(सौमित्र श्रीवास्तव)
विदिशा (साई)।प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज विदिशा जिले के बासौदा के प्रसिद्ध उदयपुर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव का पूजन-अर्चना किया। उन्होंने दूध, दही और पंचामृत से अभिषेक करते हुए प्रदेश की खुशहाली, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। यह कार्यक्रम आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक गौरव और प्राचीन विरासत के संरक्षण का प्रतीक बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोमनाथ मंदिर के गौरव को पुनर्प्रतिष्ठित करने के लिए चल रहे प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की और कहा कि सनातन संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान मिल रही है।
सोमनाथ के हजार वर्षों का इतिहास और2026का प्रतीकात्मक महत्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि वर्ष 1026 में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर उसे ध्वस्त कर दिया था। आक्रमण की इस घटना को राष्ट्र और सनातन संस्कृति की अस्मिता पर गहरा आघात माना गया था। इसके ठीक 1000 वर्ष बाद—वर्ष 2026—भारत सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहा है, जो सहनशीलता, पुनरुत्थान और सांस्कृतिक निरंतरता का महत्त्वपूर्ण प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि
“सोमनाथ मंदिर हजार वर्षों के उतार-चढ़ाव और अनेक चुनौतियों के बाद भी आज उसी भव्यता और गौरव के साथ खड़ा है। यह हमारी आस्था, परंपरा और सामूहिक प्रयासों का अद्भुत स्मारक है। मंदिर निर्माण के 75 वर्ष भी 2026 में पूरे हो रहे हैं, जो इस पर्व के महत्व को और बढ़ाते हैं।”
मुख्यमंत्री के अनुसार सोमनाथ स्वाभिमान पर्व न केवल अतीत की स्मृतियों का सम्मान है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति और धार्मिक धरोहर के उत्थान का प्रमाण भी है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संस्कृति का पुनर्जागरण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशभर में चल रहे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण कार्यों की विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए कहा:
- अयोध्या में भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा और राम मंदिर का उद्घाटन
- उज्जैन में महाकाल महालोक का अभूतपूर्व विस्तार
- वाराणसी में बाबा विश्वनाथ धाम का विश्व स्तरीय विकास
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को पूरी दुनिया के सामने और मजबूती से स्थापित कर रहा है। सोमनाथ को पुनर्प्रतिष्ठित करने के अभियान के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को पुनः बधाई देते हुए कहा,
“यह अभियान भारत की एकता, गौरव और सनातन संस्कृति को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला है।”
उदयपुर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर:1000वर्ष पुरानी धरोहर
मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना के बाद कहा कि उदयपुर का नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत सुंदर और प्राचीन स्थल है जो लगभग 1000 वर्षों पुराना माना जाता है। यह मंदिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है और अपनी अद्भुत नक्काशी के कारण खजुराहो शैली का प्रतिरूप प्रतीत होता है।
मंदिर की प्रमुख विशेषताएँ—
- अद्वितीय शिल्पकला
- सूर्य की प्रथम किरण का शिवलिंग पर सीधे पड़ना
- हर वर्ष महाशिवरात्रि पर 5 दिवसीय भव्य मेला
- गणितीय, खगोलीय और स्थापत्य ज्ञान का अद्भुत समन्वय
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मंदिर धार्मिक, पुरातात्विक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे और भव्य बनाया जाएगा।
मंदिर विकास के लिए होंगे विशेष कार्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंदिर प्रांगण को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले भक्तों और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। उन्होंने संकेत दिए कि:
- प्राचीन शिल्प संरक्षण
- मार्गों का सुधार
- परिसर में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार
- धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
- पुरातत्व से जुड़े शोधार्थियों के लिए ज्ञान केंद्र
राज्य सरकार मंदिर क्षेत्र को ‘आस्था, इतिहास और पर्यटन’ के केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना बना रही है।
सामाजिक और प्रशासनिक महत्व
नीलकंठेश्वर मंदिर का यह दौरा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय विकास को बढ़ावा देने की ओर एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
इस कार्यक्रम के दौरान:
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल
- जिले के प्रभारी मंत्री लखन पटेल
- सागर सांसद लता वानखेड़े
- कुरवाई विधायक हरी सिंह सप्रे
- बासौदा विधायक हरी सिंह रघुवंशी
- विदिशा विधायक मुकेश टंडन
सहित अनेक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इसे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आयोजन का रूप दिया।
स्थानीय जनता का उत्साह और प्रतिक्रिया
मंदिर में मुख्यमंत्री के आगमन से स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखने को मिला। लोग सुबह से ही मंदिर परिसर में जुटने लगे और अनेक लोगों ने इसे “ऐतिहासिक क्षण” बताया।
जनता की प्रतिक्रियाएँ—
- “मुख्यमंत्री के आने से मंदिर के विकास को नई दिशा मिलेगी।”
- “उदयपुर मंदिर अंतरराष्ट्रीय पहचान पा सकता है, जरुरत है सही संरक्षण की।”
- “सनातन संस्कृति के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम सराहनीय हैं।”
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों में विकास की बड़ी परियोजनाएँ देखने को मिलेंगी।
आगामी संभावनाएँ और सांस्कृतिक प्रभाव
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और नीलकंठेश्वर मंदिर के विकास को प्रदेश की सांस्कृतिक दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- धार्मिक पर्यटन में तेजी आएगी
- विदिशा-बासौदा क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व बढ़ेगा
- स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- सांस्कृतिक अध्ययन और पुरातात्विक शोध को नई दिशा मिलेगी
राज्य सरकार के प्रयासों से यह क्षेत्र मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण धार्मिक-पर्यटन केंद्र बन सकता है।
8️⃣ निष्कर्ष
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की घोषणा और उदयपुर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पूजा-अर्चना ने प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना को नया आयाम दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की यह धारा आगे बढ़ रही है और राज्य सरकार इसे स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई देती है।
प्राचीन मंदिरों का संरक्षण केवल आस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि इतिहास, विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय भी है। मुख्यमंत्री का यह दौरा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होता है।

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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