इस तरह करें द्वितीया का श्राद्ध, पितर होंगे आपसे प्रसन्न, देंगे मन भरकर आशीष . . .

ऐसी मान्यताएं हैं कि त्रेता युग में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता राजा दशरथ के पिंडदान के लिए यहीं आये थे और यही कारण है की आज पूरी दुनिया अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए आती है। गया श्राद्ध का क्रम 1 दिन से लेकर 17 दिनों तक का होता है। 1 दिन में गया श्राद्ध कराने वाले लोग विष्णुपद फल्गु नदी और अक्षय वट में श्राद्ध पिंडदान कर सुफल देकर यह अनुष्ठान समाप्त करते हैं। वह एक दृष्टि गया श्राद्ध कहलाता है। वहीं, 7 दिन के कर्म केवल सकाम श्राद्ध करने वालों के लिए है। इन 7 दिनों के अतिरिक्त वैतरणी भसमकुट, गो प्रचार आदि गया आदि में भी स्नान-तर्पण-पिंडदानादि करते हैं। इसके अलावा 17 दिन का भी श्राद्ध होता है।

दूसरे दिन के श्राद्ध का विधि विधान, किसका किया जाएगा श्राद्ध! जानिए सब कुछ विस्तार से . . .