(ब्यूरो कार्यालय)
बंग्लुरू (साई)। सोशल मीडिया पर घंटों स्क्रॉल करते रहने की आदत को लेकर दुनियाभर में बहस तेज है। Instagram पर एक वीडियो देखने के बाद लगातार उसी तरह के Reels सामने आना, Facebook पर पसंद से मिलते-जुलते पोस्ट दिखाई देना और YouTube पर एक वीडियो खत्म होते ही उससे मिलता-जुलता दूसरा वीडियो शुरू हो जाना आज के डिजिटल अनुभव का सामान्य हिस्सा बन चुका है।
लेकिन अब इसी व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठाया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने Digital Duty of Care के तहत एक प्रस्ताव जारी किया है, जिसमें यूजर्स को सोशल मीडिया की एल्गोरिदम आधारित फीड से बाहर निकलने का विकल्प देने की योजना है। प्रस्तावित “My Feed, My Way” पहल के तहत 16 वर्ष से अधिक उम्र के ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स को अपनी डिफॉल्ट फीड चुनने का अधिकार देने की बात कही गई है।
इसका मतलब यह नहीं है कि Instagram, Facebook या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद होने जा रहे हैं। असली बदलाव यह होगा कि यूजर यह तय कर सकेगा कि उसकी स्क्रीन पर कंटेंट प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम चुने या केवल उसके द्वारा फॉलो किए गए लोग और क्रिएटर्स दिखाई दें।
आखिर सोशल मीडिया एल्गोरिदम करता क्या है?
जब कोई यूजर Instagram, Facebook या YouTube खोलता है, तो उसे आमतौर पर हर पोस्ट या वीडियो सिर्फ समय के क्रम में नहीं मिलता। प्लेटफॉर्म यह अनुमान लगाने की कोशिश करता है कि यूजर किस तरह का कंटेंट देखना पसंद करेगा।
इसके लिए कई तरह के संकेत उपयोग किए जा सकते हैं, जैसे—
- यूजर ने कौन सा वीडियो देखा
- कितनी देर तक देखा
- किस पोस्ट को लाइक किया
- किस अकाउंट को फॉलो किया
- किन पोस्ट पर कमेंट किया
- किस तरह के कंटेंट को बार-बार देखा
- किन विषयों को शेयर या सेव किया
इन संकेतों के आधार पर recommender system अगली फीड तैयार करता है। ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सेफ्टी नियामक के अनुसार, ऐसे सिस्टम यूजर की जानकारी के आधार पर सामग्री चुनकर प्रदर्शित करते हैं और सोशल मीडिया फीड में recommended content की भूमिका बढ़ रही है।
यही व्यवस्था यूजर के लिए अनुभव को व्यक्तिगत बनाती है, लेकिन आलोचकों की चिंता यह है कि लगातार नया और आकर्षक कंटेंट मिलने से व्यक्ति प्लेटफॉर्म छोड़ने में अधिक समय लगा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया ने अब क्या प्रस्ताव रखा है?
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 8 सितंबर 2026 को Digital Duty of Care का exposure draft सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। इसके तहत “My Feed, My Way” पहल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स को उनकी डिफॉल्ट फीड के बारे में स्पष्ट विकल्प देना होगा।
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार 16 वर्ष से अधिक उम्र के यूजर्स से पूछा जाएगा कि वे—
Algorithm वाली personalized feed चाहते हैं या Following feed।
Following feed में यूजर द्वारा चुने गए दोस्त, अकाउंट और कंटेंट क्रिएटर शामिल होंगे। यानी प्लेटफॉर्म की सिफारिश प्रणाली को डिफॉल्ट रूप से हटाने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। यूजर बाद में अपनी पसंद बदल भी सकेगा।
इसलिए यह कहना कि ऑस्ट्रेलिया ने सोशल मीडिया एल्गोरिदम को पूरी तरह बंद कर दिया है, सही नहीं होगा। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य एल्गोरिदम को बंद करना नहीं, बल्कि यूजर को उससे बाहर निकलने का विकल्प देना है।
क्या Instagram और Facebook पर मनमर्जी के वीडियो बंद हो जाएंगे?
