स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता: सिवनी की ज्ञानता बाई की कहानी

(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। सिवनी के कुरई विकासखंड की ग्राम पंचायत बोरीगांव में रहने वाली श्रीमती ज्ञानता बाई ने गीता स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह के समर्थन से उन्होंने बैंक के कैश क्रेडिट लिंकेज (CCL) के तहत ऋण लेकर अगरबत्ती निर्माण मशीन स्थापित की और उत्पादन शुरू किया। इस पहल ने न केवल उन्हें नियमित आय का साधन दिया, बल्कि स्थानीय महिलाओं में आत्मविश्वास भी जगाया।

व्यवसाय विस्तार और वित्तीय सहयोग

अगरबत्ती उत्पादन में सफलता के बाद ज्ञानता बाई ने दोना‑पत्तल निर्माण में भी विस्तार करने का निर्णय लिया। संकुल स्तरीय संघ (CLF) के माध्यम से अतिरिक्त 6 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर दोना‑पत्तल मशीन स्थापित की। दोनों इकाइयों के संचालन से उत्पादन क्षमता में 30 % की वृद्धि हुई और स्थानीय बाजार में उनकी मांग स्थिर रही। इस वित्तीय सहयोग ने ग्रामीण उद्यमियों के लिए मॉडल स्थापित किया, जहाँ सरकारी योजनाओं और स्व‑सहायता समूहों का समन्वय व्यावहारिक परिणाम देता है।

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आय और सामाजिक प्रभाव

वर्तमान में ज्ञानता बाई दोनों इकाइयों से प्रतिमाह लगभग 15,000 से 20,000 रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह आय परिवार के दैनिक खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में सीधे उपयोग हो रही है। आर्थिक स्थिरता ने महिलाओं को सामाजिक रूप से सशक्त किया है, जिससे वे घर के निर्णय‑प्रक्रिया में अधिक भागीदारी कर रही हैं। इस सफलता ने पड़ोस की अन्य महिलाएँ भी स्वरोजगार की ओर प्रेरित की हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में योगदान मिला है।

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खबर के प्रमुख बिंदु

• कंपनी/समूह: गीता स्व‑सहायता समूह
• आयोजन: अगरबत्ती एवं दोना‑पत्तल उत्पादन इकाई की स्थापना
• स्थान: सिवनी, बोरीगांव
• मुख्य उद्देश्य: स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: CCL और CLF ऋण के तहत दो नई इकाइयों का संचालन
• लक्ष्य: मासिक आय 15‑20 हजार रुपये, महिलाओं का सशक्तिकरण

निष्कर्ष

ज्ञानता बाई की कहानी दर्शाती है कि सरकारी वित्तीय योजनाओं, स्व‑सहायता समूहों और आधुनिक उत्पादन तकनीक के सही संयोजन से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। निरंतर आय उत्पन्न करने वाले छोटे उद्योग न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारते हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव को भी तेज़ करते हैं। भविष्य में इस मॉडल को अन्य जिलों में दोहराने से ग्रामीण भारत में सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।