मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में लौटी रौनक: नामांकन में 32.4% की भारी बढ़ोतरी

मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में ‘राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव-2026’ का शुभारंभ करते हुए बताया कि सरकारी स्कूलों में नामांकन में 32.4 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। “स्कूल चले हम” अभियान के माध्यम से सरकार ने इस वर्ष 1 करोड़ 45 लाख विद्यार्थियों के नामांकन का लक्ष्य रखा है, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर जनता के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया ‘प्रवेशोत्सव-2026’ का आगाज

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक स्वर्णिम युग की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल के मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, टी.टी. नगर में ‘राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव-2026’ का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के साथ एक उत्साहजनक डेटा साझा किया, जो राज्य की बदलती शैक्षणिक तस्वीर को बयां करता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश के शासकीय विद्यालयों के प्रति अभिभावकों और बच्चों का आकर्षण तेजी से बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप नामांकन (Enrollment) में 32.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

“स्कूल चले हम” अभियान: ड्रॉप आउट को शून्य करने का संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग को बधाई देते हुए कहा कि “स्कूल चले हम” अभियान महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों को उज्जवल भविष्य से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि शासकीय स्कूलों में ‘ड्रॉप आउट’ (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चे) की संख्या अब शून्य की ओर बढ़ रही है।

राज्य सरकार ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कुल 1 करोड़ 45 लाख विद्यार्थियों के नामांकन का महा-लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश प्रक्रिया को इतना सरल बना दिया गया है कि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर न रहे। वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कुल नामांकन में 19.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो सरकार की नीतियों की सफलता को दर्शाता है।

सांदीपनि और पीएमश्री स्कूल: आधुनिक शिक्षा के नए केंद्र

प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार ने ‘सांदीपनि विद्यालयों’ की श्रृंखला शुरू की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 369 भव्य सांदीपनि विद्यालय शुरू किए गए हैं, जो बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक स्तर के मामले में देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों की श्रेणी में आते हैं। इसके साथ ही ‘पीएमश्री’ स्कूलों के माध्यम से आधुनिक लैब, रोबोटिक्स और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण:

  • भव्य स्वागत: मुख्यमंत्री के आगमन पर विद्यार्थियों ने साइकिलों की घंटियां बजाकर उनका अभिवादन किया।
  • पुष्प वर्षा: डॉ. यादव ने स्वयं मंच से बच्चों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
  • प्रदर्शनी का अवलोकन: मुख्यमंत्री ने अटल टिंकरिंग लैब, रोबोटिक लैब और आईसीटी लैब के स्टॉल्स का बारीकी से निरीक्षण किया।

विद्यार्थियों को प्रोत्साहन: साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी की सौगात

राज्य सरकार ने शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए बजट में भारी प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नि:शुल्क साइकिलें और पाठ्य पुस्तकें वितरित कीं। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 3 से 4 महीनों के भीतर प्रदेश के 4 लाख बच्चों को साइकिलें प्रदान की जाएंगी।

वित्तीय प्रावधान और प्रोत्साहन योजनाएं:

  • लैपटॉप योजना: वर्ष 2025-26 की बोर्ड परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले 94,306 मेधावी छात्रों को लैपटॉप दिए गए। इसके लिए आगामी बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
  • स्कूटी वितरण: स्कूल टॉपर विद्यार्थियों को स्कूटी देने के लिए 100 करोड़ रुपये सुरक्षित रखे गए हैं।
  • साइकिल वितरण: इसके लिए 210 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
  • नि:शुल्क सुविधाएं: गणवेश (यूनिफॉर्म), किताबें और गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार: 76 हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति

मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ यानी शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षकों की कमी को दूर करना सरकार की प्राथमिकता रही है। इसी के तहत रिकॉर्ड समय में 76,325 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। कार्यक्रम में उन शिक्षकों और अभिभावकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने बच्चों को पुनः स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं।

स्थानीय भाषाओं में शिक्षा और जनजातीय कल्याण

नई शिक्षा नीति-2020 (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों के लिए 49 पुस्तकें हिंदी और स्थानीय भाषाओं में तैयार कर वितरित की जा रही हैं। अनुसूचित जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले 25,439 विद्यालयों में आज 20 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। वहीं, अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए 1913 छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है, जिनकी क्षमता 95 हजार है।

प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव: विकासखंड स्तर पर बुक फेयर

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन विभाग के लिए ‘दीपावली’ जैसा उत्सव है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अब विकासखंड (Block) स्तर पर ‘बुक फेयर’ (पुस्तक मेले) लगाए जाएंगे। इन मेलों में न केवल सरकारी स्कूल, बल्कि निजी स्कूलों के बच्चों को भी पाठ्यपुस्तक निगम की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों का बोझ कम होगा।

जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने भी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सशक्त होती शिक्षा व्यवस्था की सराहना की और कहा कि आज मध्यप्रदेश के बच्चों के पास डॉक्टर, इंजीनियर और उद्यमी बनने के बेहतरीन अवसर उपलब्ध हैं।

भविष्य की संभावनाएं और सरकारी संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन मध्यप्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। “स्कूल चले हम” अभियान का विस्तार अब प्रदेश के सभी 55 जिलों के प्रत्येक गांव तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दो वर्षों में सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा निजी स्कूलों से भी बेहतर हो जाए, ताकि प्रतिभा को केवल संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।

निष्कर्ष (Conclusion)

मध्यप्रदेश में ‘प्रवेशोत्सव-2026’ का यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव का शंखनाद है। सरकारी स्कूलों में 32.4 प्रतिशत की नामांकन वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने शिक्षा को ‘राजनीति’ से ऊपर उठाकर ‘राष्ट्र निर्माण’ का माध्यम बनाया है। मुफ्त साइकिल, लैपटॉप, स्कूटी और किताबों जैसी योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के सपनों को पंख दिए हैं। यदि शिक्षा के प्रति यही उत्साह बना रहा, तो मध्यप्रदेश के विद्यार्थी आने वाले समय में वैश्विक पटल पर राज्य का नाम रोशन करेंगे।

इस ऐतिहासिक कदम के साथ, मध्यप्रदेश ने पूरे देश के सामने एक रोल मॉडल पेश किया है कि कैसे दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से सरकारी शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प किया जा सकता है।

उपस्थिति: कार्यक्रम में खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री कृष्णा गौर, महापौर मालती राय, विधायक भगवान दास सबनानी सहित वरिष्ठ अधिकारी और हजारों की संख्या में छात्र-अभिभावक उपस्थित रहे।