(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)।शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) सिवनी ने सत्र 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम तिथि 22 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है। यह निर्णय 17 सितंबर को जारी किए गए आधिकारिक विज्ञापन के बाद लागू हुआ। इच्छुक छात्र‑छात्राएँ 15 से 22 सितंबर के बीच ‘पहले आओ, पहले पाओ’ आधार पर उपलब्ध रिक्त सीटों पर ऑनलाइन पोर्टल dsd.mp.gov.in के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। यह विस्तार सभी वर्गों के उम्मीदवारों को समयसापेक्ष रूप से आवेदन करने का अवसर प्रदान करता है।
प्रवेश प्रक्रिया और उपलब्ध ट्रेड
आवेदक अपने व्यक्तिगत विवरण, शैक्षणिक योग्यता और पसंदीदा ट्रेड को पोर्टल पर दर्ज कर, दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं। आईटीआई सिवनी में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, प्लम्बिंग, फिटर, सिलाई आदि विभिन्न तकनीकी ट्रेड उपलब्ध हैं, जिनमें प्रत्येक ट्रेड के लिए अलग‑अलग सीटें निर्धारित हैं। चयन प्रक्रिया मेरिट और उपलब्धता के आधार पर स्वचालित रूप से की जाती है, और चयनित उम्मीदवारों को पोर्टल पर ही प्रवेश पत्र डाउनलोड करने का विकल्प मिलता है। इस सत्र में पुरुष और महिला दोनों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किया गया है।
महिला अभ्यर्थियों के लिए विशेष रियायतें
सरकार ने इस सत्र में महिला उम्मीदवारों के लिए कई प्रोत्साहन उपाय लागू किए हैं। प्रशिक्षण शुल्क पर 25 प्रतिशत की छूट दी गई है और भुगतान दो किश्तों में करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, कुल सीटों में से 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं, जिससे तकनीकी शिक्षा में महिला भागीदारी बढ़ेगी। इन रियायतों का उद्देश्य महिलाओं को स्किल्ड रोजगार की दिशा में प्रोत्साहित करना और लैंगिक समानता को सुदृढ़ करना है।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) सिवनी
• आयोजन: 2026 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया
• स्थान: सिवनी
• मुख्य उद्देश्य: तकनीकी शिक्षा में प्रवेश को सुगम बनाना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: अंतिम तिथि 22 सितंबर, महिला शुल्क छूट 25%, दो किश्तों में भुगतान, 35% आरक्षित सीटें
• लक्ष्य: योग्य युवा को स्किल्ड रोजगार के अवसर प्रदान करना
आईटीआई सिवनी द्वारा दी गई विस्तारित समय सीमा और महिला‑केन्द्रित रियायतें तकनीकी कौशल विकास में समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। नियमित रूप से आयोजित प्रवेश समीक्षाएँ और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ संस्थान की कार्यक्षमता को बढ़ाएंगी, जिससे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग‑आधारित रोजगार के अवसर सुदृढ़ होंगे। भविष्य में भी इस तरह की पहलें सतत विकास और सामाजिक समानता के प्रमुख स्तंभ बनेंगी।