अगर प्रस्तावित व्यवस्था कानून बनती है और संबंधित प्लेटफॉर्म इसके दायरे में आते हैं, तो यूजर के पास अपनी फीड को नियंत्रित करने का अधिक अधिकार होगा।
मौजूदा मॉडल में प्लेटफॉर्म का सिस्टम यूजर के व्यवहार के आधार पर recommended content को फीड में प्रमुखता दे सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में यूजर के पास इसके बजाय केवल अपने चुने हुए अकाउंट्स की सामग्री देखने का विकल्प होगा।
यानी अंतर कुछ इस तरह समझा जा सकता है—
अभी क्या होता है?
आपने एक क्रिकेट वीडियो देखा। उसके बाद सिस्टम ने अनुमान लगाया कि आपको क्रिकेट पसंद है। फिर क्रिकेट से जुड़े कई और वीडियो आपकी फीड में आने लगे।
आपने उनमें से किसी दूसरे वीडियो पर ज्यादा समय बिताया तो सिस्टम को एक और संकेत मिला। इसके बाद वह उसी तरह की सामग्री दिखाने की संभावना बढ़ा सकता है।
नए विकल्प में क्या बदल सकता है?
यदि यूजर algorithmic feed से बाहर निकलता है, तो उसे केवल उन अकाउंट्स की पोस्ट दिखाई जा सकती हैं जिन्हें उसने खुद चुना है।
इस स्थिति में यूजर को अपनी फीड के लिए प्लेटफॉर्म की recommendation पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।
यह सोशल मीडिया बंद करने वाला कानून नहीं है
इस प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह हो सकती है कि Instagram, Facebook या दूसरी सेवाओं को बंद किया जा रहा है। ऐसा नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया की योजना सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की नहीं, बल्कि फीड के चुनाव पर यूजर को अधिक नियंत्रण देने की है।
यूजर अपने दोस्तों की पोस्ट देख सकता है, पसंदीदा क्रिएटर्स को फॉलो कर सकता है और अपनी पसंद का कंटेंट खोज सकता है। फर्क यह होगा कि recommended content को डिफॉल्ट फीड का हिस्सा बनाना है या नहीं, इसका विकल्प यूजर के पास रहेगा।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इसे सरकार द्वारा सोशल मीडिया कंटेंट नियंत्रित करने की कोशिश के बजाय यूजर को नियंत्रण देने वाली व्यवस्था के रूप में पेश किया है।
बच्चों और युवाओं की सुरक्षा भी केंद्र में
ऑस्ट्रेलिया का यह कदम केवल एल्गोरिदम तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित Digital Duty of Care के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों को कई प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए भी अधिक जिम्मेदारी डालने की योजना है।
सरकारी प्रस्ताव में बच्चों के लिए पोर्नोग्राफी, बुलिंग, मिसोजिनी, eating disorders को बढ़ावा देने वाले कंटेंट और अन्य गंभीर मनो-सामाजिक नुकसान से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देने की बात कही गई है।
ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर दुनिया के सबसे कड़े नियमों में से एक लागू कर चुका है। 10 दिसंबर 2025 से Instagram, Facebook, YouTube, TikTok समेत कई प्रमुख प्लेटफॉर्मों को 16 वर्ष से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स को अकाउंट रखने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने पड़ रहे हैं।
एल्गोरिदम और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता क्यों?
एल्गोरिदम खुद कोई एक तरह की तकनीक नहीं है और हर recommendation नुकसानदायक नहीं होती। इसके कई उपयोगी पहलू भी हैं। उदाहरण के लिए, यूजर को उसकी रुचि के अनुसार उपयोगी वीडियो, शिक्षा सामग्री या पसंदीदा क्रिएटर जल्दी मिल सकते हैं।
लेकिन ऑस्ट्रेलिया के eSafety Commissioner ने यह चिंता जताई है कि engagement को प्राथमिकता देने वाले recommender systems कभी-कभी सकारात्मक और नकारात्मक engagement के बीच पर्याप्त अंतर नहीं करते। ऐसे सिस्टम sensational, extreme या divisive content को भी अधिक पहुंच दिला सकते हैं।
यही कारण है कि अब बहस सिर्फ यह नहीं रह गई है कि सोशल मीडिया पर क्या कंटेंट मौजूद है। सवाल यह भी है कि कौन सा कंटेंट किस यूजर तक और किस क्रम में पहुंचाया जा रहा है।
क्या यूजर का स्क्रीन टाइम कम होगा?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक है, लेकिन इसका जवाब अभी निश्चित रूप से नहीं दिया जा सकता।
अगर कोई व्यक्ति personalized recommendations हटाकर केवल following feed इस्तेमाल करता है, तो उसे लगातार नए recommended videos की श्रृंखला कम दिखाई दे सकती है। इससे कुछ यूजर्स के लिए अनंत स्क्रॉलिंग कम हो सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति का स्क्रीन टाइम अपने आप घट जाएगा।
यदि कोई यूजर खुद लगातार दोस्तों की पोस्ट, क्रिएटर्स या किसी विशेष विषय की सामग्री खोजता और देखता है, तो वह लंबे समय तक ऐप इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए एल्गोरिदम हटना और सोशल मीडिया की लत पूरी तरह खत्म होना एक ही बात नहीं है।
Big Tech कंपनियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यूजर engagement एक महत्वपूर्ण कारोबारी तत्व है। प्लेटफॉर्म पर यूजर जितना समय बिताता है, उतनी अधिक सामग्री और विज्ञापन उसके सामने आने की संभावना होती है।
इसी वजह से personalized recommendation systems सोशल मीडिया उत्पादों के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं।
अगर बड़ी संख्या में यूजर्स algorithmic feed से बाहर निकलते हैं, तो प्लेटफॉर्म के लिए recommendation-based engagement का स्वरूप बदल सकता है।
हालांकि ऑस्ट्रेलियाई सरकार का प्रस्ताव अभी कानून बनकर लागू नहीं हुआ है, इसलिए इसके वास्तविक व्यावसायिक प्रभाव का आकलन करना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
Instagram प्रमुख ने भी दी प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलिया के प्रस्ताव के बाद Instagram प्रमुख Adam Mosseri ने algorithmic feed को लेकर चेतावनी दी कि औसत यूजर के लिए algorithm बंद करने पर अनुभव खराब हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि Instagram पर chronological यानी following-based feed का विकल्प पहले से उपलब्ध है, हालांकि वह विकल्प ऐप दोबारा खोलने पर फिर algorithmic feed में लौट सकता है।
यह प्रतिक्रिया बताती है कि बहस केवल सरकार और टेक कंपनियों के बीच नहीं है। मूल सवाल यह है कि यूजर को recommendation system कितना पसंद है और क्या उसे उसे पूरी तरह हटाने का वास्तविक, आसान और लगातार उपलब्ध विकल्प मिलना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में यह पहली बड़ी डिजिटल पाबंदी नहीं
एल्गोरिदम से जुड़े प्रस्ताव को समझने के लिए ऑस्ट्रेलिया की पिछली ऑनलाइन सुरक्षा नीति भी महत्वपूर्ण है।
दिसंबर 2025 से 16 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर प्रतिबंध लागू हैं। मार्च 2026 में नियमों में बदलाव कर recommender features और endless-feed जैसे features को भी age-restricted platform की पहचान से जोड़ा गया।
जुलाई 2026 में जारी शुरुआती मूल्यांकन में eSafety ने बताया कि मार्च 2026 तक 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सोशल मीडिया अकाउंट रखने का अनुपात 52.4 प्रतिशत से घटकर 42.1 प्रतिशत हुआ था। यह शुरुआती आंकड़ा है और इसके दीर्घकालीन प्रभावों का अध्ययन अभी जारी है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ऑस्ट्रेलिया का फैसला?
भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट और सोशल मीडिया बाजारों में शामिल है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया जैसे देश का algorithmic recommendation पर यूजर-choice आधारित मॉडल अपनाना वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रयोग बन सकता है।
हालांकि भारत में ऐसा नियम लागू हो गया है, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया का मौजूदा प्रस्ताव ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स के लिए है।
लेकिन यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है और अन्य देशों में भी इसी तरह के नियमों की मांग बढ़ती है, तो भारत में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, screen time, personalized recommendation और data-driven advertising को लेकर नीति बहस तेज हो सकती है।
आम यूजर को क्या फायदा और नुकसान हो सकता है?
संभावित फायदे
- फीड पर यूजर का नियंत्रण बढ़ सकता है।
- अनचाहे recommended content की मात्रा कम हो सकती है।
- लगातार personalized scrolling से दूरी बनाने में मदद मिल सकती है।
- यूजर खुद तय कर सकता है कि किन अकाउंट्स की पोस्ट देखनी हैं।
- बच्चों और युवाओं के लिए online safety पर ज्यादा ध्यान संभव है।
संभावित नुकसान
- पसंदीदा नया कंटेंट खोजने में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।
- छोटे क्रिएटर्स तक पहुंचने का तरीका बदल सकता है।
- कुछ यूजर्स के लिए personalized experience कम उपयोगी हो सकता है।
- following feed में कंटेंट की विविधता कम महसूस हो सकती है।
- algorithmic recommendation बंद होने के बावजूद screen time जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति का कम हो।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ऑस्ट्रेलिया का Digital Duty of Care प्रस्ताव consultation चरण में है। यानी इसे अंतिम कानून मानना सही नहीं होगा। सरकार को प्रस्ताव पर हितधारकों से प्रतिक्रिया लेनी है और इसके बाद कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह रहेगा कि यूजर को algorithm बंद करने का विकल्प कितना आसान और वास्तविक बनाया जाता है।
सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि यूजर अपनी पसंद को बाद में बदल सकेगा। साथ ही सरकार इस बात पर भी नजर रख रही है कि कंपनियां opt-out विकल्प को इतना कठिन न बना दें कि व्यवहार में उसका इस्तेमाल मुश्किल हो जाए।
ऑस्ट्रेलिया का नया प्रस्ताव सोशल मीडिया की दुनिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत कर सकता है। Instagram, Facebook और अन्य प्लेटफॉर्म से algorithm पूरी तरह हटाने की योजना नहीं है, बल्कि यूजर्स को personalized recommendation वाली फीड से बाहर निकलने का विकल्प देने की कोशिश की जा रही है।
यदि प्रस्तावित व्यवस्था कानून बनती है, तो 16 वर्ष से अधिक उम्र के ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स यह चुन सकेंगे कि वे एल्गोरिदम द्वारा सुझाई गई सामग्री देखना चाहते हैं या केवल उन लोगों और क्रिएटर्स की पोस्ट जिन्हें उन्होंने स्वयं फॉलो किया है।
इस पहल का सबसे बड़ा असर सिर्फ सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के तरीके पर नहीं, बल्कि यूजर की डिजिटल स्वतंत्रता, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और Big Tech की जवाबदेही पर पड़ सकता है।
भारत में अभी ऐसा नियम लागू नहीं हुआ है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग निश्चित रूप से दुनिया के दूसरे देशों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यूजर्स वास्तव में algorithm-free feed को कितना अपनाते हैं और क्या इससे स्क्रीन टाइम तथा हानिकारक कंटेंट की पहुंच में कोई ठोस बदलाव आता है।