(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। बिनोरी जीवाश्म क्षेत्र, उत्तर सिवनी के घंसौर (सा.) बीट के पूर्व भाग में स्थित, आज वन मंडलाधिकारी उत्तर सिवनी डॉ महेंद्र सिंह उइके द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण का उद्देश्य क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्यों की जाँच और स्वीकृति देना था। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एल. कृष्णमूर्ति ने पहले इस स्थल के संरक्षण एवं पर्यटन विकास के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया था। डॉ उइके ने सभी प्रस्तावित कार्यों का मूल्यांकन कर विकास कार्य प्रारम्भ करने की स्वीकृति प्रदान की, जिससे इस प्राचीन जीवाश्म स्थल का संरक्षण और पर्यटन संभावनाएँ सुदृढ़ होंगी।
विकास योजना का विवरण
वन मंडलाधिकारी ने प्रस्तावित कार्यों में जीवाश्म क्षेत्र का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण, सुरक्षित पहुंच मार्ग का निर्माण, प्राकृतिक एवं लोहे की फेंसिंग, पगोडा निर्माण, नेचर ट्रेल की स्थापना, पर्यटक सुविधा केंद्र, सूचना एवं व्याख्या बोर्ड, तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को शामिल किया है। इन उपायों से न केवल फॉसिल साइट की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि पर्यटकों के लिए सहज एवं शिक्षाप्रद अनुभव भी प्रदान किया जाएगा। कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और पर्यावरणीय मंजूरी भी इस चरण में पूरी कर ली गई है।
संरक्षण एवं पर्यटन महत्व
बिनोरी क्षेत्र में प्राचीन वृक्षों के जीवाश्मीकृत काष्ठ (Petrified Wood Fossils) के अवशेष विभिन्न स्थानों पर दिखाई देते हैं, जो भूवैज्ञानिक इतिहास और प्राकृतिक विरासत के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन फॉसिलों की लंबी, खंडित एवं गोलाकार आकृतियाँ प्राचीन वनस्पति के तनों और शाखाओं का संकेत देती हैं। संरक्षण कार्यों के साथ-साथ नेचर ट्रेल और सूचना बोर्ड स्थापित कर इस स्थल को इको‑टूरिज्म के केंद्र में बदलने की योजना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: उत्तर सिवनी वन मंडल
• आयोजन: बिनोरी जीवाश्म क्षेत्र विकास कार्यों का निरीक्षण और स्वीकृति
• स्थान: बिनोरी, घंसौर (सा.) बीट, उत्तर सिवनी
• मुख्य उद्देश्य: संरक्षण, सौंदर्यीकरण और इको‑टूरिज्म विकास
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: सुरक्षित पहुंच मार्ग, नेचर ट्रेल, सूचना बोर्ड, फेंसिंग, पगोडा निर्माण
• लक्ष्य: प्राकृतिक विरासत का संरक्षण और सतत पर्यटन वृद्धि
वन मंडलाधिकारी की स्वीकृति से बिनोरी जीवाश्म क्षेत्र के संरक्षित विकास की दिशा स्पष्ट हो गई है। नियमित निरीक्षण, आधुनिक तकनीक का उपयोग और कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देकर यह पहल क्षेत्र की ऑपरेशनल उत्कृष्टता और सतत विकास में योगदान देगी। भविष्य में इस प्राचीन फॉसिल साइट को एक प्रमुख इको‑टूरिज्म गंतव्य बनाकर स्थानीय समुदाय और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुंचाने की उम्मीद है।