(सुमित खरे)
जबलपुर (साई)। भोजपुर के जबलपुर में शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को राजा शंकर शाह‑रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस समारोह आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य भाषण दिया, जहाँ उन्होंने 1857 के विद्रोह में इन जनजातीय महापुरुषों की भूमिका, उनके साहित्यिक योगदान और शहादत को प्रमुखता से बताया। समारोह का उद्देश्य इन शहीदों की स्मृति को जीवित रखना और जनजातीय समुदाय के विकास के लिए नई पहलों की घोषणा करना था।
इतिहास और सांस्कृतिक महत्व
राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ कविताओं, गीतों और लेखन के माध्यम से जनजागृति की। उनके लिखे गीतों ने 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन में जनता में नई ऊर्जा का संचार किया और ब्रिटिश अधिकारियों को चुनौती दी। अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना कर धर्म परिवर्तन और महारानी की अधीनता की शर्तें रखीं, पर शंकर शाह ने दृढ़ता से इन शर्तों को अस्वीकार किया और अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अडिग रहे। अंततः उन्हें तोप से बांध कर शहीद किया गया, जिससे जनसमुदाय में उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान की भावना और गहरी हुई।
मुख्यमंत्री का संबोधन और नई पहल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शंकर शाह‑रघुनाथ शाह की शहादत को राष्ट्रीय गौरव के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि उनका साहस आज के युवा और जनजातीय समुदाय के लिए प्रेरणा है। उन्होंने ‘नमो-प्रेरणा अभियान’ का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनजातीय विकास के समर्पित कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए, दो फिल्मों के निर्माण की घोषणा की गई, जो इन महापुरुषों के जीवन को बड़े पर्दे पर लाएंगी।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: नहीं लागू
• आयोजन: राजा शंकर शाह‑रघुनाथ शाह बलिदान दिवस समारोह
• स्थान: जबलपुर, मध्य प्रदेश
• मुख्य उद्देश्य: शहीदों की स्मृति, जनजातीय इतिहास की पुनर्स्मृति, नई विकास पहल
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: नमो-प्रेरणा अभियान का शुभारंभ, दो फिल्म प्रोजेक्ट की घोषणा, जनजातीय शिक्षा‑स्वास्थ्य कार्यक्रम
• लक्ष्य: जनजातीय समुदाय में सामाजिक‑आर्थिक सुधार, सांस्कृतिक जागरूकता, युवा प्रेरणा
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि शंकर शाह‑रघुनाथ शाह की शहादत को केवल इतिहास की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा माना जाना चाहिए। नियमित स्मरण कार्यक्रम, आधुनिक तकनीक के माध्यम से सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण और निरंतर सामाजिक पहलें ऑपरेशनल उत्कृष्टता और सतत विकास के लिए आधारशिला होंगी। इस प्रकार, जनजातीय वीरों की विरासत को सशक्त बनाते हुए, भारत की समग्र प्रगति में उनका योगदान सुनिश्चित किया जाएगा।