(रश्मि सिन्हा)
नई दिल्ली (साई)। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने अगस्त 2024 में 221 दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल की सूचना दी। इस जांच में 191 सैंपल राज्य लैबों में और 29 सैंपल केंद्रीय लैब में फेल हुए। फेल हुए दवाओं में दर्द निवारक से लेकर डायबिटीज़ की दवाइयाँ शामिल हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर दवा सुरक्षा की चिंता बढ़ी है।
जांच के परिणाम और राज्यवार विवरण
हिमाचल प्रदेश ने सबसे अधिक 63 दवाओं के फेल सैंपल दर्ज किए, उसके बाद उत्तराखंड (39) और गुजरात (17) ने क्रमशः उच्च संख्या रिपोर्ट की। महाराष्ट्र (16), मध्य प्रदेश (12), तमिलनाडु और हरियाणा (प्रत्येक 11) भी इस सूची में शामिल हैं। सिक्किम, उत्तर प्रदेश (प्रत्येक 9), पंजाब (8), तेलंगाना (6) तथा आंध्र प्रदेश, दमन, केरल, पुडुचेरी (प्रत्येक 3-4) ने भी मानकों से कम दवाओं की पुष्टि की। जम्मू‑कश्मीर, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और राजस्थान में प्रत्येक एक दवा फेल मिली। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि दवा गुणवत्ता में अंतर-राज्यीय असमानता मौजूद है।
सरकारी कार्रवाई और भविष्य की दिशा
CDSCO ने फेल सैंपल की पहचान के बाद संबंधित दवा कंपनियों को नोटिस जारी किया और बैच‑वार पुनः परीक्षण का आदेश दिया। औषधि विभाग आगे की कार्रवाई के लिए नियामक दंड, रीकॉल या लाइसेंस रद्द करने की संभावना रखता है। साथ ही, केंद्र ने क्वालिटी कंट्रोल को सुदृढ़ करने के लिए नई तकनीकी उपकरणों और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को लागू करने की योजना बताई है, जिससे भविष्य में समान त्रुटियों को रोका जा सके।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कुल सैंपल: 221
• फेल सैंपल: 221 (191 राज्य लैब, 29 केंद्रीय लैब)
• सबसे अधिक फेल: हिमाचल प्रदेश (63)
• मध्य प्रदेश में फेल: 12 दवाएँ
• प्रमुख दवा वर्ग: दर्द निवारक, डायबिटीज़, कॉस्मेटिक
• नियामक एजेंसी: CDSCO
• आगामी कदम: बैच‑वार पुनः परीक्षण, संभावित रीकॉल, तकनीकी उन्नयन
• लक्ष्य: राष्ट्रीय दवा गुणवत्ता मानकों का सख्त पालन
निष्कर्ष
दवा क्वालिटी टेस्ट में व्यापक फेल ने भारत में औषधि सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ा दी है। नियमित निरीक्षण, आधुनिक परीक्षण तकनीक और कड़े नियामक उपायों के संयोजन से ही दवा उद्योग में भरोसा पुनः स्थापित किया जा सकता है। भविष्य में निरंतर समीक्षा और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान देकर, CDSCO और राज्य स्तर की लैबें औषधि गुणवत्ता में स्थायी सुधार सुनिश्चित कर सकती हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता दोनों को लाभ होगा।