(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। जिला-एक-उत्पाद (ODOP) पहल के अंतर्गत चयनित सीताफल को जीआई टैग मिला है और इसे किसानों की समृद्धि का आधार बनाने के लिए कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने ‘सीताफल से समृद्धि’ अभियान शुरू किया। अभियान के अंतिम चरण में सीताफल पौधों की गणना, सर्वेक्षण और उत्पादक किसानों का पंजीयन पूरा हो रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना और स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय‑अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँच बनाना है।
कार्यक्रम की रूपरेखा
अभियान के तहत सीताफल की पूरी मूल्य श्रृंखला—उत्पादन, संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन—पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिला स्तरीय कार्यशाला में सीताफल उत्पादक किसान, एफपीओ सदस्य, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमी और कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। नाबार्ड और APEDA के प्रतिनिधियों ने वित्तीय सहायता और निर्यात रणनीतियों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यशाला में बाजार‑उन्मुख तकनीकों, आधुनिक ग्रेडिंग मानकों और ब्रांडिंग के महत्व पर विस्तृत चर्चा हुई।
बाजार एवं निर्यात संभावनाएँ
जीआई टैग प्राप्त सीताफल को अब स्थानीय बाजार से परे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना है। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित पैकेजिंग और प्रमाणित ग्रेडिंग के साथ निर्यात के अवसर बढ़ेंगे, विशेषकर मध्य‑पूर्व और एशिया के देशों में। APEDA के सहयोग से निर्यात दस्तावेज़ीकरण और मानक अनुपालन को सरल बनाया जाएगा, जिससे किसानों को सीधे विदेशी खरीदारों से जुड़ने में सुविधा होगी।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: सिवनी जिला कृषि विभाग
• आयोजन: ‘सीताफल से समृद्धि’ अभियान कार्यशाला
• स्थान: सिवनी, उत्तर प्रदेश
• मुख्य उद्देश्य: सीताफल की मूल्य श्रृंखला विकसित करना और किसानों की आय बढ़ाना
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: जीआई टैग के साथ राष्ट्रीय‑अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रवेश, नाबार्ड‑APEDA सहयोग
• लक्ष्य: अगले दो वर्षों में सीताफल निर्यात में 20% वृद्धि
भविष्य की दिशा
आगे चलकर नियमित सर्वेक्षण, तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल पंजीयन के माध्यम से किसान‑उद्यमी जुड़ाव को मजबूत किया जाएगा। आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और ब्रांडिंग अभियान से सीताफल की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जिससे सतत विकास और सामाजिक‑आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित होगी। इस निरंतर फोकस से सिवनी के कृषि क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा और किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा।