उज्जैन में 25 हजार कन्याओं का पूजन, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज – नवरात्र पर नारी शक्ति को समर्पित ऐतिहासिक आयोजन

उज्जैन में नवरात्र पर्व के अवसर पर 121 स्थलों पर एक साथ 25 हजार से अधिक कन्याओं का पूजन किया गया। इस अनोखे आयोजन को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे आस्था, परंपरा और नारी शक्ति के सम्मान का अनुपम उदाहरण बताया।

नवरात्र पर्व: आस्था, परंपरा और शक्ति का प्रतीक

(ब्यूरो कार्यालय)

उज्जैन (साई)।  नवरात्र पर्व भारतीय संस्कृति का वह महापर्व है जो नारी शक्ति के सम्मान और आस्था के साथ समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है। नौ दिनों तक माता दुर्गा की उपासना पूरे देशभर में भक्ति, उत्साह और श्रद्धा के साथ की जाती है। इस वर्ष भी देश के कई हिस्सों में भव्य आयोजन हुए, लेकिन उज्जैन ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित करते हुए खुद को वैश्विक मंच पर स्थापित कर दिया।

उज्जैन बना गवाह अद्भुत आयोजन का

मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी माने जाने वाले उज्जैन में इस बार नवरात्र पर्व को एक नए अंदाज में मनाया गया।

  • 121स्थलों पर एक साथ 25हजार से अधिक कन्याओं का पूजन किया गया।
  • इस अनोखे आयोजन ने न केवल भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को जीवित किया बल्कि इसे विश्व पटल पर भी स्थापित कर दिया।
  • आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कर वैश्विक पहचान मिली।

यह आयोजन उज्जैन की पवित्र धरा पर भारतीय संस्कृति की जड़ों और आधुनिक समाज में नारी सम्मान के महत्व को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक अवसर पर कहा –

“नवरात्र केवल आस्था और परंपरा का पर्व नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण है। उज्जैन की यह उपलब्धि न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।”

उन्होंने कहा कि यह आयोजन नारी शक्ति के सम्मान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हुआ आयोजन

विश्व रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करना किसी भी आयोजन के लिए गर्व की बात होती है। उज्जैन का यह कार्यक्रम अब गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में शामिल हो चुका है।

  • 25 हजार से अधिक कन्याओं का एक साथ पूजन विश्व स्तर पर एक अनोखा उदाहरण बना।
  • इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का रूप मानकर उसकी पूजा की परंपरा आज भी जीवंत है।

आयोजन का नेतृत्व और समिति की भूमिका

इस ऐतिहासिक आयोजन का नेतृत्व लोकमान्य तिलक समिति ने किया। समिति के संयोजक विधायक अनिल जैन कालूहेडा ने कहा:

“इस आयोजन की सफलता में उज्जैन के नागरिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हर नागरिक ने इस आयोजन को अपना समझकर सहयोग दिया।”

समिति के कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने पूरे शहर में व्यवस्थाओं को संभालते हुए इसे ऐतिहासिक रूप दिया।

कन्या पूजन का महत्व

भारतीय संस्कृति में कन्या पूजन को विशेष स्थान दिया गया है।

  1. धार्मिक दृष्टि से – नवरात्र के दौरान कन्या पूजन को नौ देवियों का पूजन माना जाता है।
  2. सामाजिक दृष्टि से – यह आयोजन समाज में बालिकाओं और महिलाओं के प्रति सम्मान का संदेश देता है।
  3. वैश्विक दृष्टि से – उज्जैन में हुआ यह आयोजन पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति की महानता से परिचित कराता है।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

  • राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेश नाथ जी महाराज
  • विधायक श्री सतीश मालवीय
  • महापौर श्री मुकेश टटवाल
  • नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव
  • श्री संजय अग्रवाल,श्री राजेंद्र भारती,श्री शांतिलाल जैन,श्री दिनेश जाटवा

इन सभी की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

महिलाओं और बच्चियों की खुशी का अनोखा पल

इस भव्य आयोजन में शामिल बच्चियों और उनके परिवारों के चेहरों पर खुशी स्पष्ट दिखाई दी।

  • कन्याओं को विशेष वस्त्र, पूजन सामग्री और सम्मान स्वरूप उपहार प्रदान किए गए।
  • पूरा माहौल उत्साह, श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण हो गया।
  • नागरिकों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।

उज्जैन की धरा और सांस्कृतिक पहचान

उज्जैन महाकाल की नगरी के रूप में विख्यात है। यहाँ आयोजित हर पर्व, हर आयोजन पूरे देश और दुनिया का ध्यान खींचता है।

  • महाकालेश्वर मंदिर की पावनता और उज्जैन की धार्मिक परंपरा ने इस आयोजन को और विशेष बना दिया।
  • यह आयोजन उज्जैन को न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी विश्व मानचित्र पर स्थापित करता है।

आयोजन से जुड़े सामाजिक संदेश

यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से कई महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी दिए गए:

  1. नारी का सम्मान सर्वोपरि है।
  2. सामूहिक प्रयास से बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
  3. भारतीय संस्कृति विश्व को दिशा देने में सक्षम है।
  4. समाज में बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

भविष्य के लिए प्रेरणा

उज्जैन का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

  • यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का माध्यम है।
  • आने वाले वर्षों में ऐसे आयोजन अन्य शहरों में भी प्रेरणा लेकर आयोजित किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

नवरात्र पर्व भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उज्जैन में हुआ 25हजार कन्याओं का पूजन न केवल आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम है, बल्कि यह गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होकर वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति की महत्ता को स्थापित करता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि नवरात्र पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी सम्मान और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण है। लोकमान्य तिलक समिति, नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से सफल हुआ यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।