल केवल NABH प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण बाहर हुए हैं।
यह फैसला उन मरीजों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से किसी एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं या गंभीर बीमारी के उपचार के लिए वहां जाने की तैयारी कर रहे हैं।
8. NABH मान्यता क्या है और इसे क्यों जरूरी किया गया?
NABH का पूरा नाम नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स है। यह अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करने वाली मान्यता व्यवस्था है।
इसका उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, उपचार प्रक्रियाओं, संक्रमण नियंत्रण, कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य सेवाओं के निर्धारित मानकों को बेहतर बनाना है।
अस्पताल की NABH मान्यता का मतलब यह नहीं है कि वहां हर मरीज को निश्चित रूप से बेहतर परिणाम मिलेगा। इसका संबंध निर्धारित गुणवत्ता प्रक्रियाओं और मानकों के अनुपालन से है।
एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट क्या होता है?
NABH एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट अस्पतालों के लिए शुरुआती स्तर की गुणवत्ता मान्यता है। इसमें निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं का मूल्यांकन किया जाता है।
मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के लिए इस मान्यता की अनिवार्यता को लेकर अक्टूबर में सख्ती की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ अस्पतालों की मान्यता की वैधता समाप्त हो गई थी, जबकि कुछ अस्पताल आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं कर पाए थे।
ऐसे मामलों में अस्पताल की योजना से संबद्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, मरीजों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रमाणपत्र की स्थिति और आयुष्मान योजना में अस्पताल की वर्तमान संबद्धता दो अलग-अलग बातें हैं। इलाज की पात्रता की पुष्टि योजना की अद्यतन सूची से ही की जानी चाहिए।
9. इंदौर में 91 से घटकर 74 अस्पतालों में मिलेगा लाभ
इंदौर में आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों की सूची में बदलाव मरीजों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शहर में पहले 91 अस्पताल योजना के तहत उपचार की सुविधा दे रहे थे। 17 अस्पतालों को सूची से बाहर किए जाने के बाद यह संख्या 74 रह गई है।
इसका अर्थ है कि मरीजों को पुराने अनुभव या पहले से उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अस्पताल में पहुंचने के बजाय उसकी वर्तमान संबद्धता जांचनी चाहिए।
इंदौर के 17 अस्पतालों के नाम
उपलब्ध समाचार विवरण में निम्नलिखित अस्पतालों के नाम सूची से बाहर किए गए अस्पतालों में बताए गए हैं:
- चोइथराम नेत्रालय
- पीएटी अस्पताल
- लक्ष्मी मेमोरियल अस्पताल
- दृश्य अस्पताल
- मेकरेटिना
- गुरुजी सेवा न्यास
- एमएस एनर्जी
- बांठिया अस्पताल
- एमएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
- वर्मा यूनियन हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड
- खंडेलवाल अस्पताल
- मोहक हाईटेक स्पेशियलिटी
- गीता भवन अस्पताल
- सेवाकुंज
- मेडिस्टा
- आर्थोस क्लिनिक
- मेवाड़ा अस्पताल
महत्वपूर्ण: अस्पतालों के नामों की वर्तनी और उनकी वर्तमान योजना-संबद्धता की पुष्टि संबंधित आधिकारिक सूची से करना उचित होगा। सूची से बाहर होने का अर्थ यह है कि संबद्धता बहाल होने या स्थिति बदलने तक वहां आयुष्मान योजना के तहत नए उपचार की सुविधा उपलब्ध होने की पुष्टि नहीं मानी जा सकती।
10. जबलपुर के सात अस्पताल भी कार्रवाई के दायरे में
जबलपुर में भी आयुष्मान कार्डधारकों को उपचार कराने से पहले अस्पताल की पात्रता जांचने की जरूरत है। उपलब्ध जानकारी में शहर के सात निजी अस्पतालों के नाम सामने आए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- नेशनल अस्पताल
- पीजी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल
- मोहनलाल हरगोविंददास पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल
- समर्थ श्री मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल
- सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
- गोलछा अस्पताल
- जेके अस्पताल
इन अस्पतालों के नाम सामने आने से मरीजों को यह समझना चाहिए कि पुराने रेफरल, डॉक्टर की सलाह या पूर्व में आयुष्मान कार्ड से उपचार मिलने के आधार पर वर्तमान सुविधा मान लेना उचित नहीं है।
किसी अस्पताल में सामान्य रूप से इलाज उपलब्ध होना और वहां आयुष्मान योजना के अंतर्गत कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध होना अलग-अलग बातें हैं।
अभी तक विश्वसनीय रूप से सामने आए नाम
इंदौर के 17 अस्पताल — दैनिक जागरण/नईदुनिया में प्रकाशित सूची के अनुसार:
- चोइथराम नेत्रालय
- पीएटी हॉस्पिटल
- लक्ष्मी मेमोरियल
- दर्श हॉस्पिटल
- मेक्रेटिना
- गुरुजी सेवा न्यास
- एमएस एनर्जी
- बांठिया हॉस्पिटल
- एमएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
- वर्मा यूनियन हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड
- खंडेलवाल हॉस्पिटल
- मोहक हाईटेक स्पेशियलिटी
- गीता भवन हॉस्पिटल
- सेवाकुंज हॉस्पिटल
- मेडिस्टा
- आर्थोस क्लिनिक
- मेवाड़ा हॉस्पिटल
जबलपुर के 7 अस्पताल:
- नेशनल अस्पताल
- पीजी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल
- मोहनलाल हरगोविंददास पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल
- समर्थ श्री मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल
- सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
- गोलछा अस्पताल
- जेके अस्पताल
पिछले छह महीने में आयुष्मान मरीजों का उपचार नहीं करने वाले 5 अस्पताल:
| अस्पताल | जिला |
| शाल्या जॉइंट केयर | भोपाल |
| मेट्रो न्यूरो हॉस्पिटल | ग्वालियर |
| रामनिवास आयरन हॉस्पिटल | नीमच |
| श्री डीपी केयर हॉस्पिटल | शाजापुर |
| न्यू सिटी हॉस्पिटल | टीकमगढ़ |
11. क्या आयुष्मान कार्ड अब काम नहीं करेगा?
नहीं। किसी अस्पताल की संबद्धता समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि मरीज का आयुष्मान कार्ड ही अमान्य हो गया है।
आयुष्मान कार्ड की पात्रता और अस्पताल की योजना से संबद्धता अलग-अलग विषय हैं। यदि मरीज योजना के लिए पात्र है, तो वह वर्तमान में संबद्ध किसी दूसरे अस्पताल में निर्धारित नियमों और पैकेज के अनुसार इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
- अस्पताल की सूची से संबद्धता हटने पर वहां आयुष्मान कार्ड से कैशलेस उपचार की सुविधा प्रभावित होती है।
- मरीज किसी अन्य पात्र और संबद्ध अस्पताल में उपचार के विकल्प तलाश सकता है।
- अस्पताल की संबद्धता बहाल होने पर स्थिति बदल सकती है।
- हर बीमारी और उपचार पैकेज के लिए योजना के अलग नियम हो सकते हैं।
- केवल अस्पताल का नाम सूची में होने से प्रत्येक प्रकार के इलाज की मंजूरी सुनिश्चित नहीं होती।
इसलिए मरीज को इलाज से पहले अस्पताल और संबंधित उपचार पैकेज, दोनों की पुष्टि करनी चाहिए।
12. आयुष्मान कार्डधारक इलाज से पहले क्या करें?
इस बदलाव के बाद मरीजों और उनके परिजनों के लिए कुछ सावधानियां बेहद उपयोगी हो सकती हैं।
अस्पताल जाने से पहले करें ये पांच काम
पहला: अस्पताल की वर्तमान संबद्धता जांचें। जिस अस्पताल में इलाज कराने की योजना है, उसकी आयुष्मान योजना में वर्तमान स्थिति की पुष्टि करें।
दूसरा: संबंधित विभाग में फोन करें। अस्पताल के आयुष्मान सहायता काउंटर से पूछें कि संबंधित बीमारी और उपचार के लिए कैशलेस सुविधा उपलब्ध है या नहीं।
तीसरा: जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। आयुष्मान कार्ड, पहचान संबंधी दस्तावेज, पुराने मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह साथ रखें।
चौथा: दूसरे अस्पताल का विकल्प तैयार रखें। यदि पसंदीदा अस्पताल योजना के अंतर्गत उपचार नहीं दे रहा है, तो नजदीकी संबद्ध अस्पताल की जानकारी पहले से प्राप्त करें।
पांचवां: आपातकाल में देरी न करें। गंभीर स्थिति में पहले आवश्यक चिकित्सा सहायता लें। अस्पताल की योजना-संबद्धता और भुगतान संबंधी जानकारी के लिए उपचार में खतरनाक देरी न करें।
13. इस फैसले का मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
इस कार्रवाई का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव उन मरीजों पर पड़ सकता है, जो किसी विशेष निजी अस्पताल पर निर्भर हैं। उन्हें दूसरे अस्पताल में जाना पड़ सकता है, जिससे यात्रा, समय और इलाज की व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों से बड़े शहरों में उपचार के लिए आने वाले परिवारों के लिए यह बदलाव और महत्वपूर्ण हो जाता है। कई बार मरीज डॉक्टर से परामर्श लेने, जांच कराने या भर्ती होने की योजना पहले से बनाते हैं। यदि अस्पताल में आयुष्मान सुविधा उपलब्ध न हो, तो उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
दूसरी ओर, गुणवत्ता मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने से अस्पतालों में निर्धारित प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रोत्साहन मिल सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि नियमों की जानकारी अस्पतालों को समय पर मिले, प्रमाणपत्र संबंधी प्रक्रिया स्पष्ट हो और मरीजों को अद्यतन सूची आसानी से उपलब्ध कराई जाए।
मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती
सबसे बड़ी चुनौती सही और ताजा जानकारी की उपलब्धता है। यदि अस्पताल की सूची बदल गई है, लेकिन मरीजों को इसकी जानकारी नहीं मिली, तो उन्हें अस्पताल पहुंचने के बाद परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए प्रशासन, अस्पतालों और योजना के सहायता केंद्रों के बीच जानकारी का स्पष्ट और समयबद्ध संचार महत्वपूर्ण है।
14. आगे क्या हो सकता है?
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित अस्पताल निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं और उनकी योजना-संबद्धता बहाल होती है या नहीं।
जो अस्पताल आवश्यक मान्यता और अन्य शर्तें पूरी करने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें अपनी वर्तमान स्थिति के संबंध में संबंधित प्राधिकरण से जानकारी लेनी चाहिए। हालांकि, किसी अस्पताल की संबद्धता कब बहाल होगी, इसकी निश्चित तारीख उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं बताई जा सकती।
मरीजों के लिए भी जरूरी है कि वे केवल पुरानी सूचियों या अपुष्ट संदेशों पर निर्भर न रहें। उपचार से पहले अस्पताल की वर्तमान स्थिति की पुष्टि करना ही सबसे व्यावहारिक कदम है।
मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत 65 अस्पतालों पर हुई कार्रवाई ने अस्पतालों की पात्रता और गुणवत्ता संबंधी नियमों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्थिति पैदा की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंदौर के 17 और जबलपुर के सात अस्पताल इस कार्रवाई के दायरे में हैं। इंदौर में आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों की संख्या 91 से घटकर 74 बताई गई है।
हालांकि, मरीजों को यह समझना जरूरी है कि इस कार्रवाई से उनका आयुष्मान कार्ड स्वतः अमान्य नहीं हो जाता। वे योजना के नियमों के अनुसार अन्य संबद्ध अस्पतालों में उपचार के विकल्प तलाश सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि अस्पताल जाने से पहले उसकी वर्तमान संबद्धता, संबंधित बीमारी के उपचार की उपलब्धता और कैशलेस सुविधा की पुष्टि अवश्य करें। सही जानकारी से समय की बचत होगी और इलाज के दौरान अनावश्यक परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत कितने अस्पतालों पर कार्रवाई हुई?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को लिए गए निर्णय के तहत प्रदेश के 65 अस्पतालों पर कार्रवाई की गई। इनमें 60 अस्पतालों पर NABH मान्यता संबंधी शर्तों और पांच अस्पतालों पर उपचार उपलब्ध नहीं कराने से संबंधित कारणों के आधार पर कार्रवाई बताई गई है।
2. इंदौर के कितने अस्पताल आयुष्मान योजना की सूची से बाहर हुए?
उपलब्ध विवरण के अनुसार, इंदौर के 17 अस्पतालों को सूची से बाहर किया गया है। शहर में संबद्ध अस्पतालों की संख्या 91 से घटकर 74 बताई गई है।
3. जबलपुर के किन अस्पतालों पर कार्रवाई हुई?
उपलब्ध जानकारी में नेशनल अस्पताल, पीजी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल, मोहनलाल हरगोविंददास पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल, समर्थ श्री मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल, सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, गोलछा अस्पताल और जेके अस्पताल के नाम शामिल हैं।
4. NABH मान्यता क्यों जरूरी है?
NABH मान्यता अस्पतालों में निर्धारित गुणवत्ता प्रक्रियाओं, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों का आकलन करने से संबंधित है। मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के लिए संबंधित मान्यता की शर्तों को लेकर सख्ती की गई है।
5. अगर अस्पताल आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं करता तो क्या करें?
सबसे पहले अस्पताल की वर्तमान योजना-संबद्धता और संबंधित उपचार की पात्रता की पुष्टि करें। जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे संबद्ध अस्पताल का विकल्प तलाशें और योजना के आधिकारिक सहायता माध्यम से जानकारी प्राप्त करें।
6. क्या आयुष्मान कार्ड से इलाज पूरी तरह बंद हो गया है?
नहीं। कार्रवाई का संबंध संबंधित अस्पतालों की योजना-संबद्धता से है, सभी आयुष्मान कार्डधारकों की पात्रता समाप्त होने से नहीं। पात्र मरीज निर्धारित नियमों के अनुसार दूसरे संबद्ध अस्पतालों में उपचार करा सकते हैं